मेरी भासा म्हं ग़ज़ल (हरियाणवी ग़ज़ल )



मेरी भासा म्हं ग़ज़ल

 (हरियाणवी ग़ज़ल)


 कर्म चन्द 'केसर'


करकै  माड़े  सोण गया सै।
देक्खो तो यू कौण गया सै।

खूड  बेच  परदेस  गया वा,
माया  आऴा  होण गया सै।

गरीबू के घर जार् या लीडर,
बातां  गैल बऴोण  गया सै।

अय्याश गुरु कै धौरै पगला,
दाग जिगर के धोण गया सै।

बखत की हाथां हार् या सै वा,
इब किस्मत नैं रोण गया सै।

पूत  नसैड़ी  घर  ना  आया,
बाबू रात नैं टोह् ण गया सै।

नफरत की क्यारी म्हं "केसर",
बीज प्यार  के बोण गया सै।


 
कर्म चन्द 'केसर'

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