विकराल रूप धारण करती महंगी शिक्षा


 विकराल रूप धारण करती महंगी शिक्षा

राज शर्मा


देश में प्रतिवर्ष स्कूलों में शिक्षा महंगी होती जा रही है । शिक्षा एक प्रकार का आधुनिक व्यवसाय बन चुकी है । शैक्षिण जगत में फीस आसमान की ऊंचाइयां छुं रही है । जितनी एक माह की एक अध्यापक का मासिक बेतन नहीं होगा जितनी फीस एक बच्चे से एक माह में ली जाती है । भारत सरकार जहां एक ओर सर्वशिक्षा का दावा करती है वहीं छोटी कक्षाओं से लेकर माध्यमिक स्तर तक महंगी शिक्षा विकराल रूप धारण कर चुकी है । कोर्ट और शिक्षा विभाग के सभी कदम इस महंगाई भरी शिक्षा पर खरी नहीं उतर रही सभी अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं ।

एक समय था जब भारत विश्व पटल पर विश्वगुरु की उपाधि से अलंकृत था क्योंकि भारतवर्ष में ही समस्त प्रकार की गुप्त से गुप्त विद्याओं का उदय हुआ जिसका परचम समस्त विश्व में लहराता रहा। मिस्र देश में गुप्तकालीन पाण्डुलिपियाँ जो भारत से ले गयी थी आज भी एक धरोहर के रूप में आज भी मौजूद है । आज इस परिवर्तन शील समय में समस्त तरह की शिक्षा का लोप हो चुका है अर्थात उनका मूल आधार का स्वरुप डगमगा गया है।

वर्तमान समय अवधि में शिक्षा के उच्च स्तर पर तो विकास कार्य तो हो रहा है परंतु अनेक शिक्षार्थीयों के जीवन के साथ खिलवाड़ भी हुआ है । कई शिक्षा संस्थानों पर बहुत से शिक्षक स्वयं बनावटी (फर्जी) डिग्रियों के जरीए विद्यार्थियो के जीवन को   गहन अंधकारमय प्रकोष्ट में ले जाने का कार्य कर रहे हैं ।

वर्तमान समय में बहूविध कैरियर की शिक्षा नियोजित करने के साथ साथ कई विद्यालय शिक्षा का व्यवसाय कर रहे हैं । इस समय बदतर स्थिति को समझकर इस दिशा में एकीकृत होकर ठोस कदम उठाए और भारत देश की मूल पुरातन शिक्षा पद्धति की गरिमा जो विश्व भर में विख्यात हैं एक बेहतर शिक्षास्तर के जरीए फिर से विश्व पटल पर भारत विश्व गुरु के नाम से अंकित हो सके।

व्यवसाय का शाब्दिक अर्थ होता है, किसी भी क्षेत्र में ऐसे कदम उठना जिससे हमारी मूलभूत सुविधाएं जो हमारी आर्थिकस्तर की हो या समाजिक स्तर की या फिर अपनी बहुत निजी आवश्यकताओं की पूर्ति जिससे हो सके वह  व्यवसाय कहलाता है । सीधे अर्थों में हम ये भी कह सकते हैं की किसी व्यक्ति विशेष द्वारा ऐसा सार्वजनिक श्रम उद्योग जिससे किसी की भी जीवन अर्जित की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके अर्थात उद्योग के किसी भी उत्पाद को विक्रय करना व्यवसाय कहलाता है । आज व्यवसाय के क्षेत्र में भी बहुत व्यापक स्तर का विकास हो रहा है ।


✍ राज शर्मा (संस्कृति संरक्षक)
आनी कुल्लू हिमाचल प्रदेश

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