संवेदना की एक इबारत हैं गिरीश शाह

संवेदना की एक इबारत हैं गिरीश शाह
संवेदना की एक इबारत हैं गिरीश शाह

ललित गर्ग

हमारे जीवन के तीन महत्वपूर्ण पक्ष है- सत्ता, सम्पदा एवं सेवा। ये तीनों ही बड़ी शक्तियां हैं। सत्ता के पास दंड की शक्ति है, सम्पदा के पास विनियम की शक्ति है और सेवा-संवेदना के पास आत्मविश्वास एवं आस्था की शक्ति है। ये तीनों शक्तियां हमारे जीवन को संचालित करती है, लेकिन अगर एक ही व्यक्ति में तीनों शक्तियों का वास हो तो वह अद््भुत एवं विलक्षण घटित करता है। ऐसा ही एक विलक्षण व्यक्तित्व है- श्री गिरीश भाई जयंतीलाल शाह। वे समस्त महाजन संस्था मुंबई के अध्यक्ष एवं भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य हैं, सच्चे अर्थों में समाजरत्न हैं, समाज-सुधारक एवं जनसेवी हैं, स्मृतिवान एवं कृतिमान है, जो सदा ही भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने, पर्यावरण व प्राणी मात्र की रक्षा करने के लिए तत्पर रहते हैं।

 सेवा का वटवृक्ष उनके जीवन में लहराता रहता है। जिन्दगी कोे सफल, बेमिसाल, आदर्श एवं परोपकारी बनाकर समाज एवं राष्ट्र में नया सवेरा एवं उम्मीद की रोशनी बिखेरने वाला यह व्यक्तित्व अपने मन की उड़ान से मानवता का दिल जीतने की चाह रखते हैं। ऐसा प्रतीत होता है वे सेवा एवं संवेदना की बंजर भूमि पर आशा एवं उम्मीद की एक संभावनाभरी इबारत लिख रहे हैं।
दुबली-पतली काया में बेहद सादगी की मिसाल गिरीश जे. शाह स्वयं में एक व्यक्ति नहीं, संस्था है। उन्होंने अपने जीवन को बिन्दु से सिन्धु बनाया है। उनके जीवन की दास्तान को पढ़ते हुए जीवन के बारे में एक नई सोच पैदा होती है। जीवन सभी जीते हैं पर उनकी तरह सार्थक जीवन जीने की कला बहुत कम व्यक्ति जान पाते हैं। यही कारण है कि भारत सहित विश्व के कल्याण की कामना के साथ वर्ष 2002 में उन्होंने समस्त महाजन संस्था की स्थापना की। ‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’ तथा संस्था का नारा ‘जीव मात्र का कल्याण’ इस ध्येय वाक्य को लेकर एक तपस्वी-सा जीवनयापन करते हुए गिरीश भाई शाह भारत के गांव-गांव में घूमते रहते हैं और ग्राम विकास, पर्यावरण-जल संरक्षण, पशु-कल्याण, नारी उत्थान एवं शिक्षा-चिकित्सा के सपने को साकार करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उनका मानना है कि केवल सरकार देश ही सारी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती। उसमें समाज को भी अपना योगदान देना होगा। 

इसलिए सरकार और सामाजिक संस्थाओं का समन्वय जरूरी है। इस समन्वय के प्रेरक गिरीश भाई लगातार सेवा एवं राष्ट्र-निर्माण के नये मानक गढ़ने को प्रयासरत हैं। मेरा गिरीश भाई से आदिवासी क्षेत्र के उत्थान एवं उन्नयन के कार्यक्रमों को लेकर सम्पर्क बना। गणि राजेन्द्र विजयजी के नेतृत्व में संचालित सुखी परिवार फाउण्डेशन की शिक्षा, सेवा, बालिका शिक्षा, प्राकृतिक खेती, आदिवासी संस्कृति की बहुआयामी गतिविधियों में वे निरन्तर सहयोग करते हैं।

