साहित्य के संकट



साहित्य के संकट


आलोक कौशिक


संकट साहित्य पर
है बड़ा ही घनघोर
धूर्त बना प्रकाशक
लेखक बना है चोर

भूखे हिंदी के सेवक
रचनाएं हैं प्यासी
जब से बनी है हिंदी
धनवानों की दासी

नकल चतुराई से
कर रहा कलमकार
हतप्रभ और मौन
है सच्चा सृजनकार

प्रकाशन होता पैसों से
मिलता छद्म सम्मान
लेखक ही होते पाठक
करते मिथ्याभिमान


आलोक कौशिक की कविता 'साहित्य के संकट' का नेपाली भाषा में अनुवाद:-

साहित्यमा संकट

साहित्यमा आएको छ आज
एउटा ठुलो संकट घनघोर ।
प्रकाशक बनेको छ धूर्त
लेखक बनेका छन्  चोर।।

भोकै छन् 'नेपाली 'का सेवक
रचनाहरूमा छ अतृप्त प्यास ।
जबदेखि बन्यो यहाँ 'नेपाली'
धनाढ्यहरूको आज्ञाकारी दास।।

नकल अति चतुराईले गर्छन
यी भनाउॅदा कलमकार 
हतप्रभ र मौन छन् यहाँ
नेपालीका साँचा सृजनकार।।

प्रकाशन हुन्छ आफ्नै पैसाले
पाइन्छ पनि छद्म सम्मान ।
लेखक नै हुन्छन् पाठक पनि
तर गर्छन् मिथ्या अभिमान।।
*********


अनुवादक:- इन्द्र गिरी
सिलीगुडी



संक्षिप्त परिचय:-

मूल रचनाकार:- आलोक कौशिक
शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य)
पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन
साहित्यिक कृतियां- प्रमुख राष्ट्रीय समाचारपत्रों एवं साहित्यिक पत्रिकाओं में दर्जनों रचनाएं प्रकाशित
पता:- मनीषा मैन्शन, जिला- बेगूसराय, राज्य- बिहार, 851101,
अणुडाक- devraajkaushik1989@gmail.com
चलभाष:- 8292043472

Post a Comment

0 Comments

कुछ तो हो