ममतामयी माँ- अनन्तराम चौबे



ममतामयी माँ


अनन्तराम चौबे

माँ को तड़फता
सिसकता कराहता
 देख मन विचलित
 हो जाता है ।

आँखो मे आंसू नही
मन तड़फ जाता है ।
मां की जिन्दगी के
अंतिम पडाव का ये
हाल देखा नही जाता है ।
दर्द  दिल का
सहा नही जाता है ।

अन्न जल मोह माया
 सभी तो त्याग दिया है ।
सांसो ने जैसे फिर से
 जकड लिया है ।
मृत्यु के ऐसे अन्त ने
 मन को झकझोरा  है ।
इस समय न कोई
 तेरा है न मेरा है ।

धन न दौलत पति
 न बेटा रिश्ते न नाते ।
डाक्टर न दवा
न कोई नेता कोई भी
 कुछ कर पाने मे
 असमर्थ असहाय
 निरूतर हो गये है ।
वाह रे ईश्वर
वाह रे जीवन का अन्त
वह विहंगम दृष्य देख
जैसे सभी सो गये है ।

जिस मां ने पाल
पोसकर इतना सामर्थ
साहसी बनाया ।
उस माँ को
इस हाल मे देख
कुछ नही कर पाया ।
अपने आपको आसमर्थ
आसहाय पाया ।
जिस माँ  को सौ वर्ष
जीने की दुआ माँगता था ।
उस माँ  का अन्त
सौ मिनिट देखना
मुश्किल  था ।

हे ईश्वर अब तो
इस करूणामयी
माँ  का दुख
हरण कर लीजिये ।
हफ्तो से तड़फती
ममतामयी माँ  का
अन्त कीजिए 
और हमेशा के लिये
इस तडफती जिन्दगी
 से मुक्ति  दीजिए ।


अनन्तराम चौबे 
नर्मदा नगर जबलपुर (म. प्र.)

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