जबलपुर का नाम करूं रोशन


जबलपुर का नाम करूं रोशन


अनन्तराम चौबे 'अनन्त'

जबलपुर का नाम करूं रोशन
बस मकसद तो यही हमारा है ।
विश्व में इसका पताका फहराए
ऐसा करके दिखाना काम हमारा है ।

इस मकसद को पूरा करने
राह पर अपनी निकल पड़ा था ।
उस मंजिल को पाने को कुछ
अपना भी योगदान कर रहा था ।

राह कठिन थी डगर मुश्किल थी
फिर भी बात ये मन में ठानी थी
साहित्य की राह पकड़ करके
उस कठिन मंजिल को पानी थी ।

कदम बढ़ाए जैसे भी आगे 
मुश्किल भरी इन राहों में ।
राह में रोड़े भी अटकाए
जलने बालों ने इन राहों में ।

लिखे साहित्य में अंगुली उठाई
पेपर में छपने में टांग अड़ाई ।
शहर से बाहर के शहरों में भी
अमेरिका में छपी तो धूम मचाई ।

प्रतियोगिताओं हिस्सा लेकर
प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान मिले ।
ईर्षा रखने वाले विरोध किये
सम्मान जब सैकड़ों उन्हें मिले।

ठोकरे खाईं हिम्मत न हारी
जबलपुर का नाम किया रोशन ।
मंजिल अभी कुछ वाकी है जब
जबलपुर का नाम करूं रोशन ।

नाम रोशन जबलपुर का होगा
देश का भी मान सम्मान बढ़ेगा ।
 कोशिश तो अभी भी जारी है
जब नाम जबलपुर का रोशन होगा ।

पेपर में यदि कविता छप जाए
सम्मान कवि को मिल जाए ।
कवि का हौसला भी बढ़ता है
शहर का नाम भी रोशन होता है ।

ईर्षा जलन रखने वाले कुछ 
पागल चीखते है चिल्लाते हैं ।
सोशल मीडिया के मंचों में
उस कवि को बदनाम करते हैं ।


    अनन्तराम चौबे 'अनन्त'
         जबलपुर म. प्र.
        9770499027

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