मै जलियाँ वाला बाग बोल रहा हूँ - आर के रस्तोगी


मै जलियाँ वाला बाग बोल रहा हूँ


आर के रस्तोगी

मै जलियाँ वाला बाग बोल रहा हूँ
जालिम डायर की कहानी सुनाता हूँ
निहत्थों पर गोली चलाई थी
मरने वालों की चीखें सुनाता हूँ ||

चश्मदीद गवाह था मैं
यह सब कुछ दृश्य वहां देख रहा था
मेरे आँखों में आँसू थे पर
डर के मारे न बोल रह रहा था ||

13 अप्रैल 1919 बैशाखी का दिन था
यहाँ काफी वीर सपूत आये थे |
रोलेट एक्ट के विरोध में
ये सब मीटिंग करने यहाँ पर ये आये थे ॥

सौ वर्ष के बाद भी आज
उनकी चीखें सुनाई देती हैं
उनकी शकले आज भी
सपनों में दिखाई देती हैं ॥

उधम सिंह था एक देश भक्त
जिसने ख़ूनी डायर को मारा था 
चने चबाते चबाते लन्दन में
उसने घर में घुस कर मारा था ॥

उधम सिंह 11 साल का बालक था,
जब उसने ये घटना देखी थी 
कसम खाई उसी दिन उसने
जनरल डायर को मारने की ठानी थी ॥

करता रहा 21 साल तक कोशिश
गरीब वह अपने घर से था 
मेहनत मजदूरी कर कर के वह
पहुचा लन्दन उसके घर में था ॥

चलाई तीन गोलियां डायर पर
जब वह बदला ले लिया बोल रहा था
कर दिया सरेंडर अपने आप को
उसने अपने जीवन से खेल रहा था ॥

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम मो-9971006425

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