अपने दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने लिखा देशवासियों के नाम खुला पत्र


अपने दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने लिखा देशवासियों के नाम खुला पत्र

डॉ॰ राकेश कुमार आर्य

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में दूसरे कार्यकाल का शुभारंभ पिछले वर्ष 30 मई को हुआ था । अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष की अवधि पूर्ण होने के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जनता से जुड़ने का फिर एक अनूठा और नायाब तरीका खोज लिया । वैसे भी श्री मोदी जनता के साथ संवाद करने वाले प्रधानमंत्री के रूप में जाने जाते हैं । प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देश की जनता के नाम एक खुला पत्र लिखा है।
श्री मोदी की यह विशेषता है कि वह भारत की उपलब्धियों को भारत की जनता के नाम बहुत बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर देते हैं । जिससे देशवासी अपने आप को न केवल गौरवान्वित अनुभव करते हैं अपितु उन्हें ऐसा भी लगता है कि जैसे वह भी देश की महान उपलब्धियों में एक ईकाई के रूप में सम्मिलित हैं। अपनी इसी शैली का परिचय देते हुए प्रधानमंत्री ने देश की जनता को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए देश के लोकतंत्र की सामूहिक शक्ति को पूरे विश्व के लिए एक उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि यदि भारत सारे संसार के लिए इस समय एक उदाहरण बन पाया है तो उसमें जनता की भागीदारी , सहभागिता और उसका आशीर्वाद सबसे बड़ी ताकत है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को इस अवसर पर देश की इन महान उपलब्धियों का श्रेय प्रदान करते हुए कहा है कि यह अवसर जनता को नमन करने का , भारत और भारतीय लोकतंत्र के प्रति इस निष्ठा को प्रणाम करने का है।

अपने पत्र में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जिस प्रकार शब्दों को पिरोने का प्रयास किया है उससे चाहे उन्होंने सरकारी स्तर पर अपनी सरकार के एक वर्ष पूर्ण होने के इस अवसर को पर कोई आयोजन ना किया हो , पर वास्तव में वह इस पत्र के माध्यम से लोगों के दिलों में उतरकर एक दीप जलाने में अवश्य सफल हो गए हैं , और यह दीप ही उनकी वह ताकत है जो उन्हें अंधेरों में मार्ग दिखाता है । क्योंकि इस दीप के माध्यम से उन्हें देश के कोटि-कोटि लोगों का आशीर्वाद प्राप्त होता है । वास्तव में ऐसी सोच किसी भी प्रधानमंत्री को न केवल लोकप्रिय अपितु एक दार्शनिक और संवेदनशील बुद्धि के व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करती है । देश पर शासन करना वास्तव में एक अलग बात है , जबकि देशवासियों के दिलों पर शासन करना सर्वथा दूसरी बात है । देशवासियों के दिलों पर शासन करते रहना भी उस समय प्रशंसनीय हो जाता है , जब व्यक्ति निरंतर कई वर्ष तक अपनी लोकप्रियता के उच्चतम शिखर पर न केवल बना रहे बल्कि अपने लिए तालियां बजवाने में भी सफल होता रहे । मोदी विरोधी चाहे इसे प्रधानमंत्री मोदी का फेकू स्वभाव कहें या उनका ‘ड्रामा ‘ कहें , परंतु वास्तविकता यही है कि उनकी इस कला से उनके व्यक्तित्व में विलक्षणता का पुट लोगों को दिखाई देता है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है :–

मैं आपके चरणों में प्रणाम करने और आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ’
मेरे प्रिय स्नेहीजन,
आज से एक साल पहले भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ा। देश में दशकों बाद पूर्ण बहुमत की किसी सरकार को लगातार दूसरी बार जनता ने ज़िम्मेदारी सौंपी थी। इस अध्याय को रचने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में आज का यह दिन मेरे लिए, अवसर है आपको नमन करने का, भारत और भारतीय लोकतंत्र के प्रति आपकी इस निष्ठा को प्रणाम करने का।
