दिल की हर नफरत गिले की होली जला दीजिए

दिल की हर नफरत गिले की होली जला दीजिए

दिल की हर नफरत गिले की होली जला दीजिए


करनाल- रेलवे रोड स्थित गुरुनानक खालसा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में साँझा साहित्य मंच की मासिक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी की अध्यक्षता कैथल से पधारे साहित्यकार डॉ. प्रद्युम्न भल्ला ने की, विशिष्ट अतिथि गाँव खानपुर (इंद्री) से सूरज रहे। मंच के अध्यक्ष डॉ अशोक भाटिया ने “महिला-दिवस” पर विचार रखे तथा गत माह की साहित्यिक गतिविधियों की भी जानकारी दी। 

युवा कवि रोबिन ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा:

जब सिक्के चलाए जाएंगे तुम्हारे नाम से तो,
सिक्के जो रखते होंगे कीमत
उससे भी कीमती हो जाएंगे।

रायसन से पधारे युवा साहित्यकार विनोद शर्मा के अल्फ़ाज़:

ना महंगे लत्ते ,सोना-चांदी, ना मांगु बंगला कार पिया।
थोड़ी दिल म्ह जगह दे दिए, थोड़ा दे दिए प्यार पिया॥

प्रवीण जन्नत  जोरिया बोले:

एक दूजे के दिल को दिल से मिला लीजिए।
दिल की हर नफरत-गिले की होली जला लीजिए॥

मनोज गौतम ने कहा:

मजबूर न बन, कमजोर न बन, क्या तेरी लाचारी है।
बस याद सिर्फ इतना रखना कि तू भारत की नारी है॥

दुलीचन्द रमन की पंक्तियाँ:

कोमलता की बातें कर न बहलाओ मुझको।
संकीर्णता की बातें कर न भरमाओ मुझको।
आज जो हूँ  खुद के बलबूते पर हूँ,
बात बराबरी की करो तो अपनाओ मुझको॥

सतविन्द्र कुमार राणा ने कहा :
कागज पर हर भाव का, चित्र करे साकार।
लिए हुए हर रंग है, शब्दों का संसार॥

डॉ प्रद्युम्न भल्ला बोले:

इक बोझ नहीं हैं बोझ उठाती हैं बेटियाँ।
दुख झेल के भी सबको हँसाती हैं बेटियाँ॥
बेटे तो बांटते हैं पुरखों की दौलतें
दुख दर्द की जागीर बटांती हैं बेटियाँ।

डॉ कर्मजीत गौतम ने कहा :

मिलते हैं बैठते हैं बातें करते हैं।
और मसला रह जाता है, वहीं के वहीं।।

कृष्ण कुमार निर्माण ने फ़रमाया :

बैर भाव न्ह भूल कै, करो प्यार होली म्ह ।
मतना मौका चूको, करो करार होली म्ह ॥

इस अवसर पर रोबिन, डॉ प्रद्युम्न भल्ला, विनोद शर्मा, डॉ कर्मजीत गौतम को साहित्य में योगदान के लिए प्रमाणपत्र देकर सम्मानित भी किया गया। इसके उपरांत वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अशोक भाटिया ने ‘यक्ष-प्रश्न’ व अन्य लघुकथाओं का पाठ किया। मानवी व अन्य श्रोता के रूप में उपस्थित रहे।

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