इतिहास की किताबें सिर्फ पूजने के लिए नहीं होती

इतिहास की किताबें सिर्फ पूजने के लिए नहीं होती



संजीव लखनपाल


यूं उपदेशों से
बुराई नष्ट हो जाती
तो
सुर असुर संग्राम,
महाभारत,
राम रावण युद्ध
ना होता।

श्री कृष्ण नें
कम उपदेश ना दिए थे
और
श्री राम नें
कोई कम दूत ना भेजे थे
समझौते को।

इतिहास की किताबें सिर्फ
पूजने के लिए नहीं होती
वो शिक्षक होती हैं
अगर नहीं सीखते तो
जितनीं चाहे
गीता जयन्तियां मना लो
दिवालिया मना लो
क्या फर्क पड़ता है?

मन्दिर में दिए जलाओ
कृष्ण भजनों पर नाच कूद गा लो
क्या बदल जएगा
कुछ भी नहीं?
बल्कि चीजें बद से बदतर हो रही हैं।

बदलेंगी तब
जब राम कृष्ण को जीवन में उतारोगे।
इतिहास से सीखोगे।



संजीव लखनपाल
रंगकर्मी
करनाल

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