यदि सामान्य स्थिति होती तो मुझे आपके बीच आकर आपके दर्शन का सौभाग्य मिलता। लेकिन, वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से जो परिस्थितियाँ बनी हैं, उन परिस्थितियों में, मैं इस पत्र के द्वारा आपके चरणों में प्रणाम करने और आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ। बीते वर्ष में आपके स्नेह, शुभाशीष और आपके सक्रिय सहयोग ने मुझे निरंतर एक नई ऊर्जा, प्रेरणा दी है।
इस दौरान आपने लोकतंत्र की जिस सामूहिक शक्ति के दर्शन कराए वह आज विश्व के लिए एक मिसाल बन चुकी है। वर्ष 2014 में आपने, देश की जनता ने, देश में एक बड़े परिवर्तन के लिए वोट किया था, देश की नीति और रीति बदलने के लिए वोट किया था। उन पाँच वर्षों में देश ने व्यवस्थाओं को जड़ता और भ्रष्टाचार के दलदल से बाहर निकलते हुए देखा है।
उन पाँच वर्षों में देश ने अंत्योदय की भावना के साथ गरीबों का जीवन आसान बनाने के लिए गवर्नेंस को परिवर्तित होते देखा है। उस कार्यकाल में जहाँ विश्व में भारत की आन-बान-शान बढ़ी, वहीं हमने गरीबों के बैंक खाते खोलकर, उन्हें मुफ्त गैस कनेक्शन देकर, मुफ्त बिजली कनेक्शन देकर, शौचालय बनवाकर, घर बनवाकर, गरीब की गरिमा भी बढ़ाई।
उस कार्यकाल में जहाँ सर्जिकल स्ट्राइक हुई, एयर स्ट्राइक हुई, वहीं हमने वन रैंक वन पेंशन, वन नेशन वन टैक्स- GST, किसानों की MSP की बरसों पुरानी माँगों को भी पूरा करने का काम किया। वह कार्यकाल देश की अनेकों आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहा। वर्ष 2019 में आपका आशीर्वाद, देश की जनता का आशीर्वाद, देश के बड़े सपनों के लिए था, आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए था।
भारत की ऐतिहासिक यात्रा में जनता का योगदानऔर इस एक साल में लिए गए फैसले इन्हीं बड़े सपनों की उड़ान है। आज जन-जन से जुड़ी जन-मन की जनशक्ति, राष्ट्रशक्ति की चेतना को प्रज्वलित कर रही है। गत एक वर्ष में देश ने सतत नए स्वप्न देखे, नए संकल्प लिए और इन संकल्पों को सिद्ध करने के लिए कदम भी बढ़ाए। भारत की इस ऐतिहासिक यात्रा में देश के हर समाज, हर वर्ग और हर व्यक्ति ने बखूबी अपना दायित्व निभाया है।
सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ इस मंत्र को लेकर आज देश सामाजिक हो या आर्थिक, वैश्विक हो या आंतरिक, हर दिशा में आगे बढ़ रहा है। बीते एक वर्ष में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ज्यादा चर्चा में रहे और इस वजह से इन उपलब्धियों का स्मृति में रहना भी बहुत स्वाभाविक है।
अनुच्छेद 370, अयोध्या में राम मन्दिर, तीन तलाक और CAA जैसे ऐतिहासिक फैसले
राष्ट्रीय एकता-अखंडता के लिए आर्टिकल 370 की बात हो, सदियों पुराने संघर्ष के सुखद परिणाम- राम मंदिर निर्माण की बात हो, आधुनिक समाज व्यवस्था में रुकावट बना ट्रिपल तलाक हो, या फिर भारत की करुणा का प्रतीक नागरिकता संशोधन कानून हो, ये सारी उपलब्धियाँ आप सभी को स्मरण हैं
इन ऐतिहासिक निर्णयों के बीच अनेक फैसले, अनेक बदलाव ऐसे भी हैं जिन्होंने भारत की विकास यात्रा को नई गति दी है, नए लक्ष्य दिए हैं, लोगों की अपेक्षाओं को पूरा किया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के गठन ने जहाँ सेनाओं में समन्वय को बढ़ाया है, वहीं मिशन गगनयान के लिए भी भारत ने अपनी तैयारियाँ तेज कर दी हैं
इस दौरान गरीबों, किसानों, महिलाओं-युवाओं को सशक्त करना हमारी प्राथमिकता रही है। अब पीएम किसान सम्मान निधि के दायरे में देश का प्रत्येक किसान आ चुका है। बीते एक वर्ष में इस योजना के तहत 9 करोड़ 50 लाख से ज्यादा किसानों के खातों में 72 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा कराई गई है
देश के 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में पीने का शुद्ध पानी पाइप से मिले, इसके लिए जल जीवन मिशन शुरू किया गया है। हमारे 50 करोड़ से अधिक के पशुधन के बेहतर स्वास्थ्य के लिए मुफ्त टीकाकरण का बहुत बड़ा अभियान भी चलाया जा रहा है।
