द्वापर युग के इतिहास को समेटे ब्रह्मखण्ड पर्वत श्रृंखला पर माता ब्रह्मचूड़ी की महिमा


द्वापर युग के इतिहास को समेटे ब्रह्मखण्ड पर्वत श्रृंखला पर माता ब्रह्मचूड़ी की महिमा


द्वापर युग के इतिहास को समेटे ब्रह्मखण्ड पर्वत श्रृंखला पर माता ब्रह्मचूड़ी की महिमा


हिमाचल प्रदेश में अनेकों सिद्धपीठ शैवपीठ शक्तिपीठ स्थापित है । ऊंचाई वाले क्षेत्रों में माता भगवती का बाल रूप विराजता है । ऐसे ही सुरम्य हिमालय की बेहद ऊंचाई वाले भाग में माता ब्रह्मचूड़ी का बसेरा है । यह स्थान हिमाचल प्रदेश जिला कुल्लू के आनी उपमण्डल से महज 13 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है । समुद्रतल से करीब 16130 फीट की ऊंचाई पर अवस्थित इस सुरम्य दिव्य तपोस्थली के दर्शन आउटर सिराज सहित कई उच्चवर्ती चोटियों एवं आसपास के सभी स्थानों से हो जाते हैं। 

इस स्थान से श्रीखण्ड कैलाश एवं किन्नर कैलाश इन्द्रासन भृगु तुंग सहित कई दिव्य तीर्थों के दर्शन होते हैं।

हिमाचल के 5 जिलों के ऊंचाई वाले शिखरों से प्रत्यक्ष दर्शन होता है।

पांडव भी अज्ञातवास के समय इस दिव्य तपोस्थली पर दर्शन हेतु आए थे।

यह दिव्य तपोस्थली जितनी सुंदर दूर से दिखाई पड़ती है । उतनी ही युगों पुरानी ऐतिहासिक कालगाथा के पन्नों को अपने आप मे समेटे हुए हैं ।  ब्रह्मखण्ड की इस श्रृंखला से कुल्लू मनाली का रोहतांग दर्रा, शिमला, मण्डी ,लहुलस्पिति और किन्नौर के पर्वत श्रृंखलाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन होता है । माना जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव भी इस रमणीय दिव्य तपोस्थली का अवलोकन करने इस स्थान पर आए और इसी पर्वत श्रृंखला के ठीक नीचे की तरफ पहाड़ की तराई में जब पांडवों को सांध्य की बेला में आगे की तरफ़ अंधेरा दिखा तो भीम ने मुष्टिका के प्रहार से पर्वत पर गुफा बना दी जिसके प्रत्यक्ष प्रमाण आज भी युगों पुरानी यह ऐतिहासिक गुफ़ा दे जाती है ।

यहां देवताओं के रथ भी जाते हैं जब किसी देवता को शक्ति प्राप्त करनी होती है तो इस स्थान की यात्रा की जाती है । आउटर सिराज के अधिपति शमश्री महादेव भी इस स्थान पर जाते हैं । ब्रह्मखण्ड की इस सुरम्य श्रृंखला में पाषाण निर्मित माता भगवती के अनगिनत दिव्य विग्रह स्थापित है । बर्फ से लदे इस दुर्गम पर्वत श्रृंखला में जून से लेकर अगस्त तक यात्रा कर सकते हैं । आउटर सिराज के कई देवताओं की रथयात्रा नवम्बर-दिसम्बर को भी इस पर्वत श्रृंखला की ओर शक्ति प्राप्ति हेतु जाते हैं ।



राज शर्मा (संस्कृति संरक्षक)
आनी, कुल्लू (हिमाचल प्रदेश)

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