आधुनिक मुखौटा



आधुनिक मुखौटा

राजीव डोगरा 'विमल'

कुछ यूं बदला वक्त की
सब कुछ बदलता चला गया।
जमी ये आसमा और
आसमा से जमी सब
कुछ यूं ही बदलकर
बिखरता सा गया।
इस बदलते हुए वक़्त में
मैंने सोचा
शायद कोई तो मेरा होगा,
मगर आधुनिकता के नाम पर
मुखौटा पहने हुए लोगों ने
समझा दिया की,
कोई अपना नहीं होता
यहां पर
सिवाय जरूरत के।


राजीव डोगरा 'विमल'
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(भाषा अध्यापक)
गवर्नमेंट हाई स्कूल,ठाकुरद्वारा।
Rajivdogra1@gmail.com
9876777233
7009313259

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