प्रधानमंत्री क्यों हो रहे सोशल मीडिया से दूर ?

प्रधानमंत्री क्यों हो रहे सोशल मीडिया से दूर ?

 प्रधानमंत्री क्यों हो रहे सोशल मीडिया से दूर ?


(लिमटी खरे)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक ट्वीट ने देश भर में हलचल मचा दी है। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा है कि वे विचार कर रहे हैं रविवार तक वे सोशल मीडिया को छोड़ने का विचार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर यह ट्रेंड बनता दिख रहा है। रविवार अर्थात 08 मार्च, इस दिन महिला दिवस भी मनाया जाता है। प्रधानमंत्री के ट्वीट के बाद अब कयासों का दौर आरंभ हो गया है। अखबारों, टीवी चेनल्स, सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के द्वारा कही गई बात के मायने निकाले जा रहे हैं। लोग अपने अपने तरीके से इसे परिभाषित भी करते दिख रहे हैं। इसी बीच यह बात भी सुनाई दे रही है कि प्रधानमंत्री ने संभवतः महिला दिवस पर अपने सोशल मीडिया को महिलाओं को समर्पित करने की बात कही है। इसका आशय क्या है यह समझ पाना बहुत ही मुश्किल है, क्योंकि अगर प्रधानमंत्री सोशल मीडिया पर नहीं होंगे तो उन्हें यह पता कैसे चलेगा कि वहां क्या चल रहा है।
देखा जाए तो सोशल मीडिया बहुत उपयोगी है, पर देश में इसके सदुपयोग से ज्यादा इसका दुरूपयोग होता दिख रहा है। इसके जरिए विभिन्न समूहों में न केवल अश्लीलता फैलाई जा रही है, वरन हिंसा को बढ़ाने में भी यह प्लेटफार्म कारगर साबित होता दिख रहा है। देश में अनेक मामले इस तरह के सामने आ चुके हैं, जिसमें हिंसा फैलने के लिए सोशल मीडिया को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
हाल ही में दिल्ली के उत्तर पूर्वी हिस्से में हुई हिंसा के बाद प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से अपील की थी कि वे हिंसा में भागीदार न बनें। रविवार की शाम अचानक ही सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें फैलना आरंभ हुई और उसके बाद हिंसा फैलने का सिलसिला आरंभ हो गया। दिल्ली की घटना से प्रधानमंत्री काफी आहत बताए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया को लेकर भारत सरकार काफी संजीदा नजर आती है। सरकार के द्वारा अनेक बार यह कहा जा चुका है कि देश में होने वाली माब लिंचिंग की घटनाओं में सोशल मीडिया की बड़ी भागीदारी है। इस बात का प्रमाण इससे भी मिल जाता है कि सरकार के द्वारा सोशल मीडिया के व्हाट्सऐप प्लेटफार्म पर किसी पोस्ट को सभी समूहों में शेयर करने के बजाए एक बार में महज पांच जगह ही शेयर का आप्शन देने के निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा मन की बात में भी यह कहा गया था कि सोशल मीडिया में आने वाली बातों की पहले सच्चाई को जानें उसके बाद इस तरह की बातों पर भरोसा करें।
वर्तमान में परीक्षाओं का दौर जारी है। इसके चलते यह भी हो सकता है कि प्रधानमंत्री चाह रहे हों कि विद्यार्थी परीक्षाओं के दौरान सोशल मीडिया से दूर रहें और अपना पूरा पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई में ही केंद्रित रखें। इस बात की संभावना कम ही है क्योकि अगर यह वजह होती तो प्रधानमंत्री के द्वारा कुछ समय के लिए खुद को सोशल मीडिया से दूर रखने की बात स्पष्ट तौर पर कही जाती।
देखा जाए तो देश में सोशल मीडिया की धमक के चलते लोगों में अकेलापन और अवसाद दोनों ही बातों में इजाफा होता दिख रहा है। अब लोग आपस में उस तरह चर्चा करते नहीं दिखते जितने कुछ सालों पहले दिखते थे। आज अकेले बैठकर मोबाईल पर ही सोशल मीडिया में लोग घंटों निकाल देते हैं। लोगों को पता ही नहीं चल पाता कि सोशल मीडिया में विचरण करते करते वे अपना कितना जरूरी समय खराब कर देते हैं।
इस पूरे मामले में एक और बात निकलकर सामने आ रही है और वह यह है कि सोशल मीडिया में फेसबुक के यूजर्स की तादाद भारत में बहुत ज्यादा है। इसके जरिए जुकर बर्ग के द्वारा खासी कमाई की जा रही है। इस कमाई में भारत के करोड़ों लोगों की महती भूमिका है। हो सकता है प्रधानमंत्री चाह रहे हों कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर स्वदेशी एप्स को लॉच किया जाए ताकि देश के लोग संपन्न हो सकें। जानकारों का यह भी मत है कि प्रधानमंत्री के सलाहकरों के द्वारा सोशल मीडिया पर स्वेदशी मंच तैयार करने का मशविरा दिया गया हो, और इस पर लंबे समय से काम भी चल रहा हो। अब यह काम पूर्णता की ओर हो, इसके साथ ही प्रधानमंत्री स्वदेशी सोशल मीडिया के मंच को देश को समर्पित कर दें।
इस तरह की बात कहने के पीछे ठोस आधार यह भी है कि भारत के पास वैज्ञानिकों की फौज है। सोशल मीडिया के लगभग सारे प्लेटफार्मस को भारतीय मूल के लोग ही संभाल रहे हैं। सोशल मीडिया पर भारत विरोधी बातें भी तेजी से फैल रही हैं। अगर यह सब कुछ स्वदेशी प्लेटफार्म पर होगा तो निश्चित तौर पर इस तरह की कवायद को रोका जा सकेगा, और वैश्विक स्तर पर भारत की बिगड़ती छवि को सुधारने की दिशा में कदम भी उठाए जा सकेंगे।
कहा जाता है कि दुनिया के चौधरी माने जाने वाले अमेरिका के पास इस तरह के मंच बहुतायत में हैं जिनके जरिए पैसा खर्च कर किसी भी देश के खिलाफ जहर उगला जा सकता है। इसके अनेक उदहारण भी लोगों के सामने हैं। भारत की छवि खराब करने में भी इस तरह के मंच ने अपनी सक्रिय भूमिकाएं निभाईं हैं।
अगर भारत इस तरह के सोशल मीडिया पर अपना निजि और स्वदेशी मंच तैयार करता है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए, क्योंकि इस मंच के सारे नियंत्रण भारत के हाथों में ही होंगे और इसके अघोषित ब्रांड एंबेसेडर कोई और नहीं, वरन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं होंगे। नरेंद्र मोदी के वैश्विक स्तर पर बेहतरीन साख के चलते दुनिया भर की अनेक हस्तियां भी इस तरह के प्लेटफार्म से हंसी खुशी जुड़ सकती हैं।
यहां यह बताना भी लाजिमी ही होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में स्वदेशी और डिजीटल शब्दों का उपयोग बार बार किया जाता है। फिलहाल तो सब कुछ अटकलों के बीच ही चल रहा है, इस बात से कुहासा तब तक नहीं हट सकता कि प्रधानमंत्री ने इस तरह का फैसला क्यों लिया है जब तक वे खुद ही इस बात का खुलासा नहीं करते कि उनके द्वारा इस तरह का ट्वीट क्यों किया है!

(लेखक

(लिमटी खरे)
(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं.)

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