चीन की एक गलती की सजा विश्व भुगत रहा है



चीन की एक गलती की सजा विश्व भुगत रहा है

ब्रजेश सैनी

क्या अमेरिका  क्या चीन क्या इटली और क्या  ब्रिटेन ये वो देश है जिनकी स्वास्थ्य सेवाएं बहुत ख़ास और अच्छी मानी जाती है मगर हर कोई कोरोना के तबाही के आगे नतमस्तक हो चुका है  समूचा विश्व वुहान से निकली महामारी से लड़ रही है अभी भी कोरोना वायरस जैसी खतरनाक महामारी थमने का नाम नही ले रही है कोरोना दिन पे दिन अपने पांव पसारते ही जा रहा है । पूरी दुनिया में कोरोना ने लाखों की संख्या में लोगों को मौत के घाट उतार दिया । और संक्रमितों का आंकड़ा करीब 24 लाख के पार पहुँच गया गया । हालातों  और कोरोना को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कोरोना वायरस लाखों में नही बल्कि करोड़ो लोगों को अपना शिकार बनायेगा । 

 खास बात यह है कि कोरोना से सबसे प्रभावित यूरोप के देश है यह बात इसलिए लिए की जा रही है कि कोरोना के कहर को 4 महीने बीतने वाले है अभी तक कोई भी देश इसकी वैक्सीन नही बना पाया । जो हैरान कर देने वाली बात है । सभी देश सिर्फ मास्क और जरुरी नियम से ही बचाव कर रहे है । यहाँ तक की कुछ दिन पहले एक मलेरियारोधी दवा हाइड्रोक्सी क्लरोक्विन ही संजीवनी का काम कर रही है । अमेरिका , ब्राजील , इटली , पाकिस्तान , ईरान , इजराइल जैसे 50 से ज्यादा मुल्क इसी दवा के सहारे कोरोना मरीजो को ठीक कर रहे है।

 सुपर पॉवर अमेरिका ने कुछ दिन पहले भारत से हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्विन की मांग की थी अमेरिका जानता है कि जब तक कोई वैक्सीन नही बन जाती है इसी दवा पर निर्भर रहेगा । एक बात हम सभी जानते है कि चीन की एक गलती की सजा विश्व जगत भुगत रहा है । चीन खुद को विश्व  का सुपर पॉवर बनने के लिए पूरी दुनिया को मौत के मुह में धकेल दिया । दिसम्बर माह में जब कोविड -19 चीन की जानकारी में आया तो उसने भरपूर इसे छिपाने की कोशिश की । मगर वो छिपा नही सका । खुद तो एक चाल के जरिये कोरोना से जूझ रहा है साथ ही विश्व को भी अपने साथ ले चला । हालांकि चीन में कोरोना को लेकर हालात सामान्य थे मगर पिछले दिनों चीन के ही एक अन्य राज्य ने फिर सबको चौकां दिया । चीन  में कोरोना को क़ाबू किए जाने के दावे के बीच  हेलोनजियांग प्रांत नया सिरदर्द बनता गया है  चीन के प्रमुख अख़बार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़ कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले हेलोनजियांग प्रांत में बढ़कर 257 हो गए हैं 

ये संख्या इस समय चीन के हूबे प्रांत से भी ज़्यादा है.ऐसा क्यों है कि चीन के कोरोना को कंट्रोल करने के दावे के बीच नए मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं.चीन इस समय दो तरह की मुश्किलें झेल रहा है, एक इम्पोर्टेड केस यानी वैसे मामले जो दूसरे मुल्कों से चीन में आ रहे हैं और दूसरा वैसा मामला, जिन्हें बिना लक्षण वाला मामला कहा जा रहा है.इन मामलों में लोगों में लक्षण नहीं पाए जाते हैं या हल्के लक्षण होते हैं, लेकिन उनके टेस्ट पॉज़िटिव आ रहे हैं.चीन का हेलोनजियांग प्रांत पूर्वोत्तर में है और उसकी सीमा रूस से लगी हुई है. चीन में रविवार को 108 नए मामले दर्ज हुए, जो क़रीब एक सप्ताह में दर्ज सबसे ज़्यादा मामले हैं.चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन का कहना है कि इनमें से 98 मामले इम्पोर्टेड हैं. जबकि हेलोनजियांग में 49 मामले दर्ज हुए हैं. ये सभी चीन के नागरिक हैं, जो रूस से यहाँ पहुँचे हैं. इस प्रांत के स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चीन के कई नागरिक रूस से वापस लौटना चाहते हैं, लेकिन ये इस समय ठीक फ़ैसला नहीं है.