गिरीश भाई एक महाजन एवं महाधन व्यक्तित्व हैं, जिनकी सेवा-योजनाएं, विचारों की महनीयता एवं कर्मों की उपादेयता राष्ट्र एवं समाज के विभिन्न क्षितिजों पर उपलब्धियों के रूप में प्रतिबिम्बित होती रहती हैं। उनका कहना है कि इन 18 वर्षों के कार्यकाल में पूरे भारत भर में जीव दया, गो सेवा और पर्यावरण के प्रति जन- जागृत हो रहे हैं और हमारे साथ जुड़ कर कार्य कर रहे हैं। उनकी योजना है कि ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देकर रसायन मुक्त अनाज का उत्पादन किया जाए और प्राकृतिक खेती एवं पशु आधारित अर्थ-व्यवस्था निर्मित की जाये। ताकि धरती को बंजर होने से बचाया जा सके और बिना किसी मिलावट के अनाज, दूध, दही, घी, मक्खन, पनीर, फल, सब्जियां आदि खाद्य पदार्थ लोगों को सहजता से उपलब्ध हो सके। हमें दवाओं की जरूरत ही न पड़े, ऐसा स्वस्थ जीवन बनाने एवं सभी को स्वच्छ और स्वस्थ रखने के लिए वे एक मिशन पर काम कर रहे हैं। उस दिशा में वे स्वयं आगे बढ़ रहे हैं और जन-जन को आगे बढ़ा रहे हैं। 

ऐसी ही उद्देश्यों को लेकर उन्होंने गतदिनों 12000 किलोमीटर की सम्पर्क-यात्रा की, इस कार्य से प्रेरित होकर हजारों लोग इस मुहीम से जुड़े हैं। वे भारत की सवा सौ करोड़ जनता और विश्व की 7 अरब जनता को स्वच्छ, स्वस्थ एवं सुरक्षित बनाने के लक्ष्य पर वह काम करने के इच्छुक हैं। उनका मानना है कि समाज, संस्था और सरकार का तिकोन बना कर किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर सकते हैं और किसी भी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। जब यह व्यवस्था साकार हो जाएगी तभी पूरी तरह से समाज इस कार्य से जुड़ जाएगा। यदि सरकार स्वच्छता अभियान चलाएगी और हम सड़कों पर कचरा फेंकते रहेंगे तो स्वच्छता मुहिम कभी सफल नहीं होगी। स्वयंशासित समाज और सकारात्मक सोच वाली सरकार होगी तो हम सब मिल कर नया भारत बना सकते है।

समस्त महाजन संस्था सम्पूर्ण विश्व के लिए एक संभावनाभरी उम्मीद की किरण है। पूरे विश्व के प्राणियों को ध्यान में रख कर और विश्व के सभी जीव जंतुओं के कल्याण की कामना के साथ किसी पर कोई अत्याचार न हो, कोई भेदभाव न हो, पक्षपात न हो, पशु-पक्षियों पर अत्याचार न हो, प्रकृति और मानव सह अस्तित्व के सिद्धांत पर चले तो यह संसार स्वर्ग से भी सुंदर हो जाएगा। ऐसे ही उपक्रमों को विस्तार देने के लिये आपने गतदिनों आस्ट्रेलिया सरकार के पानी की बजत के लिये दस हजार ऊंटों को मौत के घाट उतारने के निर्णय का विरोध करते हुए व्यापक आन्दोलन किया एवं वहां की सरकार को भी प्रेरित किया। इस संसार को हिंसामुक्त बनाने, पशु-कल्याण के लिये तत्पर होने एवं सुंदर सृष्टि के लिए न केवल भारत बल्कि दुनिया के लोग इस मुहिम में साथ देने को आगे आ रहे हैं। इसी तरह भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने के लिए समस्त महाजन संस्था प्रतिबद्ध है।

भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य होने के नाते गिरीश भाई शाह पशु -पक्षियों सहित सभी जीव-जंतुओं के संवर्धन, सुरक्षा और उन पर किसी भी प्रकार का अत्याचार न हो, इसके लिए भी सराहनीय भूमिका अदा कर रहे हैं। गत 3 वर्षों से इस बोर्ड के सदस्य के रूप में वे उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। भारत सरकार ने 1960 में उक्त बोर्ड की स्थापना की और पशु हिंसा रोकथाम अधिनियम को लागू किया। बोर्ड का मुख्य कार्य यह है कि निरंतर अध्ययन के तहत पशुओं के विरुद्ध हिंसा रोकने के लिए भारत में प्रवृत्त कानूनों से अद्यतन रहना और समय-समय पर इनमें संशोधन करने का सरकार को सुझाव देना। केंद्र सरकार को पशुओं की अनावश्यक पीड़ा या परेशानी रोकने के संदर्भ में नियम बनाने का परामर्श करना। भार ढोने वाले पशुओं के बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार या स्थानीय प्राधिकरण या अन्य व्यक्ति को पशुओं द्वारा चालित वाहनों के डिजाइन में सुधार करना आदि पशुओं पर अत्याचार न हो, इसका ख्याल रखने की जिम्मेदारी बोर्ड की होती है। 

