बगलामुखी जन्मोत्सव पर विशेष

बगलामुखी माता दशमहाविद्याओं के अंतर्गत आठवीं महाविद्या है

राज शर्मा (संस्कृति संरक्षक)

आदि शक्ति माता जगदम्बा की अनंतानंत माया से परिपूर्ण अनेकों विभूतियां सृष्टि में हर युग मे अवतरित हुई । माता के सभी स्वरूप दुष्टों के नाश हेतु और भक्तों को दुःख एवं कष्टों से निवारणार्थ के लिए जगत्प्रसिद्ध है । इन सभी स्वरूपों में माता के कुछ बहुत ही भयावह  रूप भी देखने को मिलते हैं ।

दशमहाविद्या के अंतर्गत माता बगलामुखी जो शत्रुओं पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने में सक्षम है ये पीताम्बरा के नाम से भी विभूषित है । 

काली तारा महाविद्या षोडसी भुवनेश्वरी।
बाग्ला छिन्नमस्ता च विद्या धूमावती तथा।।
मातंगी त्रिपुरा चैव विद्या च कमलात्मिका।
एता दश महाविद्या सिद्धिदा प्रकीर्तिता।।

देवी का प्राकट्य रात्रि काल मे होने से समस्त प्रकार की तामसिक एवं नकारात्मक शक्तियों पर प्रतिबंध का भी सूचक है । एक समय समस्त ब्रह्मांड में भयानक झंझावात की स्थिति उत्पन्न हुई । जिस कारण सारे जग में हाहाकार मच । इस भयानक झंझावात ने सारे जग को बहुत क्षति पहुंचाई  । देवगण व समस्त ऋषि मुनि भी चिंतित हो गए। समस्त देवतागण बैकुंठ में भगवान नारायण से प्रार्थना करने चल दिए। परन्तु भगवान नारायण इस समस्या पर खरे नही उतर सके भगवान नारायण ने आदिदेव शिव को स्मरण किया और भगवान आदिदेव शिव ने नारायण से कहा कि समस्त चराचर सृष्टि देवी के अधीन है अतः इसका निवारण जगदम्बा के अतिरिक्त कोई नहीं कर सकता। 

भगवान नारायण ने हरिद्रा सरोवर के तट पर घोर आराधना प्रारम्भ की । जिसके फलस्वरूप काफी समय पश्चात माता त्रिपुरसुन्दरी ने दर्शन दिए । माता से मनोवांछित वर पाने के कारण माता ने स्वयं कुछ समय पश्चात बगलामुखी रूप धारण करके जगत को संकट मुक्त किया था । जिस समय माता प्रकट हुई वह वैशाख शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि का समय था । तभी से माता बगलामुखी का जन्मोत्सव इसी तिथि को देश के विभिन्न शक्तिपीठ एवं तन्त्रपीठों में मनाया जाता है 

बगलामुखी माता दशमहाविद्याओं के अंतर्गत आठवीं महाविद्या है

हरिद्रा नीर से इनका प्राकट्य होने के कारण ये पीताम्बरा भी कहलाई। इनकी उपासना पूजन भक्ति से मुकदमे में विजय , समस्त शत्रुओं से विजय दिलाने में इन जैसा कोई दूसरा नहीं है  । माता को पिला रंग बहुत ही प्रिय लगता है । बगला शब्द संस्कृत भाषा के वल्गा शब्द का अपभ्रंश रुप है । इस शब्द का अर्थ श्रृंगार युक्त दुल्हन होता है। माता के अलौकिक सौंदर्य व श्रृंगार सौंदर्य को बगलामुखी नाम सार्थक करता है । रत्न जड़ित स्वर्णासन पर आसीन माता बगलामुखी सभी के मनोरथ पूर्ण करें ।


राज शर्मा (संस्कृति संरक्षक)
आनी कुल्लू हिमाचल प्रदेश

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