देश के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ है जब, किसान, खेत मजदूर, छोटे दुकानदार और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक साथियों, सभी के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद 3 हज़ार रुपए की नियमित मासिक पेंशन की सुविधा सुनिश्चित हुई है।
मछुआरों की सहूलियत बढ़ाने के लिए, उनको मिलने वाली सुविधाएँ बढ़ाने और ब्लू इकॉनॉमी को मजबूत करने के लिए विशेष योजनाओं के साथ-साथ अलग से विभाग भी बनाया गया है। इसी तरह व्यापारियों की समस्याओं के समय पर समाधान के लिए व्यापारी कल्याण बोर्ड के निर्माण का निर्णय लिया गया है।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 7 करोड़ बहनों को भी अब ज्यादा वित्तीय सहायता दी जा रही है। हाल में ही स्वयं सहायता समूहों के लिए बिना गारंटी के ऋण को 10 लाख से बढ़ाकर दोगुना यानी 20 लाख कर दिया गया है। आदिवासी बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए, देश में 450 से ज्यादा नए एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूलों के निर्माण का अभियान भी शुरू किया गया है।
सामान्य जन के हित से जुड़े बेहतर कानून बनें, इसके लिए भी तेज गति से कार्य हुआ है। संसद ने अपने कामकाज से दशकों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसी का परिणाम है कि चाहे कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट हो, चिटफंड कानून में संशोधन हो, दिव्यांगों, महिलाओं और बच्चों को अधिक सुरक्षा देने वाले कानून हों, ये सब तेज़ी से बन पाए हैं।
कम हुआ रूरल और अर्बन के बीच का अंतराल
सरकार की नीतियों और निर्णयों की वजह से शहरों और गाँवों के बीच की खाई कम हो रही है। पहली बार ऐसा हुआ है जब गाँव में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या, शहर में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों से 10% ज्यादा हो गई है। देशहित में किए गए ऐतिहासिक कार्यों और निर्णयों की सूची बहुत लंबी है। इस पत्र में सभी को विस्तार से बता पाना संभव नहीं।
लेकिन, मैं इतना अवश्य कहूँगा कि एक साल के कार्यकाल के प्रत्येक दिन चौबीसों घंटे पूरी सजगता से काम हुआ है, संवेदनशीलता से काम हुआ है, निर्णय लिए गए हैं। देशवासियों की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति करते हुए हम तेज गति से आगे बढ़ ही रहे थे, कि कोरोना ने भारत को भी घेर लिया।
एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी
आज सभी देशवासियों ने ये सिद्ध करके दिखाया है कि विश्व के सामर्थ्यवान और संपन्न देशों की तुलना में भी भारतवासियों का सामूहिक सामर्थ्य और क्षमता अभूतपूर्व है। ताली-थाली बजाने और दीया जलाने से लेकर भारत की सेनाओं द्वारा कोरोना वॉरियर्स का सम्मान हो, जनता कर्फ्यू या लॉकडाउन के दौरान नियमों का निष्ठा से पालन हो, हर अवसर पर आपने ये दिखाया है कि एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी है।
निश्चित तौर पर, इतने बड़े संकट में कोई ये दावा नहीं कर सकता कि किसी को कोई तकलीफ और असुविधा न हुई हो। हमारे श्रमिक साथी, प्रवासी मजदूर भाई-बहन, छोटे-छोटे उद्योगों में काम करने वाले कारीगर, पटरी पर सामान बेचने वाले, रेहड़ी-ठेला लगाने वाले, हमारे दुकानदार भाई-बहन, लघु उद्यमी, ऐसे साथियों ने असीमित कष्ट सहा है।
इनकी परेशानियाँ दूर करने के लिए सभी मिलकर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन हमें ये भी ध्यान रखना है कि जीवन में हो रही असुविधा, जीवन पर आफत में न बदल जाए। इसके लिए प्रत्येक भारतीय के लिए प्रत्येक दिशा-निर्देश का पालन करना बहुत आवश्यक है। जैसे अभी तक हमने धैर्य और जीवटता को बनाए रखा है, वैसे ही उसे आगे भी बनाए रखना है।
ये लड़ाई लंबी है लेकिन हम विजय पथ पर चल पड़े हैं और विजयी होना हम सबका सामूहिक संकल्प है। अभी पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आए अम्फान चक्रवात के दौरान जिस हौसले के साथ वहाँ के लोगों ने स्थितियों का मुकाबला किया, चक्रवात से होने वाले नुकसान को कम किया, वह भी हम सभी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
इन परिस्थितियों में, आज यह चर्चा भी बहुत व्यापक है कि भारत समेत तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएं कैसे उबरेंगी? लेकिन दूसरी ओर ये विश्वास भी है कि जैसे भारत ने अपनी एकजुटता से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी दुनिया को अचंभित किया है, वैसे ही आर्थिक क्षेत्र में भी हम नई मिसाल कायम करेंगे। 130 करोड़ भारतीय, अपने सामर्थ्य से आर्थिक क्षेत्र में भी विश्व को चकित ही नहीं बल्कि प्रेरित भी कर सकते हैं।
आत्मनिर्भर भारत : भारत को अपने पैरों पर खड़ा होना है
आज समय की माँग है कि हमें अपने पैरों पर खड़ा होना ही होगा। अपने बलबूते पर चलना ही होगा और इसके लिए एक ही मार्ग है – आत्मनिर्भर भारत। अभी हाल में आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए दिया गया 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज, इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।
यह अभियान, हर एक देशवासी के लिए, हमारे किसान, हमारे श्रमिक, हमारे लघु उद्यमी, हमारे स्टार्ट अप्स से जुड़े नौजवान, सभी के लिए, नए अवसरों का दौर लेकर आएगा। भारतीयों के पसीने से, परिश्रम से और उनकी प्रतिभा से बने लोकल उत्पादों के दम पर भारत आयात पर अपनी निर्भरता कम करेगा और आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ेगा।
अभी बहुत कुछ करना बाकी है : मुझमे कमी हो सकती है, देश में नहीं
बीते छह वर्षों की इस यात्रा में आपने निरंतर मुझ पर आशीर्वाद बनाए रखा है, अपना प्रेम बढ़ाया है। आपके आशीर्वाद की शक्ति से ही, देश पिछले एक साल में ऐतिहासिक निर्णयों और विकास की अभूतपूर्व गति के साथ आगे बढ़ा है। लेकिन फिर भी मुझे पता है कि अब भी बहुत कुछ करना बाकी है।
देश के सामने चुनौतियाँ अनेक हैं, समस्याएँ अनेक हैं। मैं दिन-रात प्रयास कर रहा हूँ। मुझ में कमी हो सकती है लेकिन देश में कोई कमी नहीं है। और इसलिए, मेरा विश्वास स्वयं से ज्यादा आप पर है, आपकी शक्ति, आपके सामर्थ्य पर है।
कोई आपदा भारत का भविष्य तय नहीं कर सकती
मेरे संकल्प की ऊर्जा आप ही हैं, आपका समर्थन, आपका आशीर्वाद, आपका स्नेह ही है। वैश्विक महामारी के कारण, यह संकट की घड़ी तो है ही, लेकिन हम देशवासियों के लिए यह संकल्प की घड़ी भी है। हमें यह हमेशा याद रखना है कि 130 करोड़ भारतीयों का वर्तमान और भविष्य कोई आपदा या कोई विपत्ति तय नहीं कर सकती।
हम अपना वर्तमान भी खुद तय करेंगे और अपना भविष्य भी। हम आगे बढ़ेंगे, हम प्रगति पथ पर दौड़ेंगे, हम विजयी होंगे। देश की निरंतर सफलता की इसी कामना के साथ मैं आपको पुन: नमन करता हूँ। आपको और आपके परिवार को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
स्वस्थ रहिए, सुरक्षित रहिए !!!
जागृत रहिए, जागरूक रखिए !!!
आपका प्रधान सेवक
नरेन्द्र मोदी
अपने इस पत्र के माध्यम से जहां प्रधानमंत्री जनता से सीधा संवाद स्थापित करने और उनके दिलों में उतरने में सफल हुए हैं , वहीं विपक्ष के नेताओं को एक बार फिर अपनी कार्यशैली से सन्न करने में भी सफल हो गए हैं। विशेष रूप से तब जबकि विपक्ष के अधिकांश नेता कोरोना संकट को भी अपने लिए वोट बनाने का एक सही अवसर समझने समझते हुए अपनी ओछी राजनीति कर रहे हैं और देश के लोगों को भड़का कर देश में कोरोना संकट पर मोदी सरकार को असफल करने की कोशिशों में लगे हैं । श्री मोदी ने बिना कुछ कहे ही लोगों को समझा दिया है कि देश के विपक्ष के नेता जिस प्रकार चीन की भाषा बोल रहे हैं या पाकिस्तान का कहीं समर्थन करते हुए दिखाई दे रहे हैं या देश के भीतर कोरोना बीमारी को फैलाकर सरकार को असफल करने की कोशिश में लगे हैं , ,जनता उससे सावधान रहे और मर्यादित व अनुशासित होकर इस संकट से सामूहिक शक्ति के माध्यम से निपटने मैं सरकार का सहयोग करें।
डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

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