दुखद हादसा - आर के रस्तोगी



आर के रस्तोगी

न रही जान न रहा जहान,
16 मजदूरों की गई थी जान ।
मजबूर मजदूर था परेशान
सरकार सुने खोल कर कान ।।

मजबूर मजदूर था परेशान,
रोटी रोजी का न था इंतजाम ।
अगर सड़कों पर वह चलता,
वह पुलिस से काफी पीटता ।।
रेल पटरी का लिया सहारा,
फिर भी मारा गया बेचारा।
बेचारा मजदूर ही परेशान,
क्यो नही करती सरकार इंतजाम।।

होती है मरने के बाद पुकार,
क्यो नही होता पहले विचार ।
अगर पहले प्रबन्ध हो जाता,
ऐसा दुखद हादसा न होता ।।
अगर देश में मजदूर न रहेगा,
फिर ये मेरा देश कैसे चलेगा ?
करो मजदूरों को पहुंचाने प्रवधान
अब तो सरकार खोले अपने कान

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम


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