गिरीश भाई के अथक प्रयास से पूर्व के कानूनों में सुधार किया गया और पशुओं के हित में नए कानून -नियम बनाए गए। 2015 से 2020 तक कुल 10 बार संशोधन किए गए। बोर्ड के सदस्य गिरीश भाई के अनुसार किसी भी देश को संपन्न व सुखी बनाने में पशु धन की अहम् भूमिका होती है। यह आश्चर्य की बात है कि यदि जानवरों को मारा-पीटा जाए या चाबुक से पीटा जाए तो अपराधी को दंड का प्रावधान है और यदि जानवरों को काट दिया जाए तो सरकार उसे 500 रूपये की सब्सिडी देती है। इस तरह के उटपटांग कानूनों में सुधार करना अति आवश्यक है।

गिरीश भाई ने अपने कार्यकाल में अनेक राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और पशुपालन मंत्री से भेंट कर पशुओं को क्रूरता से बचाने को लेकर सकारात्मक चर्चा की। इसका बहुत ही सकारात्मक एवं सार्थक परिणाम सामने आया है। योगी आदित्यनाथ ने पशुओं के संरक्षण के लिए कुल 600 करोड़ का बजट बनाया और कमलनाथ ने 1 हजार गोशालाएं बनाने का आश्वासन दिया। आज जबकि पूरी दुनिया कोरोना वायरस से पीड़ित एवं प्रभावित है, सम्पूर्ण मानवता के सम्मुख जीवन की रक्षा का संकट बना हुआ है इन जटिल हालातों श्री गिरीश भाई ने कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिये शुद्ध एवं सात्विक आहार एवं जीवनचर्या को आधार मानते हैं। मैं पूरे विश्व को यह संदेश देना चाहता हूं कि आने वाली भयंकर बीमारियों से बचना है तो मांसाहार का पूरी तरह से त्याग कर दें। समस्त महाजन संस्था ने कोरोना वायरस के संदर्भ में एक बहुत बड़ी मुहीम जन जागरण के लिए चलाई है।

समस्त महाजन संस्था ने अपने कार्यों की शुरुआत गो-संरक्षण एवं गौ-हत्या पर काबू पाने के साथ-साथ पांजरापोल के विकास से की। अब तक संस्था द्वारा 3215 संस्थाओं को आर्थिक मदद दी गई है और इसके साथ ही उनका मार्गदर्शन भी किया गया है। आदर्श ग्राम विकास के साथ ही संस्था ने वर्षा जल संग्रह, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और आधुनिक गोशालाओं का निर्माण, गोचर भूमि के लिए विशेष रूप से कार्य किया है। 400 से अधिक गांवों में आदर्श ग्राम योजना का कार्य पूरा हो चुका है। 

इस वर्ष संस्था को उम्मीद है कि 200 से अधिक आदर्श गांव बनाने का लक्ष्य पूरा करेंगे। वे शिक्षा, संस्कृति, चिकित्सा, प्रतिभा प्रोत्साहन, महिला विकास के कार्यों को भी बल दे रहे हैं। इसके अलावा संस्था द्वारा अब तक 1 लाख से अधिक वृक्षारोपण व संरक्षण किया गया है। वृक्षारोपण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए वर्ष 2005 में ही संस्था को भारत सरकार द्वारा ‘इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। इसके साथ ही अलग-अलग राज्य सरकारों के साथ मिलकर संस्था अपने कार्यों का विस्तार भी कर रही हैं। वे एक खुशहाल भारत का सपना संजोए, एक आदर्श एवं संतुलित समाज रचना करने के लिये हर मुश्किल का सामना करने को तत्पर है। 


प्रेषक
(ललित गर्ग)
ई-253, सरस्वती कुंज अपार्टमेंट
25 आई॰ पी॰ एक्सटेंशन, पटपड़गंज, दिल्ली-92
फोनः 22727486, 9811051133

Post a Comment

0 Comments

लद्दाख में बढ़ती चीन की सेनाएं : हर छलछंद और जयचंद पर नजर रख आगे बढ़ने की आवश्यकता है