शिव स्वरुप कोटेश्वर महादेव का तत्व दर्शन

कोटेश्वर महादेव का तत्व दर्शन


शिव  स्वरुप  कोटेश्वर  महादेव  का  तत्व  दर्शन


✍️ हितेन्द्र शर्मा

श्रद्धा एंव भक्तिभाव से आंखें मूंदकर इष्टदेव का स्मरण करते ही श्री कोटेश्वर महादेव का मनमोहक, सुसज्जित भव्य रथ एकदम स्पष्ट नजर आता हैं। कुमारसैन में महादेव का भव्य रथ चार वर्षों के अंतराल के बाद कोटी देवरा में सुसज्जित होकर प्राचीन मंदिर से बाहर निकलता है। कोटेश्वर महादेव के साक्षात दर्शन के लिए भक्तजनों को भले ही चार वर्षों तक इंतजार करना होता है, लेकिन जब भी सच्चे मन से ध्यान करें इष्टदेव साक्षात दर्शन देते हैं। श्री कोटेश्वर महादेव के भव्य रथ में सोने का छत्र सुशोभित हैं। अत्यंत सुंदर एंव बहुमूल्य सोने का छत्र भक्तजनों को सुख एंव समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान कर रहा है। सम्पूर्ण श्रद्धा एंव भक्तिभाव से महादेव की शरण में रहने वाले भक्तों को सदैव सुख एंव समृद्धि सहित स्वास्थ्य, शांति एंव सौभाग्य की प्राप्ति होती है। लेकिन असत्य, छल-कपट, इर्ष्या, द्वेष एंव मनमुटाव रखने वाले मनुष्य को वास्तविक सुख एंव आध्यात्मिक अनुभूति से सदैव वंचित रहना पड़ता है। देवभूमि में देवी-देवताओं के रथ में सुसज्जित मोहरों की विशेषता है कि इनकी बनावट मनुष्य की भांति छाती (हृदय) तक होती है।

देवता के मोहरों का सम्पूर्ण शरीर नहीं होता है। मोहरों से देवी-देवता समान मनोवृत्ति अर्थात समभाव का संदेश प्रदान करते हैं। क्योंकि समभाव ही वास्तविक धर्म है। कोटेश्वर महादेव प्रतीकों के माध्यम से हमें शिक्षित कर रहे हैं कि मनुष्य ही साक्षात देव हैं। देवताओं के मोहरे समभाव एंव आध्यात्मिक दर्शन द्वारा हमें आत्मा के उत्थान हेतु प्रेरित करते हैं। इष्टदेव सदैव हमारे मन, मस्तिष्क एंव हृदय में वास करते हैं। हमारी समृद्ध देव संस्कृति का यह श्रेष्ठ दर्शन है। अहम् ब्रह्मास्मि और तत्वमसि का संदेश एंव शिक्षा प्रदान करते देवी-देवताओं के मोहरों को कोटि-कोटि प्रणाम है। मनुष्य जीवन के उद्देश्य की खोज ही हमारा सौभाग्य है। भगवान केदारनाथ स्वरूप श्री कोटेश्वर महादेव के अद्भुत एंव भव्य रथ को देखने मात्र से महसूस होता है कि मालिक हमें बेहद सुंदर एंव तर्कपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान कर रहे हैं।

कोटेश्वर महादेव को केदारी भी कहते है। केदारी शब्द से अभिप्राय साक्षात भगवान केदारनाथ से है। इसलिए कोटेश्वर महादेव को शिव स्वरुप कहा गया है। महादेव हमें सत्य, ज्ञान एंव जीवन के उद्देश्य को अपने हृदय में ढूंढने के लिए अनंतकाल से प्रेरित कर रहे हैं। श्री कोटेश्वर महादेव के रथ को भक्तजनों द्वारा नंगे पांव कंधों पर उठाया जाता है। इससे हमें शिक्षा मिलती है कि कामयाबी के शिखर पर पहुंचने के पश्चात भी मनुष्य को हमेशा जमीन से जुड़े रहना चाहिए। देवी-देवताओं के उठने-बैठने और चलने-फिरने में मनुष्य सिर्फ निमित्त मात्र है, श्री कोटेश्वर महादेव का रथ हमेशा उनकी इच्छा से ही चलता है। यह दिव्य रथ मालिक की इच्छानुसार ही कुम्हारसेन रियासत की परम्परागत राह में चलता है। महादेव के रथ से हमें अपनी प्राचीन भारतीय संस्कृति एंव समृद्ध देव परंपराओं के अनुसार सन्मार्ग पर चलने की शिक्षा मिलती है।

