साँझा साहित्य मंच की मासिक गोष्ठी


साँझा साहित्य मंच की मासिक गोष्ठी
रेलवे रोड़ स्थित खालसा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में साँझा साहित्य मंच की मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया।  स्वामी विवेकानन्द को याद करते हुए गोष्ठी प्रारम्भ हुई। उनके जीवन एवं दर्शन पर, साहित्यकार एवं स्वदेशी जागरण मंच के विभाग सयोंजक दुलीचन्द रमन ने विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला।

मंच के महासचिव सतविन्द्र कुमार राणा ने कविता के भाव, शिल्प एवं शब्द चयन आदि पक्षों पर विस्तृत चर्चा की। तदोपरांत काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

जिसकी  अध्यक्षता  ममता 'प्रवीण' ने की। मंच संचालन दयालचन्द करनालवी  ने किया।

शुरुआत करते हुए विनोद शर्मा रायसन   ने आह्वान किया-

भारत माता घायल है,
नित-नित मिलते घावों से,
पीड़ा हर लो भगत बनो तुम,
तुम विवेकानन्द बनो!

काव्य पाठ करते हुए प्रवीण जोरिया 'जन्नत' ने कहा

आज खुद पर हो रहा,
बड़ा ही गहरा पश्चाताप।
हमारे ही धन पर पल रहे
जे एन यू में आस्तीन के साँप।

दुलीचन्द रमन के बोल

वह जिसे हमने अन्नदाता कहा,
वह जो वक्त से पहले  बूढ़ा होता रहा,
वह जिसका चेहरा झुर्रियों का पर्याय रहा,
वह जो उगाता रहा अन्न मगर भूखा रहा।

सतविन्द्र कुमार राणा बोले-

रहे निरर्थक ही सदा,
जीवन यदि बिन हेतु।
पत्थर भी उससे खरा,
जो बन जाता सेतु।।

दयालचन्द करनालवी  ने कहा

आस्था पर पत्थरबाजी,
छोड़कर तो देख
बसेगा नया संसार,
कहना मान ज़रा।

कृष्ण कुमार निर्माण ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा-

नज्में सियासी हो गयी साहब,
गजलें उबासी  हो गयी साहब।।

इसके साथ ही सभी साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से मौजूदा हालात पर सभी पक्षों से संयमित एवं अहिंसक  मार्ग पर रहने की अपील की।

अध्यक्षा  ममता 'प्रवीण' ने सभी रचनाकारों द्वारा प्रेषित रचनाओं पर टिपण्णी की।

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