जिसके प्रकाश में रामायण महाभारत रच गए (लघु कथा)



जिसके प्रकाश में रामायण महाभारत रच गए 



 राज शर्मा 


आज बाहर इतना सन्नाटा क्यों,,,,, ? मंगरु ने मन मे सोचा । सांझ की घनघोर स्याह के समय सीढ़ियों पर लड़खड़ाते ऊपर के कमरे तक आ गया । अंदर खिड़की से धीमा से प्रकाश दिखा । अब कहीं मंगरु को सांस पे सांस आई । क्योंकि मंगरु पिछले चार दिनों से भूखा था । किबाड़ की थपथपी सुनकर अमित बाबू ने दरवाजा खोल दिया । अमित बाबू ने पूछा ,,, कौन........ हो...भाई,,? मंगरु चौंक गया , अमित बाबू आपने मुझे नहीं पहचाना मैं आपका मित्र मंगरु। अच्छा अच्छा मंगरु ! आज कैसे आना हुआ । चलो भीतर चलकर बात करते हैं ।

 एक कोने में एक छोटा सा दीपक पूरे कमरे में धीमा सा प्रकाश फैला रहा था । मंगरु को इतने कम प्रकाश की आदत अब नहीं थी । आखिर पूछ ही बैठा। अमित बाबू इतनी बड़ी हवेली के मालिक हो आप बिजली का प्रबन्ध क्यों नहीं कर लेते हो । अमित बाबू बोले मंगरु अब जिंदगी बीतने को हैं । बच्चें कलकत्ता में रहते हैं । मैं यहां अकेला । 

 अमित बाबू जानते थे कि मंगरु को ऊंची ऊंची हवेलियों में रहने का शौक है । तब अमित बाबू ने जो जबाब दिया जिसको सुनकर मंगरु अवाक रह गया। अमित बाबू बोले तू इस दीपक के कम प्रकाश से परेशान हो रहा है न । अरे ये दीपक बहुत पहले युगों काल से अकेलेपन का साथी रहा है। 

हमारे ऋषि मुनियों ने इसके प्रकाश के सहारे ही अल्प काल में ही रामायण, महाभारत , छंद, उपनिषद,सहिंताए लिखी थी तुम इस छोटे से दीपक का कम उपकार न समझो । गुरुकुल के विद्यार्थी भी इसके प्रकाश में स्वाध्याय किया करते थे ।ये ब्रह्मा पुत्र है । इसके प्रकाश की शक्ति को तुम कम न आंको ।जब विद्युत की खोज नहीं हुई थी तब भी तो यही  सबके घरों में प्रकाशमान था । आज भी है । मेरा तो रात्रि का यही एक मात्र साथी है । यह रहस्यमयी उत्तर सुनकर मंगरु चुप हो गया। 

राज शर्मा (संस्कृति संरक्षक)
आनी कुल्लू हिमाचल प्रदेश

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