अनजान (कविता) - अमित डोगरा




अनजान

अमित डोगरा

उनकी आँखों का इंतजार हैं हम,
फिर भी वो अनजान है।।
उनके चेहरे की हँसी है हम,
फिर भी वो अनजान है।।
उनके अधरो की
मुस्कुराहट है हम,
फिर भी वो अनजान है।।
उनके सपनो के ख्वाब है हम,
फिर भी वो अनजान है।।
उनके गुस्से की तकरार है हम,
फिर भी वो अनजान है।।
उनके अहसासो मे बसते है हम,
फिर भी वो अनजान है।।
उनके दिल की धड़कन है हम,
फिर भी वो अनजान है।।

अमित डोगरा  
पी.एच डी शोधकर्ता
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर,

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