आज मैं उड़ चला - अमित डोगरा


आज मैं उड़ चला

✍️मित डोगरा



उड़ चला,
आज मैं उड़ चला
दूर चला बहुत दूर चला।

आजाद हो गया मैं
पिंजरे की कैद से,
आजाद हो गया
रोज की घुटन से,
अपनी मंजिल को
पाने के लिए आज
मैं चल पड़ा।

एक नए पथ पर
निकल पड़ा,
एक नई दुनिया में
चल पड़ा,
जहां सब कुछ नया होगा,
पुराने रास्तों को छोड़ चला,
अपने अस्तित्व को पहचाने 
अब चला पड़ा
अपने आपको को पाने
आज निकल पड़ा,
अपनी कर्तव्यनिष्ठा को
निभाने चला पड़ा।


✍️अमित डोगरा,
पी.एच डी शोधकर्ता, गुरू नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर
,amitdogra101@gmail.com,9878266885


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