एक रचना आपकी नज़र ...अशोक दर्द



एक रचना आपकी नज़र ...

अशोक दर्द

जेब में जैसे बम रखते हैं ।
ऐसे दोस्त हम रखते हैं ।।

न जाने कब फट जाएं ये ।
फिर भी यारों दम रखते हैं ।।

शहर की सोहबत ऐसी है कि ।
जेब में पैसे कम रखते हैं ।।

यार हमारे काम आएंगे ।
ऐसी आशा कम रखते हैं ।।

वो भी अपने यार हैं यारों ।
जो दिल में पेचो खम रखते हैं ।।

कितने धोखे खाए जग से ।
फिर भी पास न गम रखते हैं ।।

उन्हें उजाले देना ईश्वर ।
मेरे राह जो तम रखते हैं ।।

मुर्दा बस्ती में रहकर भी हम ।
अपनी आंखें नम रखते हैं ।।

दर्द बंजारा सच कहता है ।
फिर भी लोग भरम रखते हैं ।।

अशोक दर्द
वरिष्ठ साहित्यकार
हिमाचल प्रदेश

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2 Comments

  1. बहुत ही शानदार 🎊 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 🌷 बधाई एवं शुभकामनाएं जी

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