हजारों वर्षों के इतिहास को संजोए श्री कोटेश्वर महादेव की अद्भुत महिमा



श्री कोटेश्वर महादेव की अद्भुत महिमा

हजारों वर्षों   के इतिहास को संजोए श्री कोटेश्वर महादेव की अद्भुत महिमा

 ✍️ हितेन्द्र शर्मा

कुमारसैन का वास्तविक नाम कुम्हारसेन है। कुम्हार शब्द का जन्म संस्कृत भाषा के शब्द “कुंभकार” से हुआ है जिसका अर्थ है मिट्टी के बर्तन बनाने वाला, कुम्हारो के अस्तित्व के कारण इस स्थान का नाम कुम्हारसेन रखा गया होगा जोकि आज कुमारसैन के नाम से विख्यात है। प्राचीन कुम्हारसेन रियासत वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला का एक उपमंडल है। पुनर्सीमांकन से पहले यह कुमारसैन विधानसभा क्षेत्र के रूप में भी प्रसिद्ध रहा। कुम्हारसेन ठकुराई और कुम्हारसेन रियासत के रुप कुमारसैन का प्राचीन एंव रोचक इतिहास वाचिक और लिखित तौर पर संदर्भ के रूप में मौजूद है। 

देवस्थानों के कारण हिमाचल प्रदेश को देवताओं की भूमि अर्थात देवभूमि कहा जाता है। देवभूमि के सभी क्षेत्रों का संचालन स्थानीय देवी-देवताओं द्वारा ही किया जाता हैं। कोटेश्वर महादेव एक अदृश्य शक्ति के रूप में अनंत काल से अधिष्ठाता के रुप में कुमारसैन में प्रतिष्ठित है। महादेव से अभिप्राय भगवान शिव अर्थात सबसे बड़े देवता से है। सनातन धर्म के अनुसार ब्रह्म, विष्णु और महेश तीन प्रमुख देवता हैं, और भगवान शिव को ही महेश कहा गया है। अविनाशी भगवान शिव अपने सौम्य और रौद्र रूप के लिए इस जगत में विख्यात है। लय एवं प्रलय दोनों ही महादेव के अधीन हैं।

प्राचीन काल में सीमाओं के तहत ठुकराई, रियासत और राजवंश का अस्तित्व इस क्षेत्र में 11वीं शताब्दी से रियासतों के विलय तक रहा, जोकि वर्तमान में लिखित पन्नों तक सीमित है। जबकि अनादि कोटेश्वर महादेव ने अपने अस्तित्व को पुनः स्थापित किया है। यह महादेव की अद्भुत महिमा है, जिसके हम साक्षी है। प्राचीन दंतकथा के अनुसार मैहणी में कोटेश्वर महादेव का प्रथम मंदिर स्थापित हुआ था। जीर्णोद्धार एंव पुननिर्माण के पश्चात कोटेश्वर महादेव का यह मंदिर अलौकिक सुंदरता के साथ मैहणी में अपने ऐतिहासिक स्थल पर सुशोभित है। कुम्हारो के अस्तित्व वाले ऐतिहासिक स्थल पर वर्तमान में शरकोट मंदिर, भव्य एंव आकर्षक कोटेश्वर महादेव परिसर का पुननिर्माण हुआ है। प्राचीन लक्ष्मी नारायण मंदिर और मंढोली स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार एंव पुनर्निर्माण का कार्य महादेव द्वारा भक्तों के माध्यम से करवाया जा रहा है। 

कोटेश्वर महादेव की केदारनाथ यात्रा के दौरान सहयात्री रहे सौभाग्यशाली भक्तजन उन दैवीय पलों के भी साक्षी रहे, जब महादेव ने केदारी अर्थात साक्षात भगवान केदारनाथ होने का दृष्टांत दिखाया। कहते हैं कि देवताओं का एक पल हमारे एक युग के बराबर होता है, अदृश्य शक्ति के रूप में इष्टदेव श्री कोटेश्वर महादेव अनंत काल से निरन्तर कुमारसैन (कुम्हारसेन) क्षेत्र का कुशल संचालन कर रहे हैं। कोटेश्वर महादेव की कृपा और आशीर्वाद से ही लगभग 1000 वर्ष पूर्व कीर्ति सिंह जिनका उल्लेख कीरत सिंह नाम से भी है, कुम्हारसेन रियासत के प्रथम शासक अर्थात राणा हुए, गया से आए राणा कीर्ति सिंह को कुम्हारसेन रियासत का संस्थापक भी माना जाता है। 

इस पहाड़ी रियासत के इतिहास पर बहारें कुम्हारसेन नामक पुस्तक लिखी गई है। शायद फारसी और उर्दू भाषा के अत्यधिक प्रचलन या इन भाषाओं के विद्वानों के कारण बहारें कुम्हारसेन पुस्तक को इन्हीं भाषाओं में लिखा गया होगा। कुमारसैन के गेजिटियर तथा इतिहास पर लिखित पुस्तकों के पठन तथा जनश्रुति, दंतकथा एंव लोकगाथाओं के श्रवण से सिद्ध होता है कि जिज्ञासा और ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती। अक्सर एक सिरा पकड़ने की कोशिश में दूसरा सिरा छूटना स्वभाविक है। ईश्वर एंव प्रकृति के रहस्यों या अंत जानने के लिए मानव जाति को देव शक्तियों द्वारा सांकेतिक रूप से मनाही है, क्योंकि यह विनाशकारी भी हो सकता है। वास्तव में मनुष्य को अपने ज्ञान एंव स्वाध्याय को आत्मसात करना चाहिए। आत्म सुधार ही ईश्वर के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा एंव भक्ति है। 

कुम्हारसैन रियासत के 58वें राणा के रुप में राणा सुमेश्वर सिंह राजगद्दी पर 1945 से 1948 तक रहे, इसके पश्चात पहाड़ी रियासतों का विलय हो गया। वर्ष 1996 में राणा सुमेश्वर सिंह के देहावसान पश्चात 59वें उत्तराधिकारी के रूप में राणा सुरेंद्र सिंह कुमारसैन में मौजूद है। देव संस्कृति एंव परम्परा के अनुसार राणा की उपस्थिति अनिवार्य है। श्री कोटेश्वर महादेव के गुर (गणैता) के माध्यम से देवता के वचनों अर्थात देववाणी द्वारा क्षेत्र का संचालन होता चला आ रहा है। श्री कोटेश्वर महादेव परिसर, शरकोट मंदिर, मंढोली में स्थित कोटेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर एंव देवरा वर्तमान में कुमारसैन क्षेत्र की पहचान है। हजारों वर्षों का इतिहास को संजोए यह धरोहरें वर्तमान में ईश्वरीय शक्ति के अनंत होने के साक्षात प्रमाण है। भारतीय आध्यात्मिक दर्शनों के अनुसार ज्ञान वह है जो मनुष्य को उन्नत करता है तथा उसके लिए मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।


✍️ हितेन्द्र शर्मा
गांव व डाकघर-किंगल
तहसील कुमारसैन, जिला-शिमला
हि.प्र. पिन-172024
Email – hmskingal@gmail.com
Mobile – 94180-97815

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