लिखता हूँ बार बार मिटा देता हूँ मै - आर के रस्तोगी



लिखता हूँ बार बार मिटा देता हूँ मै - आर के रस्तोगी

✍️आर के रस्तोगी


चारो तरफ है सन्नाटा ,अब क्या किया जाये 
दिल बहलाने के लिये, अब कुछ लिखा जाये 
भेज दू क्या मै जो लिखता हूँ,मै तुम्हारे लिये 
जिससे दिल की बाते,दिल को सुना दिया जाये

लिखता हूँ बार बार उसको मिटा देता हूँ मै
हिम्मत नहीं होती है उसको बता दू मै 
पता नहीं ये दिल,कमजोर हो गया है क्यों 
दिल से दिल के बाते कहता नहीं क्यों मै 

पास होती तो लिखने की जरूरत पडती नहीं
कलम कागज स्याही की जरूरत पडती नहीं 
कह लेता दिल की बाते,अपनी आँखों से तुमको 
जब आँखे मिल जाती,कोई जरूरत पड़ती नहीं 

ये हवाये भी बदचलन है पहले जैसी चलती नहीं 
ये भी रूख बदल देती है हमारी बाते कहती नहीं
चलो इन हवाओं को रूख मोड़ दे और बाते करे 
मौसम बदल चूका है,प्यार की बाते होती  नहीं

तुम्हारे पास गंगा मेरे पास यमुना बह रही है अब 
उनकी लहरों व बहाव के जरिये बाते करगे है अब 
दिल की किश्ती बनाकर, अरमान लिखते है अब 
पकड़ लिया करो किश्ती पढेगे दिल की बाते है अब 

चलो छोड़े पुरानी बाते,नई टेकनिक आ गई हैअब 
कागज कलम स्याही  की जरूरत नहीं है अब 
ले लेते है एक अच्छा सा  मोबाइल दोनों अब  हम
उँगलियाँ ही चला कर दिल की बाते करेगे अब हम 

✍️आर के रस्तोगी
गुरुग्राम


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