रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया से भारत बनेगा आत्मनिर्भर

रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया से भारत बनेगा आत्मनिर्भर
रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया से भारत बनेगा आत्मनिर्भर

 पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के बजट पेश किया जिसमें रक्षा क्षेत्र के लिए 5.83 फ़ीसदी की वृद्धि के साथ वर्ष 2020-21 के लिए 3,37,353 करोड रुपए आवंटित किए गए जिनमें से सिर्फ 1.13 लाख करोड रुपए तीनों सेनाओं के लिए सैन्य साजो समान तथा हथियारों की खरीद के लिए थे.


 आज भारत विश्व का सबसे बड़ा हथियार खरीददार बन गया है. भारत की इस आवश्यकता और मजबूरियों का फायदा कई बार विदेशी हथियार निर्माता कंपनियां उठाती हैं. भारत से मनमाने दाम वसूले जाते हैं. कई बार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां ऐसी बन जाती है कि ज्यादा दाम देने के बावजूद भी समय पर तकनीक नहीं मिल पाती. ऐसी मजबूरियां और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को हरी झंडी दी गई. मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत यह प्रयास किया गया कि समय के साथ भारतीय सेनाओं के लिए जरूरी सामान व हत्यारों का भारतीयकरण किया जाए. ताकि इतने बड़े देश की सुरक्षा तैयारियों और रणनीतिक मोर्चों पर विदेशों पर निर्भरता कम हो.


 रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया मुहिम के बावजूद हाल के वर्षों में आयात पर निर्भरता बढ़ी है. रक्षा सौदों के द्वारा हथियारों व अन्य युद्ध सामग्री का आयात वर्ष दर वर्ष बढ़ रहा है. रक्षा मंत्रालय ने जो आंकड़े संसदीय स्थाई समिति को दिए हैं, वह इशारा करते हैं कि हमारी विदेशी निर्माताओं पर निर्भरता बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2014-15 में हथियारों की खरीद पर 65,859 करोड़ रुपए खर्च किए गए जिनमें से 25,980 करोड रुपए की खरीद विदेशी हथियार निर्माताओं से की गई. वर्ष 2017-18 में कुल खरीद 72,732 करोड रुपए की थी. जिसमें से 29,035 करोड रुपए विदेशी हथियारों की खरीद पर खर्च किए गए. इसी प्रकार वर्ष 2018-19 में कुल 75,920 करोड रुपए की खरीद में से 36,957 करोड़ रुपए विदेशी निर्माताओं को गए. 


 5 से 8 फरवरी तक लखनऊ में आयोजित डिफेंस एक्सपो के उद्घाटन भाषण में भी प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है. उन्होंने कहा कि भारत पर अपनी सुरक्षा के साथ-साथ दुनिया के एक बड़े हिस्से को सुरक्षित रखने की भी जिम्मेदारी है. रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता दुनिया के किसी देश के खिलाफ नहीं है. भारत ने कभी  हथियारों का पहले इस्तेमाल नहीं किया तथा आगे भी उसका इरादा नहीं है. भारत ने हमेशा विश्व शांति के लिए कार्य किया है. 


 इस डिफेंस एक्सपो की थीम “डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन आफ डिफेंस” रखी गई है. इससे यह पता चलता है कि आने वाली सैन्य तकनीक उच्च कोटि की तकनीक पर आधारित होगी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र को रक्षा क्षेत्र में एक निर्माण हब के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं. डिफेंस एक्सपो में 70 से ज्यादा देशों की 1028 कंपनियां हिस्सा ले रही है. जिनमें से 172 विदेशी कंपनियां हैं. इस दौरान 80 से अधिक भारतीय कंपनियों के 90 से अधिक रक्षा उत्पाद लांच किए जाएंगे. जिनमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के 16 उत्पाद भी शामिल है.


 मेक इन इंडिया को बल देने के लिए वर्तमान मोदी सरकार ने निजी क्षेत्र को लाइसेंस देने की पहल की है. 2014  तक निजी क्षेत्र को 210 लाइसेंस दिए गए थे. जबकि वर्तमान में यह संख्या 460 पहुंच चुकी है. रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को 100% तक बढ़ाने के बाद पिछले 5 सालों में 1700 करोड रुपए का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ. पिछले 2 वर्षों में रक्षा निर्यात का आंकड़ा 17,000 करोड रुपए हो चुका है. आने वाले 5 सालों में इसे 35,000 करोड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है.


 आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का होगा. भविष्य के हथियारों में रक्षा तकनीकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस करने की योजना के तहत कार्य चल रहा है. छोटे और मझोले उद्योगों के लिए भी रक्षा क्षेत्र में बेहतर अवसर हैं. जिससे आने वाले समय में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. अभी तक ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के अधिकार क्षेत्र के 600 उत्पादों में से 275 को नान-कोर घोषित किया जा चुका है. जो अब निजी क्षेत्र की कंपनियां  भी बना सकती हैं.


 विश्व में सैन्य अस्त्र-शस्त्र व साजो सामान का बाजार 1.7 ट्रिलियन डॉलर का है. जो पिछले 20 वर्षों में 75% बढ़ा है. भारत को अपने व्यापार घाटे को कम करने के लिए तथा नए-नए क्षेत्रों में निर्यात की संभावना को तलाशना होगा. इतने बड़े देश की सुरक्षा सिर्फ आयात पर निर्भर नहीं रह सकती. भारत के दूरगामी हितों के लिए रक्षा-क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आवश्यक है. हमें आशावादी दृष्टिकोण से आगे बढ़ते रहना चाहिए. इसरो का उदाहरण हमारे सामने है. कभी वे दिन भी थे, जब सैटेलाइट को बैलगाड़ी पर लादकर लांचिंग पैड तक लाया जाता था. लेकिन आज भारत अंतरिक्ष क्षेत्र की महाशक्ति बन चुका है.


विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्ध अंतरिक्ष में लड़े जाएंगे. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष विज्ञान व मेक इन इंडिया मिलकर भारत को सैन्य, आर्थिक व व्यापारिक महाशक्ति बनाने की दिशा में कार्य करेंगे. 

Post a Comment

0 Comments

 विश्व के लिए खतरा है चीन