शिव का शाब्दिक अर्थ शुभ, मंगल एंव कल्याण है। भगवान शिव कल्याणकारी है, शिव ही सत्य है और शिव ही सुंदर है। प्राचीन कुम्हारसेन रियासत के अधिष्ठाता एंव इष्टदेव श्री कोटेश्वर महादेव के प्रति भक्तजनों में अटूट आस्था एंव श्रद्धा है। ऊबादेश, कुम्हारसेन रियासत का अभिन्न अंग है। ऊबादेश सहित कोटेश्वर महादेव प्राचीन कुम्हारसेन रियासत के कण-कण में विद्यमान है। कुमारसैन के मंढोली एंव कोटखाई के मिहानी में कोटेश्वर महादेव के प्रमुख मंदिरों सहित समस्त प्राचीन रियासत में मालिक के अनेकों मंदिर अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ स्थापित है। अधिष्ठाता श्री कोटेश्वर महादेव अपने गूर (देवा) के माध्यम से समस्त कुमारसैन रियासत के लोगों को परस्पर सहयोग से एकमत होकर धर्माचरण करने की सीख देते हैं। इष्टदेव भौतिक एंव आध्यात्मिक उन्नति के लिए देववाणी के माध्यम से भक्तजनों को सदबुद्धि प्रदान कर सफल एंव सुखद जीवन का आशिर्वाद प्रदान करते हैं।

देवी-देवताओं की कृपा से मानव शरीर हमें परोपकार एंव अच्छे कार्यों के लिए प्राप्त हुआ है। मानव मात्र की सेवा का मार्ग, ज्ञान एंव तप से भी श्रेष्ठ है। मालिक हमें प्राचीन परंपराओं एंव रीति नीति के साथ धर्म की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। देव शक्तियों का संदेश है कि मनुष्य को कभी घमंड नहीं करना चाहिए। धंमड के कारण ही सर्वनाश होता है। वास्तव में अज्ञान मनुष्य के पतन का कारण है और ज्ञान सर्वांगीण उन्नति का प्रमुख साधन है। देवभूमि में अनेकों देवी-देवता विद्यमान है। समस्त देवी-देवताओं के अस्तित्व से हमें यह शिक्षा मिलती है कि भगवान एक है, लेकिन उसके रूप अनेक हैं। समृद्ध देव संस्कृति में जीवन का सार एंव खुशहाली समाहित है। केदारनाथ भगवान शिव का ग्यारहवां ज्योतिर्लिंग है, यह इष्टदेव श्री कोटेश्वर महादेव का प्रमुख स्थान है।

देवभूमि हिमाचल के साथ-साथ भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों में कोटेश्वर महादेव के मंदिर स्थापित है। यह हमारा सौभाग्य कि साक्षात केदारी श्री कोटेश्वर महादेव हमारे अधिष्ठाता एंव इष्टदेव है। शैव दर्शन के अनुसार तत्त्व को शिवतत्व, विद्यातत्व और आत्मत्व तीन मुख्य भागों में बांटकर विस्तृत रूप से समझाया गया हैं। भगवान शिव पूर्ण योगी एंव गृहस्थ भी है। शिव संसार की समस्त व्यवस्थाओं को चलाते है। गृहस्थ होकर पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन भी करते है। शिव अपनी अर्धांगिनी को मातृशक्ति के रूप में देखते है। गृहस्थ जीवन में मन, वचन और कर्म से पवित्रता रख, मर्यादा में रहकर जीवन के उद्देश्य की वास्तविक राह में ही आत्म कल्याण संभव है।


✍️ हितेन्द्र शर्मा
गांव व डाकघर किंगल
तहसील कुमारसैन, जिला-शिमला
हि.प्र. पिन-172024
Email – hmskingal@gmail.com
Mobile – 94180-97815

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