जाते जाते कुछ कह गए सुशांत



जाते जाते कुछ कह गए सुशांत

आर के रस्तोगी

जाते जाते कुछ कह गए सुशांत,
सुशांत होकर करा अपने को शान्त।
था तनाव में करी क्यो खुद कशी,
मन में नहीं थी शायद कोई खुशी।

दुख है हमे तुम अपने शौक पूरे न कर पाए।
अपनी आखरी मंजिल तक न पहुंच पाए।।
सूना सूना सा लगता हैं ये सारा फिल्मी संसार।
रों रहे सभी आज तुम्हारे फिल्मी नाती रिश्तेदार ।

अल्प अवस्था में क्यो तुमने मृत्यु से नाता जोड़ा ?
अभी तो बहुत करना था क्यो फिल्मों से नाता तोड़ा ?
एक चमकता सितारा क्यो गगन से लुप्त हो गया।
फिल्मी जीवन से इतनी जल्दी क्यों मुक्त हो गया।।

तुम थे पक्के राजपूत और मां के सच्चे सपूत।
करनी पड़ी क्यो तुमको ऐसी कच्ची करतूत ?
लगाया क्यो मौत को गले से ऐसे तुमने ?
अभी तो बहुत कार्य करने थे फिल्म जगत में तुमने।।

प्रश्नों पर प्रश्न उलझते जा रहे
कोई भी प्रश्न न सुलझते जा रहे।
जानना चाहता यह सब कुछ जमाना,
आधी हकीकत है आधा फ़साना।

आर के रस्तोगी 
गुरुग्राम

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