मानसिक और बौद्धिक ऊर्जा का संचारक है दीपक ।



मानसिक और बौद्धिक ऊर्जा का संचारक है दीपक । 

डॉ. कुंदन कुमार

क्या आपने थाली बजायी था? यदि उत्तर हाँ है तो दूसरा प्रशन भी स्वाभाविक सा है। क्या आपको अच्छा लगा बजाकर? निःसन्देश इसका भी उतर हां ही होगा। हरेक लोगो मे अच्छा लगने का कारण अलग-अलग हो सकता है। किन्तु अच्छा लगना एक स्वाभाविक और मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसलिए आदरणीय प्रधानमंत्री जी के आग्रह पर 5 अप्रैल रविवार की शाम 9 बजे भी दीपक जरूर जलाये। इस बार भी आपको अच्छा लगेगा। बहुत लोग जो भगवान, हिन्दू संस्कृतिग्रह-नक्षत्र में अगाध आस्था रखते है। उनके मन मे तो कोई प्रश्न चिन्ह नही है औऱ वो खुशी से दीपक जलाएंगे। किन्तु कुछ के मन मे यह प्रश्न आ रहा होगा कि दीपक क्यों जलाये, इसकी क्या जरूरत है? आइये इसके वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक और धार्मिक पहलू को जानते है 

भो दीप ब्रह्मरूप स्त्वं
अंधकार निवारक: 
इमां मया कृतां पूजा
गृहस्तेज: प्रवर्धय॥

गीता के अनुसार ब्रह्म का प्रकाश इतना तेज है, जिसके सामने एक हजार सूर्यों का प्रकाश भी कम पड़ता है। जिसके कारण साधारण आंखों से कोई मानव उसके दर्शन करने में सक्षम नहीं है। भौतिक, व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक दृष्टि से यह प्रमाणित है कि सूर्य का प्रकाश प्रत्येक जड़ एवं चेतन में समाया हुआ है। दीपक में हम इसी तेल, घी और रूई का प्रयोग करते हैं। दीपक में सत्, तम एवं रज का समन्वय है। दीपक धवल प्रकाश तेज (सत्) और श्याम वर्ण अंधकार (तम) का सम्मिश्रण होता है। दीपक के जलते ही अंधकार को प्रकाश (तेज) अपने में लीन कर लेता है। इस प्रकार धवल (सत्) एवं श्याम वर्ण (तम) के मिश्रण से लौ में पीलापन आ जाता है।

विज्ञान के अनुसार भी रंगों की उत्पत्ति का सबसे प्राकृतिक स्रोत सूर्य का प्रकाश है। सूर्य के प्रकाश से विभिन्न प्रकार के रंगों की उत्पत्ति होती है। प्रिज़्म की सहायता से देखने पर पता चलता है कि सूर्य सात रंग ग्रहण करता है जिसे सूक्ष्म रूप या अंग्रेज़ी भाषा में VIBGYOR और हिन्दी में "बैं जा नी ह पी ना ला" कहा जाता है। तीन प्राथमिक रंग लाल,हरा औऱ नीला में से दो को मिलाने पर जो रंग बनाता है उसे पूरक रंग कहा जाता है पीले रंग को नीले रंग का पूरक रंग भी कहा जाता है औऱ यह लाल और हरे रंग के मिश्रण से बनाता है   दीपक के प्रकाश भी पीलापन लिए हुए रहता है अर्थात दीपक की लौ में पीला और लाल रंगों की झलक दिखाई देती है लाल रंग सबसे ज्यादा ऊर्जा का प्रतीक होता है, तो पीला रंग मानसिक और बौद्धिक उन्नति का प्रतीक के साथ ज्ञान, विद्या, सुख, शांति, योग्यता और एकाग्रता का भी प्रतीक होता है । मतलब जब हम दीप जलाएंगे तो ऊर्जा के साथ मानसिक और बौद्धिक उन्नति का भी माहौल घर मे बनायेगे।  इससे हमारे भीतर भी ऊर्जा का भी संचार होगा और काम, क्रोध, लोभ आदि पर नियंत्रण करने मे सहायक होगा।

जब दीपक जलाएंगे तो जीवन से भी निराशा,अंधकार, दूर हो जाएगा और एक स्फुटित सकारात्म ऊर्जा का संचार पूरे बातावरण में होगा जिससे वर्तमान निराशा दूर होगी। जीवन मे कभी कभी बिना सोचे समझे लाभ हानि को देखे भी कुछ काम करना चाहिए जैसे घर बैठे बैठे में  मुछे बढ़ा रहा हूँ, कुछ हमारी महिला मित्र लोग साडी में सुंदर फ़ोटो फेसबुक वाल पर डाल रही है। सब काम का कुछ हेतु ही हो, ये जरूरी नही है। कभी-कभी आपके दिल बहलाने के नुस्खे से इस विपत्ति की घड़ी में कुछ समय के लिए औरों का भी दिल बहल जाता है। इसलिए दीपक जरूर जलाये जिससे ऐसा मौहल व वातावरण बने की लोगो के अंदर ऐसा आशा और विश्वास जगे कि अब हमारी कोरोना पर जीत सुनिश्चित है।

 कुछ लोग कह रहे है कि गरीबो के खाने की व्यवथा होनी चाहिएप्रश्न वाजिव है चिंता भी जायज़ है । इसी काम मे सभी राज्य सरकारें, केंद्र सरकार, स्वयंसेवी संथाये और देश का हर जागरूक नागरिक लगा है ।बाकी फिर भी आपको कही कमी दिखती है कोई भूखा दिखता है ?तो कब तक हम सरकारों को कोशते रहेंगे,चलो जिम्मेदारी निर्वहन करने वाले नागरिक होने का नही तो मानव होने का ही धर्म निभाये और आसपास के लोगों को तो कम से कम कुछ दिन खिलाये।

कुछ लोग कह रहें है कि अब सेनिटाइजर की कमी से हट कर ये कथन शुरू हो गया कि डॉक्टरों को PPE kit ,मास्क, वेंडिलटर के साथ जाँच की उचित व्यवस्था नही है।अब थोड़ा  सच्चाई से भी अवगत हो ले क्या यह सही है?, मीडिया में जो लोग है उनकी सैलरी कंपनी के प्रचार प्रसार से ही आती है ये तो मानते ही है सब लोग औऱ कंपनी डिमांड से चलती है?आज तक देश मे मात्र 2500 मरीज है जिसके लिए देश के पूरे हेल्थ सिस्टम में लगभग 1 लाख वेंडिलटर उपलब्ध है और बाकी की व्यवस्था सरकार तेजी से कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार 40000 वेंडिलेटर के  आर्डर भी जा चुका है। साथ साथ ही देश के कई स्टार्टअप, सस्ता अच्छा जुगाड़ निकालने में भी दिन रात लगे हुए है। दूसरा देश मे PPE की बहुत कमी है।  शायद इसकी भी कमी बिल्कुल नही है में इस मामले में कई राज्य सरकारें अपने स्तर पर  कोशिस भी कर रही है । अब जल्दीवाजी में कोई वितीय लेन देन या प्रक्रिया में गलती हो जाये तो कल यही लोग कहेंगे की यहाँ घोटाला किया गया है।इसलिए राज्य सरकारें सावधानी से किन्तु मजबूती के साथ कदम बढ़ा रही है। बाकी सरकार ने 3 करोड़ PPE का आर्डर दक्षिण कोरिया को दिया हुआ है।अभी की जरूरत के हिसाब से  इस किट की भी कमी नही जान पड़ती है। अब मास्क की चर्चा करते है कल तक मीडिया वाले लोग ही यह प्रचारित कर रहे थे कि वायरस का साइज बहुत बड़ा है। इसलिए N-95 मास्क की आम आदमी को जरूरत नही है।

वैसे डॉक्टर के लिए वास्तव में N-95 मास्क की कमी है इससे इनकार नही किया जा सकता है किंतु ट्रिपल लेयर मास्क जितना चाहिए उतना देश मे उपलब्ध है और बहुतेरे स्टार्टअप और पुरानी कंपनी है जिसने  हाथ आजमा कर मास्क बनाना शुरू कर दिया है।आइये अब जानते है जाँच की व्यवस्था के बाड़े मे अभी तक जो सेरोलॉजी टेस्ट उपलब्ध है उसमे  वायरस संक्रमण के 7 से 10 दिन के आस पास सही जाँच सम्भव है। मतलब संक्रमण के 7 से 10 दिन के बाद ही सही जांच संभव है अगर उससे पहले जाँच करते है तो नेगेटिव टेस्ट भी कालांतर में पॉजिटिव आने की संभावना रहती है।

अब बताये देश मे संक्रमित लोग 2500 है। 16 कंपनियों को सिर्फ ये किट बेचने का अप्रूवल मिला हुआ है । जर्मनी से टेस्ट किट आ चुका है। RT-PCR बेस्ड जांच तकनीक पर भी तेजी से काम हो रहा है। जिसमे प्रारंभिक सत्तर पर भी जाँच संभव है। इसमें भी भारत के लिय कुछ अच्छी बात है। एक स्टार्टअप कंपनी mylabs जो पुणे में अवस्थित है, वो पूर्ण स्वदेशी भारतीय कंपनी, एक सप्ताह में एक लाख किट बना रही है और एक किट में 100 लोगों की जाँच संभव है। मतलब हर सप्ताह 1 करोड़ की कैपेसिटी एक my labs की ही गई है। अगर अभी भी आपको तैयारी में कोई संदेह हो तो आगे जरूर चर्चा करेंगे। फिलहाल अभी व्यर्थ की चिंता छोड़िए और 5 तारीख को शाम 9 बजे दीपक घर के बालकनी में जरूर  जलाएं।


डॉ. कुंदन कुमार
शिक्षा - पीएचडी (बायोटेक्नोलॉजी) एमबीएएग्रीकल्चर पालिसी में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा। वर्तमान में सोशल एंटरप्रेन्योरशिप दिल्ली में कार्यरत। 12 साल का रिसर्च तथा अन्य फील्ड में व्यतिगत अनुभव।

Post a Comment

0 Comments

 विश्व के लिए खतरा है चीन