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भाभी जी, मेटाबॉलिज़्म और पानीपुरी (व्यंग्य)



 भाभी जीमेटाबॉलिज़्म और पानीपुरी

अरुण अर्णव खरे

हमारी एक भाभी जी हैं फिट रहना, शॉपिंग करना और पानीपुरी का सेवन उनके प्रिय शौक हैं | ये भाभी जी भी 'भाभी जी घर पर हैं' या 'भाभी जी छत पर हैं' की भाभी जी से जरा भी अलग नहीं हैं | अतएव उनके बारे में भी लोग उक्त दोनों भाभियों की तर्ज पर यह कहते पाए जाते हैं कि भाभी जी बाजार में हैं | चूँकि भाभी जी अपनी सेहत और फिगर को लेकर बहुत फिक्रमंद हैं सो अपने को फिट रखने के लिए वह बहुत प्रयत्नशील रहती हैं | पचास की उम्र में भी नवयौवना लगती हैं | इसके पीछे के कारण बड़े दिलचस्प हैं | किसी टीवी सेहत-गुरु से उनको ज्ञान मिला था कि जिसका मेटाबॉलिज्म जितना अच्छा होगा, वह उतना ही ऊर्जावान और एक्टिव रहेगा | इसी के तुरंत बाद आने वाले एक और कार्यक्रम में किसी पाक-गुरु ने बताया कि पानीपुरी एक ऐसी डिश है जो न सिर्फ मुँह के टेस्ट को बदलने के लिए बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है। तभी से दोनों ही बातें भाभी जी ने स्थाई भाव से अपना लीं |

पानीपुरी भाभी जी को बचपन से पसंद थी लेकिन वह इसे स्वास्थ्य की नहीं स्वाद की डिश समझने के कारण अधिक सेवन करने से सकुचाती थीं | जब भी वह शादी समारोहों, किटी और जन्मदिन की पार्टियों में पानीपुरी की टेबल के इर्दगिर्द महिलाओं को हाथों में दोने पकड़े बेसब्री से 'भैया इधर भी', 'भैया इधर भी' कहते देखतीं तो उनके मन में विचार आता कि आखिर पानीपुरी में ऐसा क्या है जो यह महिलाओं की इतनी पसंदीदा डिश है | यह तो उन्हें बाद में पता चला कि पानीपुरी मेटाबॉलिज़्म के लिए एक कारगर डिश है | पुरी के साथ मिलने वाला इमली का पानी न केवल ओवर-ईटिंग से बचाता है अपितु शरीर में वसा को कम करने वाले इन्जाइम को भी बढ़ाता है। फिर क्या था पानी पुरी भाभी जी की पसंदीदा डिश बन गई |

पहले भाभी जी स्वयं को फिट रखने के लिए हर दिन तीन किलोमीटर पैदल चलती थीं लेकिन मेटाबॉलिज़्म और पानीपुरी के चक्कर में भाभी जी को शॉपिंग का नया शौक लग गया | पति की जेब का भी ध्यान रखना था सो भाभी जी बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से शॉपिंग करतीं | उनकी कोई भी शॉपिंग तीन राउण्ड से कम में पूरी नहीं होती | मान लो उन्हें चुन्नी खरीदनी है तो पहली बार में वह उस दूकान को फायनल करके आतीं जहाँ से उन्हें चुन्नी खरीदनी है | दूसरे राउण्ड में वह उस दूकान से चुन्नी खरीद के लातीं और फिर तीसरे राउण्ड में उसे यह कहते हुए वापस करके आतीं कि हमार सोनार हस्बैण्ड को इसका कलर नहीं जमा | दरअसल चुन्नी खरीदना तो एक बहाना है असली मकसद तो राजस्थानी चाट भण्डार की लजीज पानीपुरी खाना और अपना मेटाबॉलिज़्म बढ़ाना है | बाजार तक आने-जाने में तीन किलोमीटर से भी ज्यादा चलना-फिरना हो ही जाता है | रोज-रोज की शॉपिंग से पतिदेव नाराज न हों सो लौटते समय वह अपने सोनार हस्बैण्ड के लिए गोल-गोल कड़क पूरियों के दो-तीन पैकेट भी ले आती जिनका उपयोग वह सप्ताहांत की बैठकों में अपने दोस्तों के साथ आलू-मटर के स्थान पर चिवड़ा और इमली के पानी की जगह बैगपाइपर भरकर सेवन करने में करते और पत्नी की बुद्धिमत्ता की दाद देते |

अरुण अर्णव खरे
भोपाल (म०प्र०)



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