नवीन हलदूणवी की रचनाएँ

नवीन हलदूणवी की रचनाएँ

 (1)
स्हाड़ी बी मजबूरी ऐ

नवीन हलदूणवी

स्हाड़ी बी मजबूरी ऐ,
दूरी  ब्हौत  जरूरी  ऐ।

छड्डी रिस्ते नात्ते जी,
पौंणी नीं हुण पूरी ऐ।

बधदा रोग करोने दा,
लंगर  गैर  जरूरी  ऐ।

भीड़ भड़क्का करने ते,
म्हेस्सा जिन्द अधूरी ऐ।

अपणा फरज़ नभाई लै,
खाणी  जे  घी-चूरी  ऐ।

भारत देस "नवीने" दा,
जै-जी करन हज़ूरी ऐ।

 (2)
राम रसायन दा ऐ पास्सा
  
राम रसायन हमरे पास्सा,
पूरी होणीं स्हाड़ी आस्सा।

भारत  दी  धरती  दे  उप्पर,
हुण नीं वरतै कोप नरास्सा।

छैल़  तरक्की  होई  जाणी,
घोल़ी पीणा रोज पतास्सा।

जै - जैकार करेगी दुनियां,
झंडा चढ़ना उच्चे गास्सा।

सच्ची गल्ल गलाणे ब्हाली़,
फिक्की नीं ऐं स्हाड़ी भास्सा।

सुरत  "नवीने"  दी  बदलोणी,
भुल्ली जाणीं चोप्पड़ झास्सा।

 (3) 
कुथू ऐ

सुच्चा  मीटर-गज्ज  कुथू ऐ,
ग़ज़लां अन्दर जज्ज कुथू ऐ?

रोज  फराट्टी  पाणे  ब्हाल़ा ,
कविया मित्तर अज्ज कुथू ऐ?

देस - भलाई  सुथरा  सौद्दा ,
पुन्न  कमाओ  पज्ज  कुथू ऐ ?

मुंह्मेंटड्डी   दाज्जे   मंग्गण,
कुड़म-कमीन्ने रज्ज कुथू ऐ  ?

किंह्यां   दस्सो  होंग   सफाई,
बोल्लण पल्लैं छज्ज कुथू ऐ ?

स्हाकी लोक 'नवीन' गलांदे,
खिल्ले खेत्तर चज्ज कुथू ऐ ?

 (4) 
तांईं  देस  पलूणा  जी

खाणा खूब सलूणा जी,
तांईं  देस  पलूणा  जी।

रोट्टी - पाणी तत्ता जी,
काम्मैं अंबर छूणा जी।

छैल़  घड़ोलू  भरना  ऐं,
म्हेस्सा छल़कै ऊणा जी।

धूंणीं  पाई  मिरचां  दी,
करना पौणा टूणा जी।

भारत मां दी भगती दा,
जोश भरी जा दूणा जी।

अल़ख "नवीन" मुकाईत्ता,
हुण  नीं  बुज्झै  धूणा  जी।

 (5) 
औंदी याद दरोक्के दी

औंदी याद दरोक्के दी,
लाड़ी बोल्लै शोक्के दी।

टमक बजी पे छिंजा दे,
अम्मा स्हाकी रोक्के दी।

पल्लैं  पैसा-धेल्ला  नीं,
रीणीं  पाई  कोक्के  दी।

मेल्ला हुंदा कुड़ियां दा,
नूंह् नणान्नां टोक्के दी।

पूल्ला बढणा घाए दा,
सेवा करनी गोक्के दी।

लाड"नवीन"लड़ाईत्ता,
चौधरचारी फोक्के दी।

नवीन हलदूणवी
8219484701
काव्य - कुंज जसूर-176201,
जिला कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)

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