वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून का आगामी ग्रीष्मोत्सव स्थगित



वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून का आगामी ग्रीष्मोत्सव स्थगित

 मनमोहन कुमार आर्य

वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून आर्यसमाज के प्रसिद्ध विद्वान संन्यासी महात्मा आनन्द स्वामी जी की प्रेरणा से अमृतसर के बावा गुरमुख सिंह जी द्वारा स्थापित यज्ञ, योग, साधना तथा वेदप्रचार का वैदिक धर्म का एक प्रमुख केन्द्र है। यहां वर्ष में दो बार वार्षिकोत्सव के रूप में ग्रीष्मोत्सव तथा शरदुत्सवों का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष आश्रम का पांच दिवसीय ग्रीष्मोत्सव 13 मई से 17 मई, 2020 तक आयोजित करने का निश्चय किया गया था। देश में कोरोना महामारी का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। इसके अनेक कारण हैं। कुछ लोगों के अन्धविश्वासों व मिथ्या धारणाओं के कारण इस रोग का अधिक प्रसार हुआ है जिससे देश के सभी लोगों को कष्ट पहुंचा है। हमारी व्यवस्था में रोग फैलाने वाली मानसिकता के लोगों का उपचार करने का कोई उपाय दिखाई नहीं देता। सारा देश लाकडाउन है। आशा थी कि यह लाकडाउन आगामी 14 अप्रैल, 2020 तक जारी रहेगा और उसके बाद स्थिति सामान्य हो जायेगी परन्तु दिल्ली में निजामुद्दीन स्थित मरकज के लोगों ने सारे देश की आशाओं पर पानी फेर दिया। यह लोग आज भी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं हैं। इसके पीछे देश को हानि पहुंचाने का कोई षडयन्त्र प्रतीत होता है। देश की सारी जनता मुख्यतः युवा पीढ़ी पहले से अधिक जागरुक है। वह सब समझती है। वह सावधान भी हो रही है। हम आशा करते हैं कि इस जागरुकता से भविष्य में देश को लाभ होगा। यहां हम देश के सभी डाक्टरों, नर्सों, अस्पताल के स्टाफ, पुलिस के लोगों सहित आवश्यक सेवायें देने वाले लोगों का भी धन्यवाद करते हैं। यह कार्य करते हुए मध्य प्रदेश के हमारे दो चिकित्सक शहीद भी हो चुके हैं। 

आज का समाचार है कि पंजाब व उड़ीसा में लाकडाउन की अवधि बढ़ाकर इसे अप्रैल माह के अन्त तक कर दिया गया है। उत्तराखण्ड में भी आज ऐसा ही निर्णय घोषित होने की आशा है। मई के महीने में भी स्थिति सामान्य होने की सम्भावना नहीं है। अतः वैदिक साधन आश्रम तपोवन देहरादून का आगामी ग्रीष्मोत्सव जो 13 से 17 मई, 2020 को होना था, स्थगित कर दिया गया है। ऐसा करना उचित ही था। हमने कुछ दिन पूर्व आश्रम के मंत्री श्री प्रेमप्रकाश शर्मा जी से भी फोन पर बातचीत की थी। कल हमने आश्रम के एक युवा सहयोगी श्री चन्दन सिंह जी से बात की जो आश्रम में रहते हैं और आश्रम को अपनी सेवायें देते हैं। उनसे हमने फोन पर आश्रम के समाचार जाने। आश्रम में सब प्रकार से कुशल-क्षेम है। आश्रम में एक 94 वर्षीय माता श्री नरेन्द्र बब्बर जी रहती हैं। वह महात्मा आनन्द स्वामी जी की प्रेरणा से इस आश्रम में आयी थी। पहले पति-पत्नी दोनों यहां रहकर साधना करते थे। पति का बहुत पहले देहावसान हो गया। तब से माता जी अकेली हो गई। पिछले वर्ष मई, 2019 के ग्रीष्मोत्सव में आश्रम की ओर से उनका अभिनन्दन भी किया गया था। वह दैनिक यज्ञों एवं सभी आयोजनों में उपस्थित होती रही हैं। उनका स्वास्थय भी सामान्य रहा। कुछ महीने पहिले वह आश्रम में फिसल कर गिर गई। उन्हें शायद सिर में चोट लगी थी। कुछ महीने वह यहां एक नर्सिंग होम में रहीं। कल ज्ञात हुआ कि वह आश्रम में रह रही हैं। कुछ महीनों से बेहोश हैं। उनका पुत्र व पौत्र दिल्ली से उनके पास आकर सेवा कर रहे हैं। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माता जी शीघ्र स्वस्थ हो जायें। उनके शारीरिक कष्ट दूर हो जायें। वह आश्रमवासियों तथा अपने परिवार के सदस्यों के साथ सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें, यह हमारी कामना है। 

