महाराणा प्रताप भारत के पौरुष का प्रतीक हैं , जिस पर हमें नाज है : गजेंद्र सिंह शेखावत



1857 के महान क्रांतिकारी कोतवाल धनसिंह शोध संस्थान द्वारा महाराणा प्रताप जयंती पर आयोजित की गई वेबीनार : 

महाराणा प्रताप भारत के पौरुष का प्रतीक हैं , जिस पर हमें नाज है : गजेंद्र सिंह शेखावत

मेरठ । (अजय आर्य ) 1857 के महान क्रांतिकारी कोतवाल धनसिंह शोध संस्थान के द्वारा इतिहास के महानायक महाराणा प्रताप की जयंती के उपलक्ष्य में आज एक वैबीनार का आयोजन किया गया ।  जिसमें श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ( केंद्रीय मंत्री भारत सरकार ) ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप महाराणा भी हैं और प्रताप भी हैं । उन्हीं के प्रताप से हम आज आजादी की खुली हवा में सांस ले रहे हैं । उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप भारत के पौरुष का प्रतीक हैं , जिस पर आने वाली पीढ़ियां नाज करती रहेंगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री विजयपाल सिंह तोमर (सांसद राज्यसभा ) द्वारा की गई । श्री तोमर ने कहा कि महाराणा प्रताप की महानता हम सब के लिए गौरव का विषय है । जिन्होंने अब से सदियों पूर्व तत्कालीन मुगल सत्ता को चुनौती देते हुए भारत की संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष किया और हमें एक ऐसी आदर्श प्रेरणा देकर गए कि जिसको अपनाकर भारत ने कभी भी विदेशी सत्ता को स्वीकार नहीं किया । उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का तेज इस देश के युवाओं को सदैव प्रेरित करता रहा । उसी का परिणाम यह रहा कि देश क्रांतिकारी आंदोलन की ओर तेजी से बढ़ता चला गया और यह सच है कि महाराणा प्रताप के विचारों से प्रेरित क्रांतिकारियों ने ही इस देश को आजाद कराया। इसलिए महाराणा प्रताप की महानता को हमें अपने लिए गौरव का विषय मानना ही चाहिए । श्री तोमर ने कहा कि महाराणा प्रताप एक ऐसा जीवंत इतिहास है जो देश की युवा पीढ़ी को लम्बे समय तक प्रेरित करता रहेगा ।

श्री महेंद्र सिंह( मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार ) ने कहा कि महाराणा प्रताप एक पूरी संघर्ष गाथा का नाम है । जिसने आजीवन स्वतंत्रता के लिए कष्ट उठाए परंतु कभी भी विदेशी सत्ता के सामने शीश झुकाना उचित नहीं माना । वास्तव में यह भारत के मौलिक संस्कार का प्रतिनिधित्व करने वाले महान आत्मा थी।  स्वागत शब्दों द्वारा शोध संस्थान का उद्देश्य और वेबीनार का संक्षिप्त परिचय शोध संस्थान के चेयरमैन तस्वीर सिंह चपराणा द्वारा प्रस्तुत किया गया । उन्होंने कहा कि शोध संस्थान देश के सभी क्रांतिकारियों और शहीदों सहित क्षत्रिय वंश के महान योद्धाओं को इस देश के लिए आदर्श और प्रेरणा का स्रोत मानता है। जिन्होंने अपने-अपने काल में अपने बलिदान दे - देकर भारत माता के सम्मान की रक्षा की । इसलिए ऐसे आयोजन करते रहना शोध संस्थान अपना परम कर्तव्य मानता है ।

कार्यक्रम के विषय में विशेष जानकारी विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ राकेश कुमार आर्य ( पत्रकार एवं इतिहासकार ) द्वारा प्रदान की गई । डॉ आर्य ने महाराणा प्रताप के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1576 के युद्ध के पश्चात महाराणा प्रताप ने निरंतर अकबर को 10 साल तक चित्तौड़ में ही फंसाए रखा था और हर वर्ष के युद्ध में मुगल शासक को करारी पराजय दी थी । उन्होंने कहा कि यदि महाराणा प्रताप उस समय 10 वर्ष तक अकबर को चित्तौड़ में न घेरे रखते तो बहुत संभव था कि दक्षिण में अकबर बहुत बड़े भूभाग को अपने नियंत्रण में लेने में सफल हो जाता । डॉ आर्य ने कहा कि महाराणा प्रताप को एक षड्यंत्र के अंतर्गत इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया जिसके वह पात्र हैं , इसलिए आज हमें महाराणा प्रताप को इतिहास में उचित स्थान देने के लिए विशेष संघर्ष करने की आवश्यकता है । 

विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ रेनू जैन (इतिहास विभागाध्यक्ष ) ने कहा कि महाराणा प्रताप के आदर्श सदैव हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे । डॉ ज्ञानतोष कुमार प्राचार्य ने कहा कि राणा प्रताप का आदर्श जीवन भारत की बलिदानी परंपरा को प्रकट करता है जिसके कारण आज हम आजाद हैं । श्री मुकेश कुमार चौधरी ने कहा कि महाराणा प्रताप से प्रेरित होकर भारत में सदियों तक विदेशी सत्ता के खिलाफ संघर्ष चलता रहा । उन्होंने कहा कि शिवाजी और उनके साथ के अन्य लोग भी महाराणा प्रताप जैसे बलिदानी और क्रांतिकारी योद्धाओं से प्रेरित थे । डॉक्टर यतेंद्र कटारिया ने कहा कि महाराणा प्रताप जो लोग अकबर की अपेक्षा महान नहीं मानते उनकी सोच विकृत है । जबकि महाराणा प्रताप भारत के धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहे । श्री सूरज पाल सिंह, डॉक्टर देवेश शर्मा डॉ अरुण पाटिल ने भी अपने विचार विशिष्ट वक्ता के रूप में व्यक्त किए । 

कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि के रुप में श्री कमल मलिक ( विधायक ) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप का ओज और तेज आज भी हमें शक्ति देता है । उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार देश में लव जिहाद या जनसंख्या बढ़ाकर देश के सत्ता प्रतिष्ठानों को कब्जा कर भारत के मूल धर्म को मिटाने का षड्यंत्र चल रहा है , उसके दृष्टिगत महाराणा प्रताप का चिंतन और उनकी कार्यशैली आज भी हमारे लिए प्रासंगिक है।  डी.पी. वत्स ( सांसद राज्यसभा एवं रिटायर्ड मेजर जनरल ) ने कहा कि जो देश अपने बलिदानों से शिक्षा लेकर आगे बढ़ने का संकल्प लेता है वही संसार में सम्मान के साथ खड़ा होकर चल सकता है। यह हमारे लिए गौरव की बात है कि हमारे पास महाराणा प्रताप जैसे भी चौथा हैं जिन से न केवल भारत बल्कि दुनिया के लोग भी प्रेरणा लेते हैं।

इस अवसर पर डॉ आराधना (विभागाध्यक्ष मेरठ यूनिवर्सिटी ) ने कहा कि महाराणा प्रताप एक जीवंत इतिहास का नाम है , जिसे आज के समय में बहुत गहराई से समझने की आवश्यकता है । जबकि पूर्व आईएएस रही डॉ अलका टंडन ने कहा कि महाराणा प्रताप हमारी आन बान शान के प्रतीक हैं । जिन पर हम सब को गर्व और गौरवबोध होता है। जबकि सुरजीतसिंह ( पूर्व ब्लाक प्रमुख ) द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन पूर्व की भांति डॉक्टर नवीन गुप्ता द्वारा किया गया।

शोध संस्थान के जिन सदस्यों एवं पदाधिकारियों ने कार्यक्रम में विशेष रुप से अपनी भूमिका निभाई उनमें इंजीनियर सुरेंद्र वर्मा , श्री भोपाल सिंह गुर्जर , कैप्टन सुभाष , ब्रजपालसिंह चौहान , जबर सिंह चेयरमैन , गुलवीर पार्षद , एडवोकेट सुरेंद्र नागर , मनोज धामा , ब्रह्मसिंह निडावली , अजय सिंह , विरेंद्र सिंह , सरदार कर्मेंद्र सिंह, डॉक्टर रेणु जैन , डॉक्टर ज्ञानतोष कुमार झा , डॉक्टर राकेश राणा , मुकेश चौधरी , डॉक्टर यतेंद्र कटारिया , डॉक्टर अरुण पाटिल , देवेश चंद्र शर्मा ,डॉक्टर हरेंद्र , डॉक्टर धनपाल , डॉ अशोक , सुभाष गुर्जर , नवीन सिरोही , श्री संजीव नागर, श्रीमती सुगम धामा , डॉ प्रशांत कुमार , सुनील पोसवाल के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं ।


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