अनन्तराम चौबे 'अनन्त' की रचना -आइना



आइना 


अनन्तराम चौबे अनन्त


कहते है आइना झूठ न बोलें
सच्चाई सबकी दर्पण  खोलें ।
जबानी बुढ़ापा सभी का दिखाये
आइना कभी भी झूठ न बोलें ।

जबानी की उम्र दर्पण दिखाये
चेहरा है कैसा आइना दिखाये 
सच चाहे जितना अपना छुपालो
सच्चाई सभी की सामने वो लाये ।

जबानी की उम्र आइना दिखाये 
उभारते बालों की मूंछें दिखाये
आइने में सुरत जब भी देखोगे 
हर उम्र की तस्वीर देखोगे ।

गुस्से में रहोगे गुस्सा दिखेगा
गम में रहोगे गम ही दिखेगा ।
हंसी चेहरे में होगी तो हंसता
हुआ अपना चेहरा भी दिखेगा ।

दुख होगा मन में चेहरे में दिखेगा
दुखी भरा मन खुश न दिखेगा
कोशिश कर लो जितनी भी
आइना कभी भी झूठ न बोलेगा ।
   
अनन्तराम चौबे अनन्त
जबलपुर (म.प्र.)
9770499027

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