चैत्र संक्रांति को रजत धवल बर्फ की तह से ढका निहरी का कमराह

चैत्र संक्रांति को रजत धवल बर्फ की तह से ढका निहरी का कमराह



चैत्र संक्रांति को रजत धवल बर्फ की तह से ढका निहरी का कमराह

✍ डॉक्टर जगदीश शर्मा 


हिमाचल प्रदेश : चांदी की चादर ओढ़े कमराह की इसी धार में बसा पंडार निहरी का प्रवेश द्वार है। कमराह के आंचल में बसे मताहर गांव के भागचंद ठाकुर और खिला देवी का कहना है कि शुक्रवार पूरी रात रुक-रुक कर बर्फबारी जारी रही। पिछले अढ़ाई-तीन दशक में पहली बार चैत्र मास की संक्रांति को इतनी ज्यादा बर्फबारी हुई। विक्रमी संवत 2076 की विदाई व विक्रमी संवत 2077 के स्वागत के रुप में यह बर्फबारी फसलों के लिए बहुत शुभ है।

संस्कृति मर्मज्ञ डॉक्टर जगदीश शर्मा और व्यापार मंडल पांगणा के अध्यक्ष सुमीत गुप्ता का कहना है कि चैत्र मास की बर्फबारी का अपना एक अलग ही महत्व है। इससे गर्मी और गर्मियों में होने वाली पानी की कमी से राहत मिलेगी। गुमनाम किंतु महत्वपूर्ण कमराह निहरी उप-तहसील की सबसे ऊंची टेकड़ी है,और मताहर सबसे ऊंचा गांव। निहरी तहसील का कमराह उन प्रकृति प्रेमियों, श्रद्धालुओं,शोद्धार्थियों और पर्यटकों की बाट जोह रहा है जो प्रकृति के अनंत सौंदर्य के साथ-साथ मौन भाषा में प्रकृति की धड़कन को भी सुन सकें ।

शांत-एकांत देवदार के विशालकाय वृक्षों से घिरा कमराह वह पूण्य स्थान है जहां रत्नयक्ष (कमरुदेव जी) सरानाहुली से पूर्व स्थापित होना चाहते थे। लेकिन दूर खेतों में हल जोत रहे व्यक्तियों/"हालियों" के द्वारा बैंलों को हांकती बार प्रयोग किए गये "होरहट' शब्दों से वातावरण की शांति भंग होने के कारण कमरूनाग ने यह स्थान त्याग दिया। साहित्यकार डॉक्टर हिमेन्द्र बाली "हिम" का कहना है कि कमरुदेव जी के इस स्थान पर निवास करने के कारण ही इस स्थान का नाम कमराह पड़ा।

प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का हृदय स्थल कमराह प्राचीन काल से ही धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का केन्द्र है लेकिन समय काल के परिवर्तनवश अपने मूल रुप से विलुप्त प्राय स्थिति में है। पंडार-निहरी वाहन योग्य मार्ग फर स्थित पटाहड़ गली से "पोटैटो फार्म" होकर लगभग 20 मीनट की ट्रैकिंग के बाद कमराह पहुंचा जा सकता है। देवदार के विशाल पेड़ों से घिरे कमराह जैसे शांत-एकांत स्थल में पहुंचना और प्रकृति का आनंद लेना एक स्वप्न सा प्रतीत होता है। इस तीर्थ स्थान के आकर्षण से बंध पंडार-निहरी मार्ग पर स्थित घलैंढी में ओशो ग्राम और कमराह पर्वत श्रृंखलाएं आज प्रदेश-देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हैं। ओशो ग्राम घलैंढी से दवारलु-मताहर होकर लगभग 30 मीनट की ट्रैकिंग कर तपस्वी योगी रत्नयक्ष के अलौकिक धाम कमराह पहुंचा जा सकता है।


डॉक्टर जगदीश शर्मा 
पांगणा करसोग 
मण्डी (हिमाचल प्रदेश)

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