तेरी बहुत याद आती है



तेरी बहुत याद आती है

कृष्ण कुमार निर्माण

प्यार भरी थपकी देना
और हौले से मुस्काकर
चिर-परिचित मुस्कान के संग
भर देता था हर दिल में ख़ुशी
जहाँ भी जाता था
पूरी दुनिया को अपना कर लेता था......
सिर्फ"अच्छा"कहकर सब कुछ अच्छा कर देता था
अनायास ही
बिना प्रयास ही
क्योंकि तेरा कर्म था
तू खुद ही खुदा था
तूने हर कदम पर निभाया
हम जैसे कृतघ्नों के साथ
आज हर पल.......
याद आती हैं तेरी बातें
वो प्यार से लबरेज मुलाकातें
तू अमन का मसीहा
प्यार का देवता
मानवता का प्रणेता
युग-युगों का अध्येता
तभी तो तेरा नाम था "हरदेव"
क्योंकि---
ह में हरि समाया था
र में राम प्रकटाया था
द में देवकीनंदन उजास था
व में वाहेगुरु का वास था
तभी तो तू सबका खास था
अपनों का भी.....
गैर का भी......
तेरी नजर में कोई गैर नहीं था
पर जो तुझे मानते थे गैर
वो भी करते थे तुझसे प्यार
क्योंकि तुझमें कसक ही
ऐसी थी.........
सच में तेरी सीरत और सूरत
बिल्कुल रब जैसी थी
तुझसे मेरी बहुत यादें जुडी हैं
एक बात कहूँ
तू अब साकार से निराकार है
ये भी तेरा आभार है
कि....
अब भी थामे हुए है तू ही
हमारा हाथ और जीवन की डोर....
सतगुरु सुदीक्षा जी के रूप में
दे रहा है हर पल साथ
सच तुझे प्यार निभाना आता था.......
हमें भी प्यार निभाना आ जाए
तेरी शिक्षाओं पर चलना आ जाए
अ "हरदेव"हम"हरदेव"नहीं बन सकते
लेकिन कम से कम
"निर्माण" तो बनना आ जाए।
तुझ जैसा खिलना आ जाए
सबसे घुलना मिलना आ जाए
भक्ति में हमें संवरना आ जाए
हर पल निखरना आ जाए
वचन मानके चलना आ जाए
अ हरदेव तू था देवों का देव
तुझे शत-शत नमन
शत शत नमन।।।।।


कृष्ण कुमार निर्माण
करनालहरियाणा

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