हिमाचल की अत्यंत मनोरम स्थलों में से एक देओठी




हिमाचल की अत्यंत मनोरम स्थलों में से एक देओठी


डॉक्टर जगदीश शर्मा


हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के अंतर्गत करसोग उप-मंडल में अनेक ऐसे गांव हैं जो देवी देवताओं और ऋषि-मुनियों के कारण अस्तित्व में आए।चुराग- माहूंनाग मार्ग पर सपनोट से लगभग एक किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद बांयी ओर धार-कांढलु मार्ग पर स्थित बल्हड़ो से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित देओठी गांव चारोँ ओर से ढलानदार खेतों सेब के बागानों से सुशोभित एक अत्यंत मनोरम गांव है।

देओठी कांढी-सपनोट पंचायत का एक महत्वपूर्ण स्थल है।ऐतिहासिक,सांस्कृतिक और पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण देओठी में ऋषि परंपरा से संबधित "बीजु देओ"का इतिहास प्रसिद्ध स्थल आज भी अपने पुराने वैभब,प्राचीन कलाकृतियां अपने दामन में संजोए हुए है।इन कलाकृतियों को देख प्रत्यक्ष प्रमाणित होता है कि अतीत में यह मंदिर शिखर शैली का रहा है।मंदिर में दीवारों पर लगे पुराने पत्थरों पर की गई शिल्प कला दर्शनीय है।

मंदिर के गर्भगृह में बीजु द़ेओ शिवलिंग के रुप में विराजमान हैं।मंदिर के आंगन मे तीन दिशाओं में सुरक्षा दीवार बनी है।मंंदिर के बाहर नांगा,जहल,मसाणु की मुंढलियां पूज्य हैं।बस्ती के एक छोर पर स्थित यह मंदिर बरबस ही आकर्षित करता है। लगभग 16 वर्षीय नवनीश बीजु देओ के मुख्य गूर हैं। बीजु देओ का इतिहास इतना पुराना है कि किसी भी बुजुर्ग को मालूम नहीं।फिर भी किंवदंती के आधार पर मंदिर समिति के पूर्व कुठियाला देवी सिंह जी का कहना है कि बीजु देओ का प्राकट्य खलोगड़ा में हुआ।फिर देवता देओठी में पिंडी रुप में प्रकट हुए।फिर देवता ने कांढी में रहने की इच्छा प्रकट की। अंत में क्षेत्रवासियों के संकटों को दूर करते हुए थोबो में भी प्रकट हुए।

बीजु देओ बिजलेश्वर महादेव के नाम से भी जाने जाते हैं।प्राचीन हिमाचल के गौरव का प्रतीक देओठी का शिखर शैली में बना मंदिर  ध्वस्त हो चुका है लेकिन नये बने मंदिर में इसके अवशेष उस समय की स्थापत्य कला का सशक्त प्रतिनिधित्व करते हैं।मंदिर से लगभग 50 मीटर की दूरी पर नीचे की ओर एक खेत में पत्थरों का ढेर झाड़ियों से आवृत है।मान्यता है कि पहले यह मंदिर इसी स्थान पर था।यह मंदिर भूकंप के कारण ढहकर खंडहर में बदल गया तथा देओठी के सौंदर्य तथा वास्तुकला के जीवंत खंडहर में दब गए। पत्थरों में दफन हजारों साल पुराने इस स्थान की रक्षा देवगण नारसिंह जी कर रह रहे हैं।


डॉक्टर जगदीश शर्मा
पांगणा करसोग मण्डी
हिमाचल प्रदेश

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