हे! ईश्वर - राजीव डोगरा 'विमल'



राजीव डोगरा 'विमल'

हे! ईश्वर
मैं कुछ खास नहीं
फिर भी
गुफ्तगू करता हूं तुमसे
दुनिया का हाल छोड़कर।
लोग पूछते हैं मुझसे
क्यों गुमसुम से रहते हो ?
क्या कोई दर्द मिला है ?
किसी अनजान शख्स से ?
अब क्या कहूं मैं
और कैसे कहूं
तेरी प्रेम अनुभूति
किसी से बोलने ही नहीं देती।
लोग पूछते हैं
क्यों तुम अजनबीयों की तरह
इधर-उधर घूमतें हो
अपनी फकीरी लिए।
मगर मैं कैसे कहूं
तुम्हारे सिवा मुझे
अब कोई
अपना लगता ही नहीं।

राजीव डोगरा 'विमल'
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(भाषा अध्यापक)
गवर्नमेंट हाई स्कूल,ठाकुरद्वारा।
पिन कोड 176029
Rajivdogra1@gmail.com
9876777233
7009313259

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