मेक इन इंडिया को बढ़ाने वाला बजट-2020

मेक इन इंडिया को बढ़ाने वाला बजट-2020


 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब अपना दूसरा बजट-2020 लोकसभा में पेश कर रही थी तो मौजूदा आर्थिक माहौल मायूसी का था. अर्थव्यवस्था (सकल घरेलू उत्पाद) लगातार गिर रही थी. बेरोजगारी दर पिछले 45 वर्षों के सर्वोच्च शिखर पर थी. ऐसी पृष्ठभूमि में बजट तैयार करते समय सरकार के मन में द्वंद की स्थिति तो रही होगी. क्या फौरी तौर पर कुछ कदम उठाए जाएं? जिससे कुछ सकारात्मक राजनीतिक संदेश जाए या मौजूदा लंबी रणनीति के तहत ही आर्थिक सुधारों पर ही जोर रखा जाए. जो भारत  की अर्थव्यवस्था के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5 ट्रिलियन डॉलर के सपने को पूरा करें.

 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन दोनों पक्षों में से दूसरे पक्ष को ही तवज्जो दी. फौरी तौर पर राहत के केवल कुछ ही कदम उठाए गए. जाहिर है कि सरकार अपनी आर्थिक रणनीति के तहत ही आगे बढ़ रही है. वैश्विक परिपेक्ष में विश्व व्यापार युद्ध से पैदा हुई परिस्थितियों में भारत का नजरिया वर्तमान बजट-2020 के माध्यम से पेश करने की कोशिश की गई है. बजट में कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों के प्रावधान इस प्रकार हैं:-

 कृषि

  आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी भारत में कृषि पर निर्भर है. कृषि क्षेत्र के सुधार के बिना एक विकसित भारत की कल्पना नहीं की जा सकती. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का वायदा किया है. वर्तमान बजट में कृषि क्षेत्र को विकास की पटरी पर लाने के लिए 16 सूत्री योजना तैयार की गई है. जिससे कृषि ऋण में 11 फ़ीसदी की बढ़ोतरी के साथ 15 लाख करोड़ का लक्ष्य रखा गया है. सिंचाई के लिए अलग से 1.60 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है. जिससे 100 ऐसे जिलों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी जहां पानी का संकट है. कृषि के साथ-साथ मछली पालन, पशु पालन पर विशेष जोर दिया गया है. वर्ष 2025 तक दुग्ध प्रसंस्करण का लक्ष्य दोगुना किया गया है. फल और सब्जियों के भंडारण के लिए पीपीपी मॉडल का प्रावधान है. किसान रेल, किसान उड़ान योजना के माध्यम से फल और सब्जियों को गंतव्य तक कम समय में पहुंचा कर किसानों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है. हर जिले मेंनिर्यात हबबनाने से भी किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने में सहायता मिलेगी.

 मेक इन इंडिया

 मेक इन इंडिया मुहिम को और भी असरदार बनाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई चीजों पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 20 फ़ीसदी कर दिया है. जिनमें मिक्सर ग्राइंडर, वाटर हीटर, टोस्टर, कॉफी मेकर शामिल है.  चीन से आयात होने वाले खिलौनों पर यह दर 20% से बढ़ाकर 60% कर दी गई है. इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान पर भी ड्यूटी बढ़ा दी गई है. चिकित्सा यंत्रों के आयात पर 5% स्वास्थ्य उपकर लगाया गया है. यह सभी प्रावधान घरेलू उत्पादन को ज्यादा से ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने और मेक इन इंडिया के तहत देश में ही निर्माण करने के उद्देश्य से उठाए गए  है. देश के युवा को  रोजगार का मार्ग केवल मेक इन इंडिया से ही प्राप्त होगा. इसके लिए मोबाइल फोन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक उपकरण के निर्माण की विशेष योजना का प्रावधान किया गया है, ताकि अमेरिका चीन के बीच व्यापार युद्ध का फायदा उठाया जा सके.

 अधोसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर)

 अधोसंरचना के लिए बजट में 130 लाख करोड रुपए के निवेश का प्रावधान किया गया है. इसे देश में एक बेहतर औद्योगिक माहौल बनाने में मदद मिलेगी. साथ ही साथ असंगठित क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. स्टील और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ेगी. अधोसंरचना क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या परियोजनाओं के रास्ते में आने वाली बाधाएं हैं. जिससे उनका कार्य रुक जाता है. समय के साथ-साथ परियोजना लागत बढ़ती चली जाती है. इससे बैंकों से लिए कर्ज फंस जाते हैं. सरकार का पूरा ध्यान इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर केंद्रित होना चाहिए. वर्तमान वित्तीय वर्ष में 15,500 किलोमीटर राजमार्गों तथा वर्ष 2024 तक 100 नए एयरपोर्ट के निर्माण करने की भी योजना है.

 रक्षा

 रक्षा बजट में 5.83 फ़ीसदी की वृद्धि के साथ वर्ष 2020-21 के लिए 3.37,553 करोड रुपए आवंटित किए गए हैं. इसमें 1.13 लाख करोड़ रुपए का आवंटन वायुयान, युद्धपोत तथा सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए किया जाएगा. वेतन तथा रक्षा प्रतिष्ठानों के रखरखाव पर 2.09 लाख करोड रुपए खर्च होंगे. पेंशन भुगतान के लिए भी अलग से 1.17 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है. वर्तमान रक्षा बजट कुल जीडीपी का महज 1.5 फ़ीसदी है. जो 1962 के बाद सबसे कम रक्षा  बजट का आवंटन है.

 कर संरचना

 कर प्रणाली को सरल बनाने के लिएइनकम टैक्स चार्टरलाने की बात बजट में कही गई है. वर्तमान बजट में आयकर की घटी हुई दरों के साथ एक नई स्लैब को लाया गया है. इस स्लैब में आयकर अधिनियम के तहत मिलने वाली विभिन्न छूट नहीं मिल पाएंगी. करदाता अपनी इच्छा के अनुसार नई पुरानी स्लैब में से चुनाव कर सकता है. 5 लाख तक की आय पर कोई कर नहीं देना होगा. 5 लाख से 7:50 लाख तक 10%, 7:50 से 10 लाख पर 15% तथा 10 लाख से ₹12.50 लाख तक 20% और 15 लाख से ज्यादा आय वालों को 30% की दर से कर देना होगा. नई व्यवस्था में ऐसी 70 कटौतीयों को हटा दिया गया है, जिनकी छूट अभी तक करदाता लेता आया था. इस व्यवस्था से उन व्यक्तियों को लाभ होगा जो बचत नहीं कर पाते. सरकार का यह कदम बाजार में मांग बढ़ाने हेतु उठाया गया लगता है. कारपोरेट टैक्स में भी कटौती की गई है. जिससे रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है. 

विनिवेश (डिसइनवेस्टमेंट)/ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 

 सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम में अपनी हिस्सेदारी को शेयर मार्केट के माध्यम से विनिवेश करने का निर्णय लिया है. इंडियन एयरलाइंस तथा टेलीकॉम सेक्टर से भी काफी राजस्व आने की उम्मीद है. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश  (FDI) को पहली बार शिक्षा के क्षेत्र में भी खोल दिया गया है. इससे बाजार की मांग के अनुरूप शिक्षा मुहैया करवाई जा सकती है तथा विश्वस्तरीय संस्थानों का निर्माण भारत में संभव हो सकेगा.अर्थव्यवस्था को और ज्यादा रफ्तार देने तथा विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार ने विदेशी सरकारों के सावरेन बॉन्ड में निवेश पर कर छूट देने का निर्णय लिया है. अधोसंरचना तथा प्राथमिक क्षेत्र में निवेश पर ऐसे सावरेन बॉन्ड्स पर 100%  कर छूट का प्रावधान किया गया है.  कर छूट की समय सीमा 30 मार्च 2024 तक निश्चित की गई है. 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों तथा नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनीज की हालत को सुधारने के लिए अतिरिक्त फंड मुहैया कराने का निर्णय लिया गया है. बैंकों में जमा कर्ताओं की डिपॉजिट इंश्योरेंस और क्रेडिट गारंटी एक्ट 1961 में जमा  राशि की बीमा गारंटी को एक लाख से बढ़ाकर 5  लाख कर दिया गया है. इससे बैंकों में जमा पूंजी कि लाख तक की जिम्मेदारी सरकार की होगी. यह कदम बैंकों के प्रति जमा कर्ताओं का भरोसा बढ़ाने वाला है.

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