"समरीन का स्कूल":नैतिक शिक्षा की बाल-कथाएं

"समरीन का स्कूल":नैतिक शिक्षा की बाल-कथाएं
"समरीन का स्कूल":नैतिक शिक्षा की बाल-कथाएं

लघुकथा के क्षेत्र के विशिष्ट हस्ताक्षर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार डॉ राधेश्याम भारतीय का नवप्रकाशित व सद्यविमोचित बालकथा संग्रह "समरीन का स्कूल" प्राप्त हुआ।

संग्रह में कुल 12 कहानियाँ हैं जो बालमन के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को रोचकता से सामने लाती हैं। पुस्तक की कथाओं की सबसे बड़ी विशेषता है कि ये कि ये न केवल पढ़ने में सरल और रुचिकर हैं, अपितु ये बच्चों को सुनाए जाने की दृष्टि से भी सर्वथानुकूल हैं।

प्रत्येक कहानी एक अलग विषय को संबोधित करती है और किसी न किसी अच्छी भावना या आदत के प्रति बच्चों को प्रेरित करती है। कहानियों के पात्र और संवाद बच्चों के बीच से ही आये स्वाभाविक हुए लगते हैं। राजा-रानी, जंगली जानवर और तंत्र-मंत्र-जादू से भरे बाल कथाओं के संसार में राधेश्याम जी का यह प्रयास एक नया प्रयास है जो बालपन को स्वस्थ पठन की ओर अग्रसर करने की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है।

कहानियों में "गोलू का सपना" परिस्थितियों पर विजय पाकर सपने संभव करने की प्रेरणा है तो "पुल" में जड़ता को समाप्त कर लोकोपयोगी कार्य करने की। "ईनाम" व "तुम ही बनोगे ग्रुप लीडर" कथाओं में अपनी हिचक को तोड़कर आगे बढ़कर नए दायित्व ग्रहण करने का संदेश है। "समरीन का स्कूल" में स्कूल को लिए छोटे बच्चों के लिए आनंददायक स्थान बनाने का संदेश है।"चतुर लोमड़ी का झूठ" झूठ बोलने की आदत से पैदा होते दुष्चक्र को बताती है तो "खुशियों का मंत्र" प्रदूषण के दुष्प्रभाव को। "जिद्दी कबूतरी" हास्य का पुट लिए है पर दृढ़ साधना का मार्ग बताती है। "असली-नकली" में नकल के प्रभाव को दैनिक जीवन के उदाहरण से समझाने का प्रयास है। "नया साल" में अपनी संस्कृति से जुड़ने का आह्वान है तो "आतिशबाजी कहाँ गई" में त्योहारों को समझदारी से निभाने की आवश्यकता पर बल दिया है। "हार-जीत" में खेल भावना पर बल दिया गया है।

कथाओं में लेखक ने संवादों को इस तरह से पिरोया है जो कहीं-कहीं सोचने को मजबूर करते हैं तो कहीं-कहीं उत्साह से भर देते हैं। कुछ उदाहरण देखिये-

आजकल सब भगवान बनना चाहते हैं-पुल

मिलाना बड़ा पुण्य का काम है।- पुल

पढ़ाती तो किताब न खुलवाती-समरीन का स्कूल

पेड़ ही तो मनुष्य की खुशियों की जड़ें हैं-खुशियों का मंत्र

तीन पीढियां एक साथ स्वच्छता का सुंदर वातावरण बना रही हैं।

जिद्द के आगे जीत है। कुछ करने पर आ जाओ तो हम क्या नहीं कर सकते-जिद्दी कबूतरी

भगवान ने किसी के साथ नाइंसाफी नहीं की बल्कि सभी को एक समान बुद्धि दी है। बस, उसके इस्तेमाल करने का फर्क है।-असली-नकली

डर हमें तभी तक डराता है जब तक हम उससे डरते हैं।-असली-नकली

त्योहार का अर्थ अपनी खुशियों के लिए दूसरों को परेशानी में डालना नहीं है- आतिशबाजी कहां गई

 जो जितनी मेहनत करता है उसे उतना ही फल मिलता है: हार-जीत

कुल मिला कर यह एक नैतिक शिक्षा का संदेश देता सरस् संग्रह है जिसे हर बच्चे को और अभिभावकों को पढ़ना चाहिए। पुस्तक की छपाई आकर्षक व चित्रांकन लुभावने हैं। भारतीय जी को बहुत बहुत शुभकामनाएं।


   अजय गुप्ता
 कवि/समीक्षक

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