आश्रम द्वारा आश्रम के निकट ही कक्षा आठ तक का एक जूनियर हाई स्कूल भी संचालित किया जाता है। विद्यालय स्थानीय लोगों में प्रतिष्ठित है। यहां 300 से अधिक बच्चे शिक्षारत हैं। श्रीमती उषानेगी जी स्कूल की प्रधानाचार्या हैं। वह एक योग्य एवं सेवाभारी शिक्षिका हैं। स्कूल में सहशिक्षा दी जाती है। आश्रम के ग्रीष्मोत्सव पर बच्चे नाटक, गीत, नृत्य, वाद-विवाद, व्याख्यान आदि अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं इससे उनकी अद्भुद शारीरिक एवं बौद्धिक क्षमाताओं का प्रकाश होता है। सभी अतिथि महानुभाव उनकी प्रस्तुतियों से आश्चार्यानवित होते हैं और उनकी प्रशंसा करते हैं। स्कूल के अधिकांश बच्चे निर्धन परिवारों के हैं परन्तु स्कूली शिक्षा तथा आर्यसमाज की विचारधारा को सुन व समझकर तथा गुरुजनों के उपदेशों से वह अन्य विद्यालयों से अधिक धर्म व संस्कृति को जानते हैं व उसका स्वयं पालन करने के साथ अपने परिवारों को भी कराते हैं। आजकल लाकडाउन के कारण यह स्कूल बन्द है। आश्रम की अपनी एक गोशाला भी है। आश्रम की एक अन्य इकाई 3 किमी. दूर निकटवर्ती पर्वतीय स्थान पर काफी ऊंचाई पर घने वनों के मध्य शान्त व सुनसान वातावरण में स्थित है। यहां एक बड़ी यज्ञशाला है। हाल है तथा साधकों के लिये कुटियायें बनी हुई हैं। इस स्थान पर स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती जी चतुर्वेद पारायण यज्ञ एवं शिविर आदि आयोजित करते रहते हैं। सुविधायें कम है जिनके विस्तार की आवश्यकता है। आचार्य आशीष जी ने भी पिछले एक कार्यक्रम में यहां भोजन आदि की सुविधाओं को समयानुकूल करने का सुझाव प्रस्तुत किया था। हम आशा करते हैं कि यदि आर्यजगत के लोग आश्रम की गतिविधियों में रुचि लें और सहयोग करें तो सभी कार्य होने सम्भव हैं। 

हम यह भी अनुभव कर रहें हैं कि दिन प्रतिदिन लोगों की आश्रम की गतिविधियों में सक्रियता में कुछ कमी होती जाती है। अपने लोगों में सत्य कथन करने में हम कोई बुराई नहीं समझते। हम आर्यसमाज के अनुयायी ऋषिभक्तों को वैदिक धर्म के प्रचार व प्रसार का अपना दायित्व निभाना चाहिये जिससे आर्यों की संख्या में वृद्धि हों, अधिक से अधिक लोग इस आश्रम व अन्य संस्थाओं में उपस्थित हों। ऐसा होने पर ही यह संस्थायें जीवित रह सकती हैं। यदि इस ओर पूरा आर्यजगत ध्यान नहीं देगा तो भविष्य में यह संस्थायें निष्क्रिय हो सकती हैं। इस पर किसी को कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिये। 

स्वामी चित्तेश्वरानन्द सरस्वती जी और आचार्य आशीष दर्शनाचार्य आश्रम की शोभा हैं। यह विद्वान आश्रम में चतुर्वेद पारायण यज्ञ, ध्यान व स्वाध्याय शिविर, युवा प्रशिक्षण एवं चरित्र निर्माण शिविरों सहित उपदेश व व्याख्यानों आदि के द्वारा अनेक प्रकार से अपनी सेवायें देते रहते हैं। इससे समाज लाभान्वित होता है। आर्यसमाज के अनुयायियों को अपने परिवार के सभी सदस्यों सहित इन सभी कार्यक्रमों में भाग लेना चाहिये। यह भी बता दें कि आश्रम ने एक दानी महानुभाव के दान व अन्य सहयोगियों की आर्थिक सहायता से यहां एक आधुनिक चिकित्सालय भवन बनाया है। हम आशा करते हैं कि यह भवन अपने उद्देश्य को पूरा करने में शीघ्र ही सफल होगा और इससे स्थानीय निवासी लाभान्वित होंगे। 

