कोरोना काल में भारत नायक बनकर उभरेगा

कोरोना काल में भारत नायक बनकर उभरेगा

डॉ. कुंदन कुमार

आज वही लोग अपने देशी कंपनी औऱ सरकार को नैतिक भाषण दे रहे है जो लोग कल तक इसे निम्न स्तर ,जेनेरिक, आदि बोल कर हतोत्साहित करते रहे है और विदेशी कंपनियों Merck, abbott, Sigma आदि को प्रोत्साहित। आज विपत्ति के समय मे मेरे जैसा व्यक्ति भी अपनी क्षमता से 5 गुणा ज्यादा PM केयर्स में दान देता है। किंतु ये विदेशी कंपनी इस जरूरत के समय में अग्रिम पैसा देने पर भी समान नही दे रही। वो तो धन्य हो प्रधानमंत्री जी के स्टार्टअप योजना, स्किल योजना का कि उन्होंने इतने युवाओं को खड़ा कर दिया कि पलक झपकते इनोवेशन के साथ उत्पादन भी शुरू कर दिया और आज देश खुद के लिए तो बना ही रहा है, बल्कि दूसरे देशों को देने में भी सक्षम है।

पहले सेनेटाइजर की कमी थी। आज इतना है कि कोई लेने वाला नही। अब स्वदेशी PPE की भी कोई कमी नही। अब तो DRDO के साथ - साथ भारतीय रेल कारखाना कपूरथला भी PPE का उत्पादन करेगी। भारतीय रेल 10 लाख टन खाद्यान्न के साथ साथ 3.2 लाख आइसोलेशन बेड औऱ 1.4 लाख लोगों का खाना भी सुनिश्चित कर रही है। मेरे जानने वाले कई स्टार्टअप मित्र जो सूटकेस, बैग,गाउन आदि बड़े पैमाने पर बना रहे थे, वो भी देश हित मे PPE,और मास्क बनाने लगे। 3 प्लाई मास्क तो दर्जी अब्दुल चाचा भी आपके हमारे मनोविज्ञानक जरूरत के लिए रोज ना जाने कितना बना देते है।

MCQ दवा की कोई कमी नही है। देश मे सिर्फ दो कंपनी कैडिला और ifca की बात कर रहा हूँ। सिर्फ इनकी क्षमता 60 करोड़ टेबलेट हर महीने बनाने की है। कैडिला तो प्रतिदिन अब 50 लाख यानि महीने का 15 करोड़ टेबलेट बना भी रही है। टेस्टिंग किट भी भारत की कंपनी तेजी से बना रही है। कल ही HLL के किट को ICMR ने मान्य करार दे  दिया। इसके साथ मे पुणे की स्टार्टअप कंपनी mylabs सबसे सस्ता सबसे अच्छा और सबसे ज्यादा उत्पादन कर ही रही है।

अब एक वेंडिलटर की समस्या है। अभी तक के डेटा से ये पता चलता है कि पूरे विश्व मे  5% कोरोना मरीज को वेंडिलटर की आवश्यता होती है। अभी देश मे 5000 मरीज है। भगवान ना करे कि ऐसा हो किन्तु अगर 20 लाख लोग बीमार पड़ते है तो 1 लाख वेंडिलटर की आवश्यकता होगी। जो अभी पूरे भारतीय हेल्थकेयर सिस्टम में है। आगे ईश्वर ने चाहा तो जल्दी ही PPE, मास्क और सेनेटाइजर वाली स्थिति वेंडिलटर की भी भारत मे हो जाएगी।  मतलब अपने आपूर्ति के अलावा हम दूसरे देशों को भी निर्यात करने में सक्षम होंगे । कोविड़-19 से लड़ने के लिए वैक्सीन के रीसर्च में भी कम से कम देश मे 10 जगहों पर तेजी से काम हो रहा है।  इस साल के अंत तक पूर्ण स्वदेशी कंपनी भारत बायोटेक, कैडिला फार्मा, सिप्ला फार्मा जैसी कंपनियां वैक्सीन बनाने में सक्षम होगी।

अब जरूरत है अपने युवाओं में विश्वास रखने की उनका मनोबल बढ़ाने की। यकीन मानिए ये अगर दो पैसे कमा कर रखते भी है तो आपके देश मे ही है बिपत्ति काल मे PM केअर में देने से भी नही चूकेंगे, ना ही गरीबो को खाना खिलाने में।अब बस आपको सोचना है कि हम कब तक थोड़े बहुत लालच में देशी समान उपलब्ध होने पर भी विदेशी कंपनी से समान खरीदते रहेंगे ? तनिक विचारिये क्या हम अपने समाज, भाई के हत्यारे के यहाँ लाख व्यंजन बनने पर भी भोज खाने जाते है ? क्या उंसके दुकान से जरूरत पर भी  कुछ खरीदते है या उससे किसी प्रकार का रिश्ता रखते है ? फिर दुनिया मे मानवता के हत्यारे, कोविड -19 के बारे  में सत्य जानकारी छुपा कर पूरी मानवता को संकट में डालने वाले, चीन से समान क्यों खरीदते है ? क्या हम मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम,कृष्ण के सिद्धांतों पर चलने वाले नही हो सकते? जब अमरीकन कंपनी हमे जरूरत में भी टेस्टिंग किट नही देती तो क्या उनका बर्गर पिज़्ज़ा का टेस्ट हमारे स्वाभिमान से भी बड़ा है? उनके समान लेने में अब भी इतनी दरियादिली क्यो ? अब सोचने और कहने का वक्त नही रहा,अब करने का वक्त है ।  कही ऐसा ना हो जाए कि समस्या खत्म होते ही हम अपने जिस कंपनी से देश भक्ति की आस लगाए बैठे है। कल उंसके स्वाभिमान को कुचल दे, औऱ विदेशी समान बेचने वाले कंपनी के सामने दो पैसे के आफर,और सस्ता के कारण लाइन ना लगाने लगे!

अभी के हालात में दुनिया की हालत पुराने जमाने के सिनेमा के कहानी की तरह हो गई है।  जिसमे विपत्ति काल मे गांव की सभी जनता को जालिम साहूकार के पास जरूरत के समान के लिए जाना ही पड़ता था औऱ वह कपटी ,चालक ,धूर्त साहूकार गरीब जनता को येन केन प्रकारेण प्रताड़ित करता था। यहां तक कि जान-माल से लेकर इज्जत से जब चाहे तब खेल जाता था।अभी के समय मे वह जुल्मी साहूकार के रोल में चीन है और पूरी दुनिया गरीब लाचार जनता। किन्तु कोई भी फ़िल्म बिना हीरो के नही बनती है औऱ अब उसकी एंट्री भारत के रुप में विश्व पटल पर होनी शुरू हो गई है। हीरो को शुरुआती दिक्कते तो आएगी ही। चाहे रील लाइफ हो या रियल लाइफ, किन्तु अन्त में विजय सत्य की ही होगी। कहानी के नायक की ही होगी,हमारे भारत की ही होगी।


डॉ. कुंदन कुमार

शिक्षा - पीएचडी (बायोटेक्नोलॉजी) एमबीएएग्रीकल्चर पालिसी में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा। वर्तमान में सोशल एंटरप्रेन्योरशिप दिल्ली में कार्यरत। 12 साल का रिसर्च तथा अन्य फील्ड में व्यतिगत अनुभव।

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