स्वदेशी जागरण मंच ने की 'स्वदेशी स्वावलंबन अभियान' की घोषणा




स्वदेशी जागरण मंच ने की 'स्वदेशी स्वावलंबन अभियान' की घोषणा

स्वदेशी और  आत्मनिर्भरता हेतु जागृति और प्रतिबद्धता के लिए स्वदेशी जागरण मंच ने  'स्वदेशी स्वावलंबन अभियान'  की घोषणा कर दी है । भारत के लिए आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल 'स्वदेशी' ही है।  स्वदेशी उद्योग का कायाकल्प करके स्वावलंबन को प्राप्त किया जा सकता है, जिसमें लघु उद्योग, लघु व्यवसाय, कारीगर, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और अन्य गैर-कृषि गतिविधियाँ शामिल हैं।

 यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नीति निर्माताओं ने कभी भी स्वदेशी प्रतिभा, संसाधनों और ज्ञान पर भरोसा नहीं किया और इसलिए सार्वजनिक क्षेत्र और बाद में विदेशी पूंजी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर जोर दिया।  पीएम मोदी का हाल ही में दिया गया वक्तव्य कि हमें स्थानीयकरण के लिए मुखर होना होगा, वैश्वीकरण और उदारीकरण, विशेष रूप से विदेशी पूंजी पर निर्भर विकास की मौजूदा नीति के मॉडल में बदलाव की ओर इंगित करता है।

 यह उन स्थानीय उद्योगों को पुनर्जीवित करने का समय है जो वैश्वीकरण के युग में नष्ट हो गए थे।  यह उन आर्थिक नीतियों की शुरुआत करने का भी समय है जो  मानव कल्याण, स्थायी आय, रोजगार सृजन में मदद करती हैं और सभी लोगों में विश्वास पैदा करती हैं।

स्वदेशी जागरण मंच स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास करेगा। नई प्रौद्योगिकियों के विकास  के लिए  कार्य किया जाएगा।   

देश में 700 से अधिक एमएसएमई क्लस्टर हैं।  इन समूहों का औद्योगिक विकास का एक लंबा और समृद्ध इतिहास रहा है।  चीन से अनुचित प्रतिस्पर्धा और अनुचित आयात नीतियों के कारण इनमें से कई औद्योगिक समूहों को भारी नुकसान हुआ।  उन्हें हर तरह से समर्थन और मजबूत किया जाना चाहिए ताकि वे न केवल रोजगार के अवसर पैदा करें बल्कि सबसे किफायती लागत में उच्च गुणवत्ता गवाले उत्पादों का भी उत्पादन कर सकें।

 विनिर्माण क्षेत्र में भविष्य में ग्रोथ की शुरुआत के लिए पूरे देश में जिला स्तर पर ऐसे औद्योगिक समूहों की पहचान की जाएगी। ग्रामीण शिल्प और कृषि आधारित उत्पाद भी भारत को स्वावलम्बी देश बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।  कृषि आधारित गतिविधियों के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में असीमित अवसर उपलब्ध हैं, जिनमें खाद्य प्रसंस्करण, मुर्गी पालन, डेयरी, मछली पकड़ने, मशरूम की खेती, बांस की खेती, फूलों की खेती, बागवानी और अन्य शामिल हैं। एकीकृत ग्रामीण विकास आज के समय की जरूरत है।

 इस ‘स्वदेशी स्वावलंबन अभियान’ के तहत एक व्यापक योजना तैयार की जा रही है जिसमें श्रमिकों, किसानों, छोटे पैमाने पर उद्यमियों, एकेडमिशियन, टेक्नोक्रेट, उद्योग और व्यापार जगत के प्रतिनिधियों सहित सभी लोगों को शामिल किया जाएगा। विभिन्न संगठनों और एसोसिएशनों के सहयोग से, हम लोगों तक पहुंच बनाएंगे । लोगों को स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने हेतु स्वदेशी उत्पादों की सूची वितरित करते हुए स्वदेशी के लाभों के बारे में जागरूक किया जायेगा।
यह स्थानीय, लघु स्तर के निर्माताओं, कारीगरों और छोटे व्यवसायों के  उत्थान का भी समय है।  इस उद्देश्य के लिए उद्योग, व्यापार के  प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए जिला स्तरीय समितियों का गठन किया जाएगा।

 स्वदेशी जागरण मंच पहले ही उद्योगों की  समस्याओं की पहचान करने के लिए कई क्लस्टर अध्ययन कर चुका है।  कई मामलों में स्वदेशी जागरण मंच का हस्तक्षेप महत्वपूर्ण महत्व साबित हुआ है।  इस तरह के अध्ययनों को घरेलू उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए एक मिशन मोड में कार्य किया जाएगा।

 ग्रामीण क्षेत्रों के सफल प्रयोगों को ग्रामीण लोगों के बीच प्रचारित किया जाएगा ताकि वे खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित अन्य गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित हो सकें।

स्वदेशी जागरण मंच  सभी देशभक्त नागरिकों का आह्वान करता हैं कि वे पूरे जोश के साथ इस अखिल भारतीय स्तर पर ‘स्वदेशी स्वावलंबन अभियान’ में शामिल हों और मानवीय मूल्यों पर आधारित स्थानीय प्रतिभा, संसाधनों, ज्ञान, उद्यमशीलता के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था का कायाकल्प करने के महान उद्देश्य के साथ इस अभियान को बड़ी सफलता देंऔर स्वदेशी, आत्मनिर्भरता, विकेंद्रीकरण और पर्यावरण का संरक्षण एवं संवर्द्धन सुनिश्चित करते हुए, भारतीय विकास मॉडल के सिद्धांतों के आधार पर विकास में योगदान करें ताकि ‘स्वावलंबन ’के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

स्वदेशी जागरण मंच सरकार से भी आह्वान करता हैं  कि उपयुक्त आयात शुल्क संरचना द्वारा अनैतिक डंपिंग से घरेलू उद्योग का संरक्षण करे। 



डॉ. अश्विनी महाजन 
राष्ट्रीय सह-संयोजक

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