आश्रम के द्वारा विगत 32 वर्षों से अधिक समय से एक मासिक पत्रिका ‘पवमान’ का भी प्रकाशन किया जाता है। यह पत्रिका प्रत्येक माह निर्धारित तिथि पर प्रकाशित होती है जिसे प्रत्येक माह की 18 या 19 तारीख को सदस्यों को प्रेषित किया जाता है। श्री प्रेमप्रकाश शर्मा जी इस पत्रिका के प्रकाशन में सबसे अधिक सहयोगी भूमिका निभाते हैं। पत्रिका के सम्पादक डा. कृष्ण कान्त वैदिक शास्त्री हैं। आपका श्रम एवं कार्य भी प्रशंसनीय है। हम भी अपने एक दो लेखों के माध्यम से पत्रिका को सहयोग करते हैं। हम आश्रम सहित इसके मंत्री श्री प्रेमप्रकाश शर्मा एवं प्रधान श्री दर्शनलाल अग्निहोत्री जी के विशेषरूप से आभारी हैं। आप दोनों का स्नेह एवं आशीर्वाद हमें प्राप्त है। आश्रम के अन्य सभी लोगों का स्नेह व सम्मान भी हमें सुलभ है। हम अपने हृदय से इस आश्रम की चहुंमुखी प्रगति की कामना परमात्मा से करते हैं। 

आश्रम की सभी गतिविधियां व कार्य दानी महानुभावों के सहयोग से पूरे होते आ रहे हैं। आश्रम में एक भव्य एवं विशाल यज्ञशाला है। भव्य एवं विशाल सभागार है। कार्यालय है। लगभग 100 अतिथि कक्ष भी हैं। अनेक कर्मचारी इनका रखरखाव करते हैं। आश्रम प्रबन्धक तथा कम्प्यूटर का कार्य करने वाले युवक साथी सहित माली एवं कुछ सहयोगी कार्यकर्ता हैं। यह सभी लोग समर्पण भाव से काम करते हैं। इनके वेतन व अन्य आवश्यकताओं आदि के लिये प्रति माह एक अच्छी धनराशि की आवश्यकता होती है। आश्रम के अधिकारी महानुभाव तो दान करते ही हैं, आर्यसमाज के सभी समर्थ सम्पन्न बन्धुओं से भी अपेक्षा रहती है कि वह भी समय-समय पर अपनी पवित्र कमाई का कुछ भाग दान के रूप में आश्रम को प्रेषित करते रहे जिससे आश्रम की गतिविधियों एवं कार्यक्रमों में किसी प्रकार की बाधायें न आयें। हम मंत्री जी श्री प्रेम प्रकाश शर्मा को देखकर आश्चर्य करते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने आश्रम को भली प्रकार से सम्भाला हुआ है। आज हमें उनकी योग्यता एवं समर्पण भाव रखने वाला कोई दूसरा व्यक्ति पूरे नगर में दृष्टिगोचर नहीं होता। वह तन व मन सहित धन से भी आश्रम का सहयोग करते हैं। उनके घर पर वर्ष में एक बार वेद पारायण यज्ञ होता है जिसमें जिले के आर्यजन भाग लेते हैं। एक विद्वान, भजनोपदेशक,यज्ञ की ब्रह््मा सहित मंत्र पाठी ब्रह्मचारी वा ब्रह्मचारियों को भी आमंत्रित करते हैं। देहरादून के सभी पुरोहितगण भी इस आयोजन में पधारते हैं। पूर्णाहुति के दिन प्रीतिभोज देते हैं। हम उनके इस धर्म एवं सेवाभाव से अति सन्तुष्ट हैं। हमारे सुझावों व परामर्शों को भी वह ध्यान से सुनते हैं। श्री प्रेम प्रकाश शर्मा इंजीनियर हैं और उत्तराखंड राज्य के विद्युत विभाग के मुख्य महाप्रबन्धक रहे हैं। इस कद का व्यक्ति आश्रम की उन्नति में जी जान से लगा हुआ है। हम समझते हैं कि ऐसा प्रधान सेवक आश्रम को मिलना असम्भव ही है। हम ईश्वर से आश्रम के प्रधान श्री दर्शन कुमार अग्निहोत्री जी और श्री प्रेम प्रकाश शर्मा जी के स्वस्थ जीवन एवं दीर्घायु की कामना करते हैं। हम आर्यजगत के सभी बन्धुओं से भी निवेदन करते हैं कि वह आश्रम को यथासम्भव आर्थिक सहयोग करते रहा करें जिससे यह आश्रम अपने कार्यक्रमों व गतिविधियों को अबाध रूप से करता रहे। आश्रम के सभी अधिकारी व कर्मचारीगण अपनी सेवायें देने के लिये भी प्रशंसा एवं बधाई के पात्र हैं। 

यहां हम इस लेख को विराम देते हैं। आश्रम के मंत्री श्री प्रेमप्रकाश शर्मा जी का मोबाइल नं. 09412051586 है। आपको कभी कोई जानकारी लेनी हो तो इस फोन नं. पर बात कर सकते हैं। ओ३म् शम्। 


मनमोहन कुमार आर्य

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