अनन्तराम चौबे 'अनन्त' की कविता - निर्भया का बलिदान

निर्भया का बलिदान
निर्भया का बलिदान


 अनन्तराम चौबे 'अनन्त'

बेटी निर्भया तूं बेटी
ही नहीं देश की शान थी ।
तेरी मृत्यु ही देश में
तेरा बलिदान थी ।

तुम्हारे साथ हुआ दुष्कर्म
दुराचार अत्याचार देश
वासियों पर कलंक था 
कुछ पहले ही मर गये
बचे हुए भी फांसी पर चढ़ गये ।

रावण और कंस को मारने
राम और कृष्ण ने जन्म लिया था ।
अब न राम हैं न कृष्ण हैं ।
देश का लचर संविधान हैं
बना हुआ अंधा कानून हैं ।

नाबालिग दुष्कर्मियों ने
जजों के हाथ बांध दिये थे ।
देश की हर अदालतों ने
आंखों में पट्टी बांध रखी थी ।
विधायिका के नुमाइंदे
आपस में लड़ रहे थे ।
क्योंकि भ्रष्टाचार के
मामलों में सभी फंसे हुए थे।

कोई हेराल्ड पेपर जांच में
कोई भी डी सी ए की जांच में
कोई सी वी आई की
जांच से बच रहे थे ।
संसद और सड़क पर
आपस में लड़ रहे थे ।

देश की मीडिया में
सभी के चर्च हो रहे थे ।
इस सबको ढेंगा दिखाते
नाबालिग दुष्कर्मी कानून से
बचकर आजाद हो गया था ।
न उसको सजा हुई
न किसी ने उसको सजा
दिलाने की फरियाद की थी ।

लचर संविधान अंधे कानून से
जजों के हाथ बधे थे
दुष्कर्मी को कुछ भी
सजा देने में असमर्थ थे ।
बेटी लेकिन तेरे बलिदान ने
एक नया जुबेनाइल कानून
संसद में पास कराया है ।

नाबालिग को भी सजा देने
का नया कानून बनाया है ।
दुराचारियों से बड़े तो वो हैं
उनको बचाने वाले गुनाहगार है
जो फांसी की सजा मिलने पर
उनको बचाने की अपील किए हैं ।

आखिर 20 मार्च 2020 को
चारों गुनहगारों को फांसी दे दी गई
और बेटी निर्भया के बलिदान की
लड़ाई से सबको खुशी मिल गई ।

 अनन्तराम चौबे 'अनन्त'
जबलपुर (म. प्र.)
2410/
9770499027

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