खुशनुमा है घर वापसी का समय


खुशनुमा है घर वापसी का समय
लिमटी खरे
कोरोना कोविड 19 के संभावित संक्रमण को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा टोटल लॉक डाऊन की घोषणा 25 मार्च को की गई थी। इस दौरान अपने घरों से दूर रहकर आजीविका कमाने वाले लोग वहीं फंस गए थे, जहां वे थे। इसके बाद मजदूर दिवस पर पहली श्रमिक स्पेशल रेलगाड़ी चली। लगभग 40 दिनों के टोटल लॉक डाउन के बाद पहली रेलगाडी तेलंगाना के लिंगमपल्ली से झारखण्ड के हटिया के लिए रवाना हुई। यह अवसर बहुत ही महत्वपूर्ण था, इसे देश के लिए खुशखबरी से कम नहीं माना जा सकता है।
इसके बाद केरल से उड़ीसा, महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए रेलगाड़ियों के चलने का सिलसिला आरंभ हो जाएगा। यही नहीं अन्य प्रदेशों के जो मजदूर कहीं फंसे हैं उन्हें भी उनके घरों तक पहुंचाने के लिए प्रबंध आरंभ हो जाएंगे। इस काम के लिए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित अनेक सूबों के निजामों के द्वारा लगातार ही मांग की जाती रही है।
रेलगाड़ियों को आरंभ करने पर केंद्र सरकार और रेल्वे मंत्रालय के द्वारा बहुत ही ज्यादा सावधानियां और एहतियात बरता जा रहा है। इसमें खास बात यह है कि इस तरह की रेलगाड़ियां ओरीजन टू डेस्टिनेशन अर्थात जहां से आरंभ होंगी वहां से सिर्फ गंतव्य पर जाकर ही रूकेंगी। इन विशेष रेलगाड़ियों में एक बोगी में 72 के  बजाए लगभग डेढ़ मीटर की दूरी बनाते हुए महज 54 यात्री ही बिठाए जाने की बात कही जा रही है।
इस तरह की खबरें राहत भरी तो मानी जा सकती हैं, पर जिन राज्यों की मांग पर उनके मजदूर या निवासियों को उन राज्यों तक भेजने की व्यवस्था की जा रही है उन राज्यों की जवाबदेही अब बढ़ गई है। इन राज्यों को बाहर से आने वाले मजदूरों को कोरंटाईन करने और उनके चिकित्सकीय परीक्षण की मुकम्मल व्यवस्थाएं करने की महती जरूरत महसूस हो रही है।
एक आंकलन के अनुसार बिहार और उत्तर प्रदेश में लगभग 45 लाख लोग वापस लौटेंगे। इस तादाद में लोग अगर वापस आते हैं तो उनके लिए कोरंटाईन और चिकित्सकीय व्यवस्थाएं बनाना इन राज्यों के लिए चुनौति से कम नहीं होगा। इसके लिए इन राज्यों जहां मजदूर लौट रहे हैं अपने संसाधन बढ़ाने पर जोर देना होगा।
चूंकि केंद्र सरकार के द्वारा मजदूरों की घर वापसी के मार्ग प्रशस्त किए हैं, इसलिए केंद्र सरकार की भी यह जवाबदेही बनती है कि उसके द्वारा भी उन राज्यों जहां ये लोग जा रहे हैं, की भरपूर मदद की जाए। इसके लिए राग द्वेष, सियासी नफा नुकसान को तजने की आवश्यकता होगी। जो राज्य सक्षम नहीं हैं, उन राज्यों को इस तरह का जोखिम फिलहाल तो कतई नहीं उठाया जाना चाहिए।
इसके साथ ही यहां वहां अटके पर्यटक, तीर्थयात्री, विद्यार्थी, मजदूर आदि भी वापस लौटने लगे हैं, इसलिए केंद्र और सूबाई सरकारों विशेषकर रेल्वे को अपनी नीति पूरी तरह स्पष्ट करना चाहिए कि रेलगाड़ी कहां से कहां तक चलेगी और कब चलेगी ताकि आपाधापी न मच सके। इसके साथ ही तेलंगाना में मजदूरों के द्वारा विरोध करने पर रेलगाड़ी चलाए जाने का संदेश कतई नहीं जाना चाहिए नहीं तो आने वाले समय में सरकारों की दुश्वारियां बढ़ सकती हैं। साथ ही घर वापसी की नीति पूरी तरह पारदर्शी, न्यायपूर्ण और विवेकपूर्ण भी होना चाहिए। साथ ही देश के प्रत्येक नागरिक का भी यह दायित्व है कि वे अपने कर्तव्यों को निर्वहन पूरी ईमानदारी से करें और सरकार की इस अभिनव पहल की लाज भी रखें।
आप अपने घरों में रहें, घरों से बाहर न निकलें, सोशल डिस्टेंसिंग अर्थात सामाजिक दूरी को बरकरार रखें, शासन, प्रशासन के द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए घर पर ही रहें।

लिमटी खरे
(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं.)

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