नवीन हलदूणवी की तीन रचनाएँ



नवीन हलदूणवी की तीन रचनाएँ 

(1)

गजल

कम्मैं  औंदी  खट्टी  जी,
चलदी फिरदी हट्टी जी।

दो  नंबर  दे  धंधे  दी ,
हुंदी   अट्टी-सट्टी   जी।

भ्रष्टाचारी  लोक्कां  नैं ,
लाई   सट्टवसट्टी   जी।

पूरी  पौंग  पढ़ाई  नीं ,
पुट्ठे  प्हाड़े  रट्टी  जी।

सच्चाई दा मुल्ल कुथू ,
मेस्सीत्ती    पट्टी  जी

कुण पुच्छा दा देस्से जो,
खाई थुक्की - चट्टी जी ?

मित्त 'नवीन' गुआच्ची गे,
भोल़े - भाल़े  भट्टी  जी ।

(2)

जेकर पल्लैं एक्का जी



कट्टै  रंड  रंडेप्पा  जी,
जेकर पल्लैं एक्का जी।

दुनियां म्हौल बगाड़ा दी,
मारन लोक बरेक्का जी।

गुड्डी  गास्सैं  चढ़दी  ,
औआ मत्था  टेक्का जी।

दिक्खी बत्त तरक्की दी,
खाणा नीं ऐं सेक्का जी।

भारत माता बोल्ला दी,
गद्दारां  जो  छेक्का  जी।

जै - जैकार  "नवीने"  दी,
खोल्लै भास्सी ठेक्का जी।

(3)

मसला  भुच्चर  मत्ते  दा।


घर-घर  रोणा  भत्ते  दा,
मैंझर  खूब  कुपत्ते  दा।

बरखा  मार  दुआंदी  ,
भौंऐं   छप्पर   छत्ते   दा।

भोल़ा-भकल़ा  कंबा  दा,
खंग्ग खड़ाक्का तत्ते दा।

खाणा-पीणा  बधिया  ,
सुथरा  अंग्गण  सत्ते  दा।

मौसम  छैल़  सुहाना  ऐं,
म्हीन्नां  आया  कत्ते  दा।

लग्गा  रोग  'नवीनेजो,
मसला  भुच्चर  मत्ते  दा।

नवीन हलदूणवी
8219484701
काव्य - कुंज जसूर-176201,
जिला कांगड़ा ,हिमाचल प्रदेश।

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