एक गीत की ताकत



एक गीत की ताकत

अरुण अर्णव खरे 

मुरारी जी विचित्र प्राणी हैं | उनको संगीत से कोई लगाव नहीं है | वह संगीत को हमेशा हेय दृष्टि से देखते आए हैं | शादी हुई तो पत्नी संगीत प्रेमी मिल गई | वह खुद भी अच्छा गाती और घर को संगीतमय रखने की कोशिश करती | मुरारी जी को नागवार गुजरता और वह घर के सारे खिड़की दरवाजे खोल देते ताकि संगीत की स्वर लहरियाँ घर में ज्यादा न लहराएँ और चुपचाप बाहर निकल जाएँ | पत्नी उनको कभी शृंगार तो कभी रोमांटिक गीत गाकर सुनाती पर मुरारी जी रीझने के स्थान पर खीझ उठते | वह कभी संगीत का महत्व बताती, संगीत की ताकत का अहसास कराने के लिए तानसेन और बैजू बाबरा के किस्से सुनाती कि किस तरह उनके दीपक राग गाने से दिए जल उठते थे, मेघ मल्हार राग छेड़ने से बारिश होने लगती थी और राग बहार की तान सुनकर फूल खिल जाते थे | पर मुरारी जी एकदम चिकने घड़े सिद्ध होते | उनपर पत्नी के प्रयासों का कोई फर्क नहीं पड़ता उल्टा दोनों में बहस हो जाती और दो-चार दिनों के लिए बोलचाल भी बंद हो जाती | पत्नी प्रण लेती कि एक न एक दिन उनको संगीत की ताकत का अहसास दिला कर रहेगी |

मुरारी की माँ बताती हैं कि - "मुरारी की संगीत से अरुचि जन्मजात है | जब उसका जन्म हुआ था तो बादल घनघोर रूप से गरज रहे थे और जोर की बिजली कड़कने के साथ ही इस दुनिया में उसका आगमन हुआ था | वह मुरारी को लोरी सुनातीं तो वह जोर-जोर से रोने लगता | वह दुनिया का ऐसा पहला बच्चा था जो माँ की लोरी सुनकर दहाड़ मारता था | बचपन में बार-बार टोकने पर वह कभी-कभी बाथरूम में गाने की कोशिश करता और हर बार बाथरूम में नल से पानी आना बंद हो जाता | एक बार स्कूल के म्युजिक टीचर ने उसे एक कोरस गीत में गाने का अवसर दिया था तो उसकी आवाज सुनकर साथी बच्चों ने उसका उपनाम ही कौआ रख दिया था | इसके बाद से तो मुरारी को संगीत के नाम से घोर चिढ़ सी हो गई |" 

मुरारी जी नए घर में शिफ्ट हुए तो किस्मत से उन्हें पड़ोसी भी संगीत प्रेमी मिल गए | मुरारी जी उनसे औपचारिक मुलाकात करने गए तो उन्होंने संगीत के करिश्मे पर अच्छा खासा लेक्चर दे डाला - "मन को रिफ्रेश करने के साथ ही संगीत की उपयोगिता, चिकित्सा के क्षेत्र में भी करिश्माई सिद्ध हुई है | राग शिवरंजनी का अभ्यास करने से मेरी याददास्त दुरुस्त हो गई और राग खमाज से पत्नी की एसीडिटी की समस्या जाती रही | संगीत की इस ताकत पर मेरी बात सुनकर भी विश्वास न हो रहा हो तो अमेरिकन म्युजिक थैरेपी की वेबसाइट पर जाकर देख लो |" मुरारी जी उनकी बात एक कान से सुनते रहे और दूसरे से निकालते रहे | इसके बाद उन्होंने अपने पड़ोसी से सुरक्षित दूरी बना ली |

उस दिन सुबह-सुबह पड़ोसी के घर से आवाज आ रही थी | उनकी पत्नी कह रही थी - "अजी सुनते हो -- तीन चार दिनों से ठीक से नींद नहीं आ रही है |"

"तुम राग भैरवी का अभ्यास करो -- नींद आने लगेगी"

उनका वार्तालाप सुनकर मुरारी जी ने घर की सारी खिड़कियाँ बंद कर दीं | मिसेज मुरारी ने देखा तो भुनभुनाते हुए खिड़कियाँ पुन: खोल दीं | इस पर दोनों में जोरदार बहस हो गई | तभी पड़ोसिन के गाने की मधुरिम आवाज गूँजने लगी -- "कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे, तड़पता हुआ जब कोई छोड़ दे, तब तुम मेरे पास आना प्रिय, मेरा दर खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिये, कोई जब ....

मिसेज मुरारी ने गाने के बोल सुने ही थे कि वह तेजी से उठीं और खिड़कियों को बंद करने लगीं | मुरारी जी ने  आश्चर्य से अपनी पत्नी को देखा और उठकर खिड़कियाँ खोल दीं | पत्नी ने पुन: बंद की और मुरारी जी ने बिना देर किए उन्हें दोबारा खोल दिया | संगीत का असर मुरारी जी पर दिखने लगा था | बैठे-बैठे ही वह चलने का उपक्रम करने लगे थे | पत्नी यह देखकर सोच में पड़ गई कि पड़ोसन अपनी नींद दुरुस्त करने के लिए गा रही है या उसकी नींद उड़ाने के लिए | उसे याद हो आया अपना प्रण कि एक न एक दिन मुरारी को संगीत की ताकत का अहसास कराकर रहेगी | मुरारी जी को पड़ोसन इस ताकत का अहसास कराए इससे पहले वह खिड़कियाँ बंद करते हुए गुनगुनाई - "हम तुम एक कमरे में बंद हों और चाबी खो जाए ..." मुरारी जी ने पत्नी को तिरछी नजर से देखा और चहक उठे - "तेरे नयनों की भूल-भुलैयाँ में मुरारी खो जाए" 

इसके बाद दोनों बहुत देर तक खिलखिलाते रहे |

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