दरअसल विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि इस समय जो जहाँ है, वहीं रहे , अमेरिका में भी मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है । अमेरिका में 26000 लोग दम तोड़ चुके । स्पेन में पिछले 24 घण्टो में 523 लोगों की जान चली गयी ।  उसके बाउजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने लॉकडाउन नही लगाया ।  इससे अमेरिकी लोग सकते में है ये जानते हुए की महामारी का केंद्र अमेरिका बनता जा रहा है इटली ने लॉकडाउन किया था अभी 3 मई तक जारी रहेगा मगर लॉकडाउन में कुछ हालात सुधरे है  जबकि इटली में चीन से ज्यादा लोगों की मौत हुई  । अब इटली में स्थिति काबू में है दुकाने छोटे मझोले कारखाने खुल गए है  । लेकिन सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि यूरोपीय देशों में सिर्फ 10 लाख लोग संक्रमित है  मौतों के आंकड़े के लिहाज से 1, 26870 में आधे लोग यूरोपीय देश में मरे है । दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत जहाँ कोरोना को लेकर स्थित सामान्य थी लेकिन पिछले दिनों जमातों की करामात की वजह से संक्रमितों की संख्या 12000 के करीब पहुँच गई । जबकि 720 लोगों की मौत भी हो गयी । अगर कोरोना को समय रहते न रोका गया तो हालात बहुत ख़राब होंगे ।  

 कोरोना से पहले  इस दुनिया ने कई तरह के वायरस से सामना कर चुका है वो परिणाम बहुत घातक साबित हुए थे । सार्स , इबोला यही नही  साल  1918 में पनपे एक अज्ञात वायरस स्पेनिश फ्लू ने जो कहर बरपाया था दुनिया उसे सिर्फ आज इतिहास से ही जानती है तब इस  वायरस से करोड़ो लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा था वह स्पेनिश फ्लू  ही था याद  स्पेनिश फ्लू नामक एक वायरस ने भारत में अकेले डेढ़ करोड़ लोगों को मौत की नींद सुला दी थी  यही नही स्पेनिश फ्लू ने पूरी दुनिया के 5 करोड़ से भी अधिक लोगों  मौत के घाट उतार दिया था । तब भी विज्ञान इस महामारी से अज्ञान था और आज भी है वही  अगर समय पर  कोरोना वायरस की वैक्सीन न बनी तो कोरोना का कहर साल 2021 को भी छू सकता है ।  यह कोई बड़ी बात नही होगी ।  कोरोना की काठ ढूंढने ने विज्ञान भी पस्त है । डॉक्टर से लेकर शोधकर्ता और वैज्ञानिक भी बेबस नजर आ रहे है अमेरिका से खबर आई की वैक्सीन ढूंढ़ ली गयी है सिर्फ प्रोयग किया जाना बाकी है हम इसे 6 महीनों में बना लेंगे । चीन के दावे बहुत अलग है कभी कधत है वैक्सीन मौजूद है तो कभी नकारता है ।

 भारत में वैक्सीन को लेकर क्या चल रहा है कोई खबर नही है । यूरोपीय देश तो इस कदर डटे हुए है कि वह लगातार हो रही मौतें से बहुत पीड़ित है । कोरोना ने इस कदर तहलका मचा रखा है अर्थव्यवस्था भी चरमरा रही है । जानकारों का मानना है कि अगर आने वाले कुछ महीनें कोरोना का यही रवैया रहा तो विश्व के सभी देशों की अर्थव्यवस्था अर्श से फर्श पर आ जायेगी । तब तक बहुत देर हो चुकी होगी । दूसरी बात जहाँ विश्व जगत को इस महामारी से एक साथ लड़ने का समय है वही अमेरिका -चीन आपस में उलझ रहे है । अमेरिका ने तो विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी आड़े हाथों लिया है उस पर आरोप लगाया कि चीन से मिलीभगत से दुनिया डब्लूएचओ की वजह से मौत के मुंह में खड़ी है । यूरोपीय देश तो मेडिकल किट जैसे मास्क , पीपीई , वेंटिलेटर जैसे उपकरण को लेकर आपज में उलझ पड़े है । अगर कोरोना जैसी घातक महामारी से निजात चाहती है दुनिया तो एक साथ डटकर मुकाबला करना होगा ।

ब्रजेश सैनी
स्वतंत्र टिप्पणीकार
बिंदकी फतेहपुर यूपी 9919397452

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