आया है तो क्या हुआ, बीतेगा भी दौर


आया है तो क्या हुआबीतेगा भी दौर

अजय गुप्ता 'अजेय'

नदियाँ सब निर्मल हुईं, ली वृक्षों ने साँस,
मानव के अस्तित्व में, है विकास की फाँस।

महामारी न जानिए, ये तो है अवतार,
कुछ दिन की ख़ातिर किया, सकल सृष्टि उद्धार।

बाहर जाना बंद कर, करें यही सब कर्म,
भीतर भीतर को चलें, समझें अपना धर्म।

आया है तो क्या हुआ, बीतेगा भी दौर,
समय मिला संयोग से, जुगत रचो कुछ और।

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