अमेरिकी अर्थव्यवस्था कमजोर हुई तो टूटेगी दुनिया



अमेरिकी अर्थव्यवस्था कमजोर हुई तो टूटेगी दुनिया

ब्रजेश सैनी

अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क जो खुद की पहचान एक सुपर पॉवर के रूप में रखता है जिस पर विश्व जगत की 70 प्रतिशत दुनिया निर्भर रहती है अगर ऐसे में वही सुपर पॉवर कमजोर हो जाये तो क्या होगा आप अंदाजा भी नही लगा सकते । चीन के वुहान में जन्मा  एक खतरनाक वायरस जिसने पूरी  दुनिया को अपने शिकंजे पर जकड़ कर रखा है इससे दूसरे मुल्क क्या सुपर पॉवर खुद कोरोना के चुंगल से नही निकल पा रहा है हाल यह हो गया है कि अमेरिका के लोगों की जान के साथ साथ उसकी अर्थव्यवस्था को भी निगल रहा है और लगातार अमरीका को कमजोर करने में तुला है अमेरिका में मरने वालों की संख्या में दिन पे दिन इजाफा हो रहा है यही नही इससे संक्रमण का आंकड़ा भी अछूता नही है संक्रमित लोगों की संख्या 10 लाख के करीब पहुँच चुकी है तो वही मरने वालों की गिनती 54 हजार  का आंकड़ा पार कर गया है । 

अमेरिकी अर्थव्यवस्था के जानकारों का मानना है कि अगर आने वाले समय में अमेरिका ने कोरोना पर लगाम नही लगाया या उसका इलाज तलाशने में नाकाम साबित हुआ । तो सुपर पॉवर की अर्थव्यस्था चरमराई तो  पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था टूट जायेगी । विकासशील देशों के साथ साथ विकसित देश भी दिवालिया होने की कगार पर पहुँच   जायेंगे । आईएमएफ मतलब इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था माइनस 3 वार्षिक की रफ्तार से आगे बढ़ेगी । वैश्विक स्तर पर जीडीपी में गिरावट आएगी । कोरोना की वजह से अभी  वर्तमान में विश्व की विकास दर 2.9 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ रही थी जो अब माइनस 3 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है ।

 कोरोना ने विश्वभर में बेरोजगारी तो बढ़ाई है लेकिन अमेरिका में बेरोजगारी ने रिकार्ड तोड़ दिया जो अच्छे संकेत नही है । पिछले हप्ते बेरोजगारी में अमेरिकी लोगों ने खुद को पंजीकृत करवाया और यह आंकड़ा 5 लाख था । अमरीका के श्रम विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले इसलिए हैं क्योंकि पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने ख़ुद को बेरोज़गारी भत्तों और अन्य लाभों के लिए पंजीकृत नहीं करवाया था । इससे पहले 1982 में बड़ी संख्या में बेरोज़गारों की संख्या बढ़ी थी. मगर उस दौरान 6 लाख 95 हज़ार लोगों ने ही बेरोज़गार के तौर पर अपना पंजीकरण करवाया था ।  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने  दो हप्ते पहले कोरोना से बचाव के लिए राहत पैकेज की घोषणा की थी  ट्रम्प ने  दो ट्रिलियन के आर्थिक सहायता पैकेज पर अमरीकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट ने मुहर लगाई थी जो अमरीकी इतिहास का सबसे बड़ा राहत पैकेज है। 

अमरीका में कोरोना संकट के कारण रेस्तरां, बार, सिनेमा, होटल और जिम वगैरह बंद कर दिए गए हैं. कार कंपनियों ने उत्पादन रोक दिया है और हवाई सेवा को सीमित कर दिया गया है । जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में फर्क पड़ना शुरू हो गया था । अभी अमेरिका का विकास दर माइनस 5.9 है जो चौकने वाली बात है । इसी तरह अन्य देश भी है जैसे  जर्मनी -7 फ़्रांस 7.2  इटली -9.1  ब्राजील -5.3 साउथ अफ्रीका -5.8 की विकास दर होगी । उसकी तुलना में भारत की रफ्तार 1.9 तो वही चीन की  1.2 फीसदी होगी । सारी दुनिया में 1930 के बाद अब ऐसे आर्थिक मंदी के हालात बन गए है । विकसित देशों के ऊपर आर्थिक भार बहुत ज्यादा बढ़ गया है कर्ज और राजकोषीय घाटा कोरोना की वजह से परेशान कर सकता है ।

 वैश्विक मंदी की रडार और भी कई विकसित देश आ चुके है जानकारों की माने तो इस साल के अंत तक अगर यही हाल रहा तो अमेरिका , ब्राजील , इटली , फ़्रांस , जर्मनी जैसे बहुत देश दिवालिया होने की कगार पर आ जायेंगे । लगभग सभी देशों के ऊपर भारी कर्ज है जिसकी वजह से असर दिख सकता है । कर्ज से अमेरिका भी अछूता नही है जिससे डोनल्ड  ट्रम्प की चिंता बढ़ सकती है क्योंकि आगे चुनाव आने वाले है इस साल चार फ़रवरी को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने सम्बोधन में  कहा था । नौकरियों में इज़ाफ़ा हो रहा है ग़रीबी दूर हो रही है. अपराध दर में गिरावट आई है. लोगों में आत्मविश्वास जाग रहा और देश समृद्धि की ओर बढ़ रहा है । 

ट्र्ंप अमरीका की 21.44 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था को लेकर काफ़ी उत्साहित नज़र आ रहे थे. अगर इसे चीन की 14.4 ट्रिलियन की जीडीपी, भारत की 2.8 ट्रिलियन की जीडीपी और पाकिस्तान की 320 अरब की जीडीपी  के संदर्भ में देखें तो निश्चित तौर पर यह उत्साह बढ़ाने वाला है । अभी ज़्यादा वक़्त नहीं गुजरा था जब अमरीकी शेयर मार्केट ने नई ऊचांइयों को छुआ था. बेरोज़गारी दर 3.6 फीसदी के साथ 50 सालों के अपने न्यूनतम स्तर पर थी । अमरीका ने चीन के साथ अपने मुफ़ीद दो सौ अरब डॉलर का सौदा किया था और बौद्धिक संपदा कानून को मज़बूत किया था । व्यापार, स्कूल, खेल-कूद के आयोजन सभी कुछ बंद पड़े हुए हैं।

आर्थिक गतिविधियों पर लगाम लग गई है. स्टॉक मार्केट का बुरा हाल हो रखा है. खाली पड़ी सड़कें, मॉल, उड़ानें और ट्रेन सब ठप हैं अर्थव्यवस्था का कबाड़ा' निकल गया है या फिर  अर्थव्यवस्था धाराशायी हो गई है जैसी बातें हो रही हैं ।  एक आर्थिक जानकार का कहना है कि जो हो रहा है वैसा हमारी ज़िंदगी में कभी नहीं हुआ था. यह संकट का समय है । एक सर्वे के  मुताबिक कोरोना वायरस की वजह से अमरीका को करीब चार ट्रिलियन डॉलर का नुक़सान होने की आशंका है और बहुत सारे लोग बर्बाद होने वाले हैं।

जॉब वेबसाइट करियर बिल्डर के 2017 के सर्वे के मुताबिक़ 78 फ़ीसदी अमरीकी कामगार अपनी ज़रूरतों के लिए हर महीने मिलने वाले पे- चेक  पर निर्भर रहते हैं. हर चार में से एक कामगार हर महीने किसी भी तरह की कोई बचत नहीं करता । निश्चिततौर पर यह आंकड़े चौकानें वाले है ।  समझने वाली बात यह की दुनिया के लिए अमेरिका के अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला असर काफी भयानक हो सकता है ।


ब्रजेश सैनी
स्वतंत्र टिप्पणीकार


Post a Comment

0 Comments

टकराव की ओर बढ़ रही दो महाशक्तियां