कोरोना के चक्रब्यूह में फसां चीन



कोरोना के चक्रब्यूह में फसां चीन

ब्रजेश सैनी 

चीन दुनिया का एक ऐसा मुल्क जिसके पास चतुराई है  और चालाकी भी , इसलिए चीन की  चाल और चरित्र पर हमेशा संशय रहता है । एक कहावत है समय के आगे किसी की भी नही चलती । मगर चीन है कि समय को मात देने की जुगत में लगा था । कोरोना की ऐसी तबाही आई की चीन को चारों खाने चित्त कर दिया । अब समझिए की चीन समय के चक्रब्यू में क्यों फसां । दरअसल चीन दुनिया अमेरिका की जगह लेना चाहता है मतलब सुपर पावर का ताज जो अभी अमेरिका के सर पर है चीन उसे हथियाने की कोशिश कर रहा है वो भी इसलिए की वह दुनिया में डॉलर की जगह अपनी मुद्रा युआन को फैला सकें ।

जिससे उसकी अर्थव्यवस्था चरम पर पहुँच जाये । और फिर अमेरिका जो आज सुपर पॉवर की गद्दी पर बैठा है उसे हटाकर खुद बैठ जाए । अब सिक्के का दूसरा पहलू समझिए जो पहले सिक्के का पहला पहलू हुआ करता था । चीन   के राष्ट्रपति शी जिंग पिंग ने साल 2018 में एक ऐसा प्रस्ताव पेश किया था जिससे वह लंबे समय तक चीन की सत्ता में काबिज रह सके । चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पांच वर्ष के दूसरे कार्यकाल को मंगलवार को मंजूरी देते हुए उनके नाम और विचारधारा को अपने संविधान में जगह दे दी। पार्टी के संविधान में शी की अवधारणा 'एक नए युग के लिए चीनी विशेषताओं के साथ समाजवाद' को शामिल करने की मंजूरी दे दी। चीन के महान कम्युनिस्ट नेताओं संस्थापक माओ त्से तुंग और उनके उत्तराधिकारी  तंग श्याओपिंग सबसे शाक्तिशाली नेताओं में रहे हैं जिनकी विचारधारा को पार्टी मानती आई है। माओ त्से तुंग और उनके उत्तराधिकारी तंग श्याओपिंग के विचारों को ही दुनिया में सबसे लंबे समय तक सत्तारूढ़ रहने वाली कम्युनिस्ट पार्टी के संविधान में जगह दी गयी थी ।

 इससे  पहले 2016 में चीन के आला नेता घोषित होने के बाद चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव  शी जिंग पिंग सबसे कद्दावर नेता हो गए ।  अगर आप देखे तो देंग के बाद चीन के ताकतवर नेता शी जिंग पिंग ही बने है  एक बात सभी जानते है कि चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ साथ दूसरा सबसे ताकतवर मुल्क भी है । मगर निर्यातक देशों की सूची में चीन  का दूसरा स्थान है  चीन जानता है कि अमेरिका को  अगर सुपर पावर की गद्दी से उतारना है तो सबसे पहले उसकी अर्थव्यवस्था तोड़नी होगी । क्योकि अमेरिका को सैन्य ताकत से  हराना इतना आसान नही है क्योंकि उसके पास विश्व की सबसे बड़ी सैन्य ताकत है उसकी अर्थव्यवस्था की कमर तोडना आसान नही है इसलिए कुछ ऐसा सोचा जाये जिससे अमेरिका घुटने पर आ जाये । इसलिए चीन ने एक महामारी के जरिये अमेरिका को नेस्तनाबूत करने की ठानी । वो महामारी कोरोना वायरस के रुप में साबित हो रही है । चीन से जन्मा कोरोना चीन से ज्यादा इटली को झकझोर कर दिया ।

मगर चीन चाहता है कि अमरीका कोरोना की वजह से टूट जाये । और वह हो भी रहा है अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर फर्क पड़ा है और बेरोजगारी ने भी दस्तक दे दी । चीन चाहता है कि अमेरिका इलाज के लिए  कोरोना से सम्बंधित जुड़े उपकरण चीन से आयात करे । इस बीच दोनों देशों में होड़ यह लगी है कि कोरोना की वैक्सीन सबसे पहले कौन तैयार करेगा । वैक्सीन बनाने का दबाव चीन से ज्यादा अमेरिका पर है क्योकि विश्व की सबसे बड़े और अच्छे स्वास्थ्य सेवाएं अमेरिका के पास ही है । कई जानकारों का मानना यह है कि चीन और अमेरिका के बीच पिछले साल हुए ट्रेड वॉर को लेकर चीन बदले की भावना से यह सब कर रहा है।

 चीन की सबसे महत्वकांक्षी योजना बीआरआई को 64 देशों ने अपनाया । जिसके कारण एशिया, मध्य पूर्व , अफ्रीका ,और लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभुत्व गम्भीर रूप से प्रभावित हुआ । पिछले साल पीपीपी ने एक सर्वे किया कि चीन की जीडीपी अमेरिका की जीडीपी से आगे निकल चुकी है और चीन दुनिया के अगले सुपर पावर बनने की राह पर निकल चुका है जो आने वाले समय में अमेरिका के लिए खतरे की घण्टी है । जब शुरुआत में कोरोना ने विश्व में अपने पैर पसारने शुरू कर दिए थे तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने पहले ही कह दिया था कि चीन ने जानबूझकर कोरोना नामक खतरनाक वायरस को इजाद किया है ताकि वह अमेरिका सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर सके और फिर विश्व का सबसे ताकतवर मुल्क बन सके । क्योकि आप चीन के अंदर ही नजर डाले तो वुहान से निकले कोरोना ने चीन की राजधानी बीजिंग और चीन की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले शंघाई कोरोना से अछूते कैसे रह गए ।

 यह समझने वाली बात है मगर कोरोना ने चीन को भी झकझोर कर रख दिया है वह दुनिया को दिखा जरूर नही रहा है कि उसको ज्यादा फर्क नही पड़ेगा । मगर समय के चक्रब्यू में चीन फंस ही गया है । इतिहास पर नजर डालिये तो 1950 के दशक के  बाद चीन सबसे बुरे संकट का सामना कर रहा है  वुहान से निकले एक अज्ञात वायरस ने जंगलों में आग की तरह समूचे विश्व को अपने चपेट में ले लिया । चीन में खुद अब तक 5000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है मगर कई जानकारों का यह मानना है कि चीन के ये मरने वाले आंकड़े झूठे है चीन में करीब मरने वालों की संख्या करोड़ो में है ।  तो फिर चीन के मन में क्या है और वह खुद कोरोना वायरस को जन्म देकर अपने लोगों के मौत का कारण क्यों बन रहा है । जो भी हो चीन की एक गलती पूरी दुनिया पर भारी पड़ रही है यही नही एक वायरस ने पूरी दुनिया के साथ साथ विज्ञान और शोधकर्ताओं को भी उलझकर रख दिया है । चीन ने तो अपने करीबी मित्र पाकिस्तान को बुरे हालातों में फंसा दिया है पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले ही ख़राब थी । आईएमएफ से लिए  लोन से तो पाकिस्तान चल रहा था उसके बाद कोरोना ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में कंगाली में आटा गीला करने का काम कर डाला । पाकिस्तान में संक्रमति लोगों की संख्या 3000 के पास पहुँच चुकी है ।

ऐसे में उसके पास इलाज के संसाधन भी नही है वह स्वास्थ्य उपकरण के लिए खुद दूसरो पर निर्भर है उसी का फायदा चीन ने उठाया । चीन ने कोरोना से जुडी घटिया और खराब  चीजें पाकिस्तान को मुहैया कराई जिससे पाकिस्तान की मीडिया और विपक्ष तिलमिला गया । इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि चीन खुद को ऊपर रखने के लिए अपनों को भी धोखा देने में गुरेज नही करता ।  कुछ भी चीन की मंशा कभी कामयाब नही होगी । क्योंकि समय ने चीन को जो सबक सिखाया है वह उसे ताउम्र याद रखेगा । एक बात जो कोई नही समझ सकता कि चीन दुनिया का ताकतवर बनने के लिए अब  कौन सी नई चाल चलेगा।

ब्रजेश सैनी 
स्वतंत्र टिप्पणीकार

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