वर्तमान परिस्थिति में देश की अर्थव्यवस्था व रोजगार को मजबूत करने का स्वदेशी ही रास्ता है-सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी



स्वदेशी ही है भारत के परम विकास का मार्ग: सरसंघचालक उवॉच

न अन्य पंथ: विद्यते! स्वदेशी ही है भारत के परम विकास का मार्ग।  नागपुर से संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी ने कहा "वर्तमान परिस्थिति में देश की अर्थव्यवस्था व रोजगार को मजबूत करने का स्वदेशी ही रास्ता है।"

उनके संबोधन में से स्वदेशी आधारित कुछ बिंदु:

1. कोरोना काल के बाद अपनी अर्थव्यवस्था और जो लोग शहरों से अपने गांव में वापिस चले गए हैं, उनके रोजगार की चिंता करना।

2. कम ऊर्जा खाने वाला, रोजगार मूलक, पर्यावरण को ना बिगाड़ने वाला, ऐसा विचार हमारे ही पास है। आधुनिक विज्ञान के आधार पर हमको एक नए विकास के मॉडल का निर्माण करना पड़ेगा।

3. अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक व्यवहार में स्वदेशी का पालन हमें करना होगा। यहां की बनी वस्तुएं, जहां तक संभव है, उन्हीं का प्रयोग करेंगे। यहां जो बनता नहीं, उसके बिना यदि जीवन चलता है, तो बिना उसके जीवन चलाएंगे। जीवन के लिए यदि आवश्यक है, तो अपनी शर्तों पर लेंगे और कम से कम उपयोग में लाएंगे।

4. स्वदेशी का आचरण करने के लिए स्वदेशी के उत्पादन उपलब्ध करने पड़ेंगे। और स्वदेशी उत्पादों की अच्छी गुणवत्ता उत्पन्न करनी पड़ेगी।विदेशों के उपर अवलंबन नहीं होना चाहिए, ऐसा हमको समर्थ रहना पड़ेगा।

5. हमने अनुभव किया कि पर्यावरण बहुत मात्रा में शुद्ध हो गया है, क्योंकि कुछ क्रियाकलाप बंद हो गए जो पर्यावरण को दूषित करते थे। अब फिर से हम अपना जीवन नियमित शुरू करेंगे, तो कौन से ऐसे क्रियाकलाप कम से कम हम कर सकते हैं, बिना उनके भी काम चल सकता है, इसका विचार हमको करना पड़ेगा।

6. पानी का उचित उपयोग, वृक्षों का संवर्धन संरक्षण और प्लास्टिक से मुक्ति, स्वछता का पालन, गौ पालन, जैविक खेती, आदि के आधार पर जीवन चलाने का अभ्यास हमको करना पड़ेगा। अभी जो हमारा अभ्यास रासायनिक खेती का है, उसको बदलना पड़ेगा, उसके लिए सारे समाज का मन बनाना पड़ेगा।* 

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