नाग कुल के राजा - शेषावतारी गींह नाग सरही



नाग कुल के राजा - शेषावतारी गींह नाग सरही

डिम्पल कुमार राठौर 

हिमाचल प्रदेश जिला मण्डी करसोग पांगणा सरही के चमत्कारिक नाग देवता कालांतर में परम प्रभावशाली देवताओं में वैकुंठ धाम में भगवान विष्णुप्रिय शेषावतारी श्रीमूल गींह नाग सरही का गेंहू में प्रादुर्भाव मूल मेहरा । सहस्त्र फनाधारी शेष सरहे झाखडीये कला गींह नाग के मस्तक पर जो यह अद्भुत नागमुकुट है यह भगवान शिव ने शेष नाग को प्रदान किया था। यह यह दिव्य व अलौकिक मेहरा  है जिसमें गींह नाग सरही को एक राजा के रूप में दर्शाया गया है।क्योंकि भगवान शिव ने शेष नाग को नाग कुल का राजा नियुक्त किया है तभी गींह नाग को राजा राजेश्वर कहा जाता है। 

 शेषनाग के बारे में कहा जाता है कि इन्हीं के फन पर धरती टिकी हुई है। धरती टिकी हुई होने का मतलब संपूर्ण धरती नहीं। दरअसल समुद्र के अंदर से प्रकट हुई एक महाद्वीप वाली धरती पूर्वाकाल में शेषनाग की तरह ही थी। दूसरी ओर नाग मूलत: पाताल लोक में ही रहते हैं। चित्रों में अक्सर हिंदू देवता भगवान विष्णु को शेषनाग पर लेटे हुए चित्रित किया गया है। दरअसल, शेषनाग भगवान विष्णु के सेवक हैं। मान्यता है कि शेषनाग के हजार मस्तक हैं। इनका कही अंत नहीं है इसीलिए इन्हें 'अनंत' भी कहा गया है।

 शेष को ही अनंत कहा जाता है जो कश्यप ऋषि की पत्नीं कद्रू के बेटों में सबसे पराक्रमी और प्रथम नागराज थे। ऋषि कश्यप की पत्नीं कद्रू के हजारों पुत्रों में सबसे बड़े और सबसे पराक्रमी शेष नाग ही थे। नाग देवता के दिव्य छायाचित्र को अपने सभी मित्रों के साथ साझा करके उन्हें भी दर्शन करवाकर धन्य करें।


डिम्पल कुमार राठौर (संस्कृति संरक्षक)
करसोग मण्डी
हिमाचल प्रदेश

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