इतनी पवित्र थी वो सीता


इतनी पवित्र थी वो सीता


आशीष भारतीय (बाबा)

दिया जला के दुख भुला के
सृष्टि के सब कष्ट मिटा के
केकई के मन लालच आई
राम की गद्दी भरत ने पाई
दुख वनवास का सह नहीं पाए
दशरथ के मन मोक्ष को पाए

खींच गए थे लक्ष्मणरेखा
भाप ना पाई पाखंड की सीमा
सीता थी जो साथ निभा दी
सुग्रीव संग वानर सेना ने
रावण की इतिहास मिटा दी
इतनी पवित्र थी वो सीता
नारीत्व का मान था जीता
अग्निदेव भी देख ना पाए
त्रुटि कहां है समझ ना पाए
है सीता वह माता जैसी
पूरी धरती लिए समाए
यही है सभ्यता संस्कृति हमारी
जहां धरा माता कहलाती


आशीष भारतीय (